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भारत-पाक युद्ध के एक पहलू से जुड़ी फिल्म
'द गाज़ी अटैक '
निर्देशक : संकल्प रेड्डी
कलाकार : राणा दग्गूबत्ती, केके मेनन, अतुल कुलकर्णी, ओम पुरी, राहुल सिंह, तापसी पन्नू
आइए जानते हैं कि क्या कहना है फ़िल्म समीक्षकों का इस फ़िल्म के बारे में
टाइम्स ऑफ इंडिया की रेणुका व्यवहारे का कहना है कि आपको निर्देशक संकल्प रेड्डी की तारीफ़ करनी होगी कि इतने महत्वकांशी प्रोजेक्ट पर काम करने की कोशिश की. आप बीच बीच में ये सोचते हैं कि परफॉर्मेन्स बेहतर हो सकती थी और फ़िल्म को और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था लेकिन फिर भी फ़िल्म अच्छी है .
स्टार: तीन स्टार
इंडियन एक्सप्रेस की शालिनी लैंगर कहती हैं कि फ़िल्म की कहानी के अंदर भी कहानी है और फ़िल्म के किरदार पाकिस्तान को कोसने मे व्यस्त हैं .
स्टार: डेढ स्टार
दैनिक जागरण के अजय ब्रह्मात्मज कहते हैं कि हाल ही में दिवंगत हुए ओम पुरी की मृत्यु के बाद रिलीज हुई यह पहली फ़िल्म है. सबसे पहले उन्हें श्रद्धांजलि और उनकी याद.
यह फ़िल्म पनडुब्बी के नौसेना जवानों के समुद्री जीवन और जोश का परिचय देती है. मुख्य कलाकारों केके मेनन,अतुल कुलकर्णी,राहुल सिंह और राणा डग्गुबाती ने उम्दा अभिनय किया है. सहयोगी कलाकारों के लिए अधिक गुंजाइश नहीं थी.
फ़िल्म में महिला किरदार के रूप में दिखी तापसी पन्नू का तुक नहीं दिखता. 'द गाजी अटैक' सीमित संसाधनों में बनी उल्लेखनीय युद्ध फिल्म है.
स्टार: तीन स्टार
बीबीसी से बातचीत में फ़िल्म समीक्षक अर्नब बनर्जी ने कहा कि "ये एक महत्वपूर्ण फ़िल्म हो सकती थी. हिंदी फ़िल्मों में अब तक भारत पाकिस्तान की वॉर पर कई फ़िल्मे बन चुकी हैं लेकिन यह पहला मौका है जब दोनों देशों की नेवी के बीच की जंग को दिखाया गया है. 1971 की इस जंग का जिक्र कहीं इतिहास में हुआ ही नहीं है. फ़िल्म की टैगलाइन भी यही है- वह युद्ध जिसके बारे में आप नहीं जानते."
फ़िल्म के आरंभ में एक लंबे डिस्क्लेमर में बताया गया है कि यह सच्ची घटनाओं की काल्पनिक कथा है.
अरनब का कहना है कि "फ़िल्म की अच्छी बात ये है कि फ़िल्म में गाने नहीं हैं. कई जगह फ़िल्म नाटकीय हो गई है , कॉमिक बुक का असर नज़र आ रहा था .इसके चलते इंटरवल की बाद फ़िल्म थोड़ी कमज़ोर लगती है . "
स्टार: दो स्टार
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