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सोमवार, 04 दिसंबर, 2006 को 14:39 GMT तक के समाचार
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पाक पहुँची भारतीय कंपनी कैफ़े कॉफ़ी डे

कैफ़े कॉफ़ी डे
कैफ़े कॉफ़ी डे की योजना पाकिस्तान में कई स्टोर खोलने की है
भारतीय कंपनियों के बढ़ते क़दम अब पाकिस्तान भी पहुँच गए हैं. भारत की मशहूर कॉफ़ी कंपनी, कैफ़े कॉफ़ी डे ने पाकिस्तान में अपना पहला स्टोर खोला है.

कराची के एक उच्चवर्गीय इलाक़े में पिछले सप्ताह खुलने वाला ये कैफ़े भारतीय कारोबारियों के लिए एक नया अनुभव है.

लेकिन कंपनी के निदेशक नरेश मल्होत्रा का कहना है कि पाकिस्तान में उनके कैफ़े को भारत-पाकिस्तान संबंधों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

नरेश मल्होत्रा ने कहा, “ये एक व्यावसायिक फ़ैसला है. हम चाहते थे कि हम किसी पड़ोसी देश में अपना व्यापार ले जाएँ. हमनें पाकिस्तान को चुना. वहाँ की जनसंख्या ज़्यादा है, ख़ासकर जो युवा वर्ग की तादाद है, वो काफ़ी अच्छी है और हमें लगता है कि हमनें एक अच्छा निर्णय लिया."

उनका कहना था, “चूकि हम शराब नहीं परोसते, तो हमें एक इस्लामिक देश में काम करने में किसी तरह की परेशानी नहीं है. इसलिए पाकिस्तान हमारे समूची बिज़नेस प्लान में बड़ी अच्छी तरह से फ़िट बैठता है."

स्थानीय खान-पान भी

ये एक व्यावसायिक फ़ैसला है. हम चाहते थे कि हम किसी पड़ोसी देश में अपना व्यापार ले जाएँ. हमनें पाकिस्तान को चुना. वहाँ की जनसंख्या ज़्यादा है, ख़ासकर जो युवा वर्ग की तादाद है, वो काफ़ी अच्छी है और हमें लगता है कि हमनें एक अच्छा निर्णय लिया
नरेश मल्होत्रा

कंपनी के निदेशक का कहना था कि कराची के उनके कैफ़े को लोग हाथों हाथ ले रहे हैं और शुरूआती दिनों के बिक्री काफ़ी उत्साहवर्द्धक रही है.

नरेश मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी अगले एक साल में कराची में चार और कैफ़े खोलेगी, उसके बाद कंपनी लाहौर और इस्लामाबाद में भी अपना व्यवसाय शुरू करेगी.

इन तीनों शहरों में कुल 25 कैफे खोलने की योजना है.

पाकिस्तान के लोगों के लिए कैफ़े कॉफ़ी डे अपने मेन्यु में कुछ स्थानीय स्वाद की चीज़ें भी शामिल करने की तैयारी में है.

कंपनी निदेशक ने कहा, “किसी भी जगह आप को वहाँ के स्थानीय स्वाद का ध्यान तो रखना ही पड़ता है. जब हमने विएना(ऑस्ट्रिया ) में अपना स्टोर खोला था तो कुछ भारतीय और एशियाई व्यंजनो के अलावा हमनें
वहाँ का खाना भी मेन्यु में रखा था. पाकिस्तान में भी हम वैसा ही कर रहे हैं. हम कई जगहों का खाना दे रहे हैं, और अलग अलग तरह की कॉफ़ी
तो होगी ही.”

मल्होत्रा ने कहा कि वैसे तो उनकी कंपनी भारतीय है लेकिन वे उसे एक अंतरराष्ट्रीय चेन के रूप में उभारना चाहते हैं.

तो कुर्ग की कॉफ़ी अब कराची में महकेगी, ठहरे-से सियासी रिश्तों की तुलना में कारोबारी मेल-जोल कुछ तो गरमजोशी ला ही सकता है.

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