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आप महिला हैं तो क्या हुआ: गुल पनाग
- Author, सुशांत मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
पूर्व मिस इंडिया, फ़िल्म अभिनेत्री और अब पायलट बनीं गुल पनाग ने भारतीय महिलाओं की स्थापित कई रूढ़ियों को तोड़ा है. हालांकि वह ख़ुद को महिलाओं के लिए आदर्श नहीं मानती हैं.
गुल पनाग ने कहा, "मैं ख़ुशनसीब थी कि एक ऐसे घर में पैदा हुई जहां बाइक चलाना, बाहर जाना या थिएटर करना सिर्फ़ मर्दों का काम नहीं था. वरना हमारे यहां महिलाओं को अपना जीवन साथी या वो क्या पहनें ये तक चुनने की आज़ादी नहीं है."
बीबीसी हिंदी से एक फ़ेसबुक लाइव के दौरान बात करते हुए अभिनेत्री गुल पनाग ने कहा कि बीबीसी 100 Women सिरीज़ एक बढ़िया कोशिश हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दों को सामने लाने के लिए यह अहम क़दम है.
गुल पनाग ने कहा, "यह सच है कि कुछ महिलाएं चांद पर भी जा रही हैं लेकिन यहां कुछ महिलाएं ही हैं. सच्चाई यह है कि भारत और ऐसे कई देशों में अभी भी महिलाओं को स्कूल तक जाने की आज़ादी नहीं है."
साल 1999 में मिस इंडिया रहीं गुल पनाग ने बेहद कम ही फ़िल्मों में काम किया है. उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं कि मेरे पास काम नहीं था, लेकिन मैं एक ही तरह के रोल नहीं निभाना चाहती थी."
गुल पनाग ने कहा, "मैं किसी का नाम लेकर किसी को बदनाम नहीं करना चाहती. महिलाओं से बॉलीवुड में एक ही तरह के रोल की उम्मीद की जाती है. मैं ऐसी नहीं हूं. मैं बेहतर कर सकती हूं और मैं इस बारे में कॉन्फ़िडेंट भी हूं. इसलिए मैं सिर्फ़ अभिनय तक सीमित नहीं हूं."
गुल बताती हैं कि साल 2007 में फ़िल्म 'डोर' के लिए मिली प्रशंसा के बावजूद वह सिर्फ़ अभिनय तक ही ख़ुद को सीमित नहीं करना चाहती थीं. उन्होंने कहा, "देखिए, मैं चाहती हूं कि आपको अगर इंसान के रूप में जन्म लेने का मौक़ा मिला है तो आपको इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए. आप महिला हैं तो क्या हुआ. ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में आपके पास बताने के लिए कितनी कहानियां होंगी यह ज़रूरी है."
गुल बताती हैं कि बाइक चलाना फिर राजनीति में कूदना और फिर पायलट बनना उनका कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं है.
उन्होंने बताया, "मैं ख़ुशनसीब थी की मेरे घर पर ऐसा माहौल था जहां महिलाओं के लिए बाइक चलाना या थिएटर करने पर रोक नहीं थी. मेरी बुआ भी बाइक चलाती थीं और उस ज़माने में लोग उन्हें दबंग मानते थे. मेरा मानना है कि लोग आपके बारे में क्या कहते हैं, इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप अपने लिए क्या करना चाहते हैं और यही महिलाओं को समझने की ज़रूरत है."
गुल महिलाओं से अपील करती हैं, "अगर आपको ज़िंदगी में मौक़ा मिला है कि आप बाहर जा सकें, काम कर सकें तो इतनी अच्छी तरह से उस काम को कीजिए की आप मिसाल बन जाएं.''
गुल मानती हैं कि फ़िल्मों से समाज नहीं बदलेगा बल्कि महिलाओं के हाथ में ही अब उनकी क़िस्मत है, "मेरा मानना है कि वर्किंग महिलाएं इस पूरी दुनिया की महिलाओं की ब्रैंड ऐम्बैस्डर हैं क्योंकि उन्हें साबित करना है कि महिलाएं हर काम कर सकती हैं, और किसी से भी अच्छा कर सकती हैं."
ऐसा कहते हुए गुल एक बार भी पुरुषों को नीचा दिखाने या उनकी महत्ता को कम कर के नहीं आंकतीं. उन्होंने कहा, "मेरे पिता के बाद मेरे पति ने भी मुझे करियर में बहुत मदद की. वह मेरा हौसला बढ़ाते हुए कहते हैं. यही हमारे समाज के पुरुषों को करने की ज़रूरत है."
गुल मानती हैं कि एक औरत को यह तय करना चाहिए कि उसकी प्राथमिकता क्या है? एक बार तय हो जाने के बाद कि वो क्या करना चाहती हैं उन्हें उस काम में जुट जाना चाहिए और घर के मर्दों को या जीवनसाथी या पिता को उसका साथ देना चाहिए.
गुल कहती हैं, "मैं साल 2014 में पंजाब से चुनाव लड़ी थी लेकिन इस साल नहीं लड़ रही हूं क्योंकि यह मेरी प्राथमिकता नहीं है और यह मेरा चुनाव है जिसकी मेरे पति इज़्ज़त करते हैं."
गुल पनाग जल्द ही एक ऐसे परफ़ॉर्मिंग ऑर्ट फ़ेस्टिवल को लेकर आ रही हैं जो सिर्फ़ महिलाओं के लिए होगा और इसमें कई कलाओं की बातें होंगी जिसमें अलग अलग फ़ील्ड की महिलाएं आएंगी. कई शहरों में होने वाले इस फ़ेस्टिवल के ज़रिए वो महिलाओं को उनकी कामकाजी ज़िंदगी से एक दिन की छुट्टी दिलवाना चाहेंगी साथ ही उन्हें कुछ नई सीख भी देना चाहेंगी.
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