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बाल मज़दूरों के बनाए वस्त्र नष्ट होंगे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पोशाक बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी 'गैप' ने भारत में बाल मज़दूरों की सहायता से बनाए गए वस्त्रों को नष्ट करने का फ़ैसला किया है. बीबीसी के पास ऐसा वीडियो फुटेज है जिसमें दिखाया गया है कि किस तरह परिधान बनाने में बाल मज़दूरों की सहायता ली जा रही है. दूसरी ओर कंपनी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिबद्धता जताई थी कि वो पोशाक बनाने में बाल मज़दूरों का इस्तेमाल नहीं करेगी. अब कंपनी का कहना है कि मामले की जाँच चल रही है और बाल श्रमिकों के इस्तेमाल से तैयार हुए पोशाकों को नष्ट कर दिया जाएगा. फुटेज में दिखाया गया है कि किस तरह एक बच्चा हाथों में सूई और धागे लिए लड़कियों के तैयार हो रही ब्लाउज की सिलाई कर रहा है. संजीदा मामला दुनिया भर में गैप एक लोकप्रिय ब्रांड है और उसका कारोबार लगभग तीन अरब पाउंड का है. कंपनी ने फिलहाल भारत में पोशाक बनाने के लिए दिए ठेकों को रद्द कर दिया है और इलाक़े के सभी आपूर्तिकर्ताओं के साथ आपात बैठक बुलाई है. गैप के एक प्रवक्ता डैन हेंकले का कहना था, "हमें इसी हफ़्ते बताया गया कि किसी रिपोर्टर ने एक फैक्ट्री में बाल श्रमिकों को काम करते हुए पाया जो हमारे एक ब्रांड के लिए कपड़े बनाती है, और यह हमारे लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है." उनका कहना था, "हमने बाल मज़दूरी पर सख़्त रोक लगा रखी है और हम इसे बेहद गंभीरता से ले रहे हैं." कम लागत के कारण पश्चिमी देशों की अग्रणी कंपनियाँ निर्माण कार्य विकासशील देशों में कराना पसंद करती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली में बाल श्रमिक मुक्त कराए गए20 मई, 2007 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरी पर नया सरकारी प्रस्ताव22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरों को रखना हुआ ग़ैरक़ानूनी09 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरी का अर्थशास्त्र06 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल मज़दूरों को रखना ग़ैरकानूनी01 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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