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आमिर ख़ान निभा सकते थे अन्ना का किरदार
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, मुंबई, बीबीसी हिंदी
वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़नेवाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे का जीवन अब फ़िल्म 'अन्ना' से रुपहले परदे पर आ चुका है.
फ़िल्म के निर्देशक शशांक उदापुरकर पहले अन्ना के किरदार में आमिर खान को लेना चाहते थे.
लेकिन उनकी व्यस्तता के कारण शशांक ने खुद ही अन्ना हज़ारे का रोल निभाना बेहतर समझा.
शशांक उदापुरकर बताते हैं, "फ़िल्म पूरी तरह अन्ना की ज़िंदगी पर आधारित है. इस फ़िल्म में उन्हें एक आम इंसान के तौर पर पेश किया गया है. जिसमें उनकी खूबियों के साथ खामियों को भी दर्शाया गया है."
शशांक के मुताबिक़, "शराब का विरोध करने वाले अन्ना ख़ुद शराब का सेवन कर चुके हैं. सच्चाई की राह अपनाने वाले अन्ना ने झूठ भी बोला था और निराशा में एक बार आत्महत्या करने का प्रयास भी किया था."
जैसे कि महान व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखता है, हमने भी फ़िल्म में यही बताया है कि वो किसन बाबूराव हज़ारे से अन्ना हज़ारे कैसे बने?
बीबीसी से ख़ास रूबरू हुए निर्देशक/अभिनेता शशांक उदापुरकर ने फ़िल्म में अरविंद केजरीवाल के विवादित किरदार पर टिपण्णी करते हुए कहा हैं कि, "अन्ना की ज़िंदगी में कई किरदार आए, जिसमें से कुछ ने उन्हें प्रेरणा दी और कुछ ने उनसे प्रेरणा ली. यह फ़िल्म अन्ना की ज़िंदगी का चल चरित्र है. फ़िल्म में केजरीवाल का भी किरदार है, लेकिन उसे जितनी अन्ना की ज़िंदगी में तवज्जो देनी चाहिए थी, दी गई है."
शशांक उदापुरकर मराठी फ़िल्मों लेखक, डायरेक्टर और एक्टर हैं. शशांक महाराष्ट्र के छोटे-से गांव से मुंबई एक्टर बनने का सपना लेकर आए थे.
उन्होंने कुछ मराठी फिल्मों में समानांतर भूमिकाएं निभाईं, लेकिन वे कुछ ऐसा करना चाहते थे, जो कुछ अलग हो. फिर उन्होंने अन्ना हज़ारे की ज़िंदगी पर रिसर्च करना शुरू कर दिया.
शशांक बताते हैं, "लगभग सालभर की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें अन्ना के जीवन को स्क्रिप्ट में कैद करने में क़ामयाबी मिला जबकि फ़िल्म बनाने में उन्हें साढ़े तीन साल का समय लगा."
शशांक उदापुरकर द्वारा निर्देशित फ़िल्म 'अन्ना' में तनीषा मुख़र्जी भी अहम भूमिका में हैं.