You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
'आम हिंदुस्तानियों का गुस्सा कहां निकलेगा'
भारत प्रशासित कश्मीर में उड़ी हमले के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर तरह-तरह की बयानबाजियां हो रही हैं और इस मुद्दे पर बॉलीवुड भी बंटा हुआ नज़र आ रहा है.
ऐसे में मशहूर लेखक, गीतकार जावेद अख़्तर ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि ये ऐसा मामला है जिसका जवाब सिर्फ हां या ना में नहीं दिया जा सकता है.
जावेद कहते हैं ''भारत हमेशा खुले दिल से पाकिस्तानी कलाकारों का स्वागत करता रहा है, भारतीय हमेशा पाकिस्तानी फ़नकारों को सिर आंखों पर बिठाते रहे हैं, लेकिन हमारे कलाकारों को उतनी तवज्ज़ो उधर से कभी नहीं मिली.''
लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले और किशोर को वहां खूब पसंद किया जाता है, लता जी को पाकिस्तान में पूजा जाता है, आज तक मुझे नहीं याद कि लता जी का पब्लिक छोड़िए प्राइवेट कार्यक्रम भी कभी हुआ हो.
कल्चरल एक्सचेंज के नाम पर यह बहुत बड़ी गड़बड़ है.
वहीं दूसरी तरफ हिंदुस्तान का आम आदमी इस बात से परेशान है कि आज पठानकोट में हमला हो गया, कल उड़ी में हो गया, तो भाई इंसान गुस्सा तो होगा ही.
"अब ये गुस्सा कहां निकले? तो वो अपना गुस्सा निकालते हुए कह रहा है कि हमें इनका कुछ नहीं चाहिए न गायक चाहिए न अभिनेता चाहिए. अब आप इन सभी को भगाइए."
हिंदुस्तानियों की भावना को समझना होगा.
अगर आज पाकिस्तान में जनमत संग्रह करा दें जिसमें यह पूछा जाए कि भारत से कैसे रिश्ते रखने हैं तो सिवाय फौज, मुल्ला और राजनीतिज्ञों के अलावा कोई आगे नहीं आएगा ये कहने कि हमें भारत से रिश्ते खराब रखने हैं.
उड़ी हमलों के बाद पाकिस्तानी कलाकारों का कोई रिएक्शन न आने पर जावेद कहते हैं ''हर आदमी के अंदर खौफ़ होता है. डर होता है. उसे घर वापस जाना है, पाकिस्तान में तो सड़क पर खुले आम गोली मार देते हैं.''
''जहां हाफिज सईद जैसे लोग खुले में घूम रहे हों वहां आम आदमी की क्या हैसियत होगी. समझा जा सकता है.''
जावेद आगे कहते हैं कि हम कितनी भी बहस कर लें लेकिन इस वक्त माहौल इतना गर्म है कि आने वाले कुछ समय तक पाकिस्तानी कलाकारों का भारत में कुछ समय तक आना बंद ही रहेगा.
माहौल थोड़ा बेहतर हो जाए, माहौल ठंडा हो जाए तो फिर सब सामान्य हो जाएगा.
पड़ोसी तो पड़ोसी ही रहेगा. आप उसे बदल नहीं सकते हैं.
जावेद करण जौहर के स्टूडियो पर मनसे कार्यकर्ताओं के पथराव पर कहते हैं, "पाकिस्तानी कलाकारों से काम कराने की सज़ा आप करण जौहर को नहीं दे सकते हैं. उस गरीब का कोई दोष नहीं है. उसने तो कलाकारों को करोड़ो रुपए देकर काम करवाया है और कलाकार पैसे लेकर जा भी चुके हैं."
प्रोड्यूसर ने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया है. किसी भी फिल्म को बनाने से पहले एक प्रक्रिया होती है जिसमें सरकार की रज़ामंदी होती है.
फिल्म बनाने से पहले सरकार वर्क वीज़ा देती है, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया जाता है. फिर कहीं जाकर कलाकार काम कर पाता है.
अब आज माहौल खराब हो गए हैं और एक राजनीतिक पार्टी अगर कह रही है कि हम फिल्म रिलीज़ नहीं होने देंगे तो आप पाकिस्तानी कलाकारों का नहीं अपने लोगों का नुकसान कर रहे हैं.
जहां तक पाकिस्तानी कलाकारों के समर्थन की बात है तो वो भी अपनी जगह ठीक है, कलाकार तो चाहते हैं कि वे हिंदुस्तान रोज आ सकें. भारत से रिश्ते बेहतर बन जाएं.
(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित)