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'बदनाम कहानियों' का लेखक रुपहले पर्दे पर
- Author, सुशांत मोहन सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
सआदत हसन मंटो की कहानियां अमर हैं और उनके लेखन पर सालों से नाटक, लघु फ़िल्में बनाई जाती रही हैं.
बंटवारे का माहौल हो या ख़ुद ही अपने जाल में उलझे समाज और सिस्टम की परतें, मंटो ने बिना किसी झिझक के अपने साहित्य में इन परतों को उधेड़ा है.
शायद यही कारण है कि कुछ लोगों के 'बदनाम कहानियों' पर एतराज़ के बावजूद मंटो की कहानियां साहित्य के आला दर्जो में भी शिरकत रखती हैं.
दशकों पहले लिखी गई उनकी कहानियों का सच आज भी हमारे आसपास दिखता है और शायद इसलिए मंटो आज की युवा और डिजिटल जेनेरेशन के लिए भी पुराने नहीं पड़ते.
आने वाले समय में उनपर और उनके साहित्य पर दुनियांभर में कई फ़िल्में-लघु फ़िल्में बनाई जा रही हैं.
मंटो पर बीबीसी की विशेष श्रृंखला की आख़िरी कड़ी में पढ़िए कौन, कब मंटो को आप तक लेकर आ रहा.
मंटो बायोपिक
अभिनेत्री और निर्माता निर्देशक नंदिता दास 2008 में फ़िराक़ जैसी चर्चित फ़िल्म बनाने के लगभग नौ साल बाद अब मंटो पर एक बायोपिक बना रही हैं.
बीबीसी से बात करते हुए नंदिता कहती हैं, "मंटो की कहानियों पर तो सबने बात की लेकिन मंटो पर किसी ने बात नहीं की, कुछ नाटक ज़रूर हुए हैं लेकिन उनका जीवन, उनका मंटो बनने तक का सफ़र अभी भी किसी ने दिखाया नहीं है."
नंदिता के अनुसार लोग जानेंगे कि वो कौन सी ऐसी बातें हैं जिनके चलते मंटो ऐसी कालजयी कहानियां लिख सके.
फ़िल्म अभी स्क्रिप्ट के स्तर पर है, लेकिन मंटो के किरदार के लिए नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी को चुना गया है.
नवाज़ ने बीबीसी से कहा, "मंटो के किरदार के साथ एक अच्छी बात ये है कि लोगों के मन में उनकी कोई छवि नहीं है, किसी ने उन्हें देखा नहीं है इसलिए मैं जैसा कर दूंगा लोग मंटो को वैसा मान लेंगे. लेकिन यही सबसे बड़ी चुनौती भी है क्योंकि मैं मंटो को नवाज़ नहीं, नवाज़ को मंटो बनाना चाहता हूं."
नंदिता स्क्रिप्ट की लेंथ से जूझ रही हैं, साथ ही नवाज़ का स्क्रीन लुक भी फ़ाईनल नहीं हुआ . लेकिन नंदिता कहती हैं कि फ़िल्म अगले साल तक बननी शुरू हो जाएगी.
टोबा टेक सिंह
केतन मेहता की यह फ़िल्म मंटो की प्रतिनिधि कहानी 'टोबा टेक सिंह' पर आधारित है.
फ़िल्म लंदन के एक फ़िल्म फ़ेस्टिवल में दिखाई गई है. भारत में अभी इसका प्रदर्शन होना है.
फ़िल्म में मंटो का किरदार निभा रहे हैं विनय पाठक, पकंज कपूर मुख्य किरदार बिशन सिंद की भूमिका में है.
केतन मेहता के अनुसार भारत में फ़िम्ल के रिलीज़ का समय तय नहीं हुआ है. इसलिए वो इसकी चर्चा नहीं करना चाहते हैं.
खोल दो
फ़िल्म 'पार्च्ड' के निर्माता रहे असीम बजाज ने फ़िल्म निर्देशक आदित्य मोहन के साथ मिल कर फ़िल्म खोल दो बनाई है.
इसपर बनी लघु फ़िल्म के निर्देशक आदित्य कहते हैं, "मैं अभी 25 साल का ही हूं लेकिन मंटो को पढ़ने के बाद मुझे नहीं लगा कि ये कोई पुराने ज़माने की बातें हैं, मुझे वो आज के ही लेखक लगे."
आदित्य कहते हैं, "खोल दो, कहानी को कई लोग अश्लील मान लेते हैं लेकिन ध्यान से देखें तो वो ऐसी नहीं है, वो एक ऐसे सिस्टम की ओर इशारा करती है जहां बंटवारे के बाद विस्थापित हुए लोगों की रक्षा करने के लिए नियुक्त किए गए लोग ही कैसे एक लड़की का बलात्कार करते हैं."
वो आगे कहते हैं, "ये अश्लीलता नहीं है, एक समाज की कुरूपता, कुंठा और विवशता है जिसे मंटो ने बेनक़ाब कर सामने रख दिया था."
आदित्य फ़िल्म को महोत्सवों में ले जा रहे हैं.
वो कहते हैं, "भारत में तो इसे डिजिटली ही देखा जाएगा, शॉर्ट फ़िल्में यहां रिलीज़ नहीं होती. लेकिन दर्शक इसे देखना चाहेंगे और अगर किसी सिलेब्रिटी की नज़र हमारी फ़िल्म पर पड़ी तो इसे भारत में रिलीज़ किया जा सकता है या फिर से बनाया जा सकता है."
आदित्य को उम्मीद है कि जैसे असीम बजाज की फ़िल्म पार्च्ड को अजय देवगन ने भारत में रिलीज़ किया वैसे ही खोल दो को भी कोई सिलेब्रिटी मिल जाएगा.
मंटो पर कुछ नाटक भी आयोजित हो रहे हैं.
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