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'जोकर के किरदार से प्रेरित नहीं है राख़'
- Author, विदित मेहरा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
फ़िल्म '31 अक्टूबर' के अभिनेता वीर दास ने शॉर्ट फ़िल्म 'राख़' में अपने किरदार का 'जोकर' से प्रेरित होना ग़लत बताया है.
कॉमेडियन अभिनेता वीर दास शॉर्ट फ़िल्म 'राख़' में नेगेटिव किरदार में हैं. ऐसी ख़बरें भी छपी कि इस फ़िल्म में उनका किरदार, हॉलीवुड के विलन 'जोकर' से प्रभावित है, जो 'बैटमैन' की फ़िल्मों में दिखता है.
इस बात का खंडन करते हुए वीर ने कहा, "मेरा किरदार किसी भी तरह 'जोकर' से प्रेरित नहीं है. मैं इस फ़िल्म में एक ऐसे शख़्स का किरदार निभा रहा हूं जो कि ज़िंदगी से हार चुका है और अपने प्यार के लिए वो कुछ भी कर सकता है."
'राख़' को तीन दिनों में ही 30 लाख लोगों ने देखा और ये आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.
'राख़' से पहले भी शॉर्ट फ़िल्में बनीं जैसे 'कृति' जिसमें अभिनेता मनोज बाजपेयी नज़र आए और इंटिरियर कैफ़े नाइट' जिसमें अभिनेता नसीरूद्दीन शाह नज़र आए. पर अब निर्देशक 'शॉर्ट' फ़िल्मों का रुख़ क्यों कर रहे हैं?
इस पर वीर ने कहा, "शॉर्ट फ़िल्मों में बजट की मुश्किल नहीं होती, सेंसर के पचड़े से बच जाते हैं और वो हमेशा इंटरनेट पर रहती है. आप शॉर्ट फ़िल्मों में थोड़ा ज़्यादा क्रिएटिव हो सकते हैं."
इस अक्टूबर साल 1984 के दंगों पर आधारित फ़िल्म '31 अक्टूबर' रिलीज़ हुई थी जिसमें वीर दास ने 'देवेंदर सिंह' का किरदार निभाया था. इसमें सेंसर बोर्ड ने अपनी कैंची चलाई जिससे वीर नाख़ुश हैं.
वीर ने कहा, "फ़िल्म के जो प्रभावशाली दृश्य थे, वो सेन्सर बोर्ड ने काट दिए, जिसकी वजह से फ़िल्म लोगों पर उतनी छाप नहीं छोड़ पाई जितना हमनें सोचा था."
वीर को ये भी लगता है कि फ़िल्मों में सेन्सर बोर्ड की जगह सर्टिफ़िकेशन बोर्ड होना चाहिए और आम जनता को ये निर्णय लेने दें कि वो कौन सी फ़िल्म देखना चाहती है, कौन सी नहीं.
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