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फ्रांसीसी वाइन कंपनी भारतीय हाथों में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बियर बनाने वाली कई भारतीय कंपनियों ने यूरोपीय बाज़ार में अपनी अच्छी पैठ बनाई है लेकिन यह पहला मौक़ा है जबकि शराब बनाने वाले किसी भारतीय कंपनी ने फ्रांसीसी वाइन कंपनी को ख़रीदा हो. भारत में व्हिस्की और रम बनाने वाली कंपनी मैकडोवेल ने मशहूर फ्रांसीसी वाइन बनाने वाली कंपनी बोवे लाउदबे का अधिग्रहण कर लिया. मैकडोवेल का कहना है कि भारत में तेज़ी से बढ़ रही वाइन की माँग को देखते हुए ही कंपनी ने यह सौदा किया है. फ्रांस की लोए घाटी में अंगूर की खेती करके वाइन बनाने वाली इस कंपनी के लिए मैकडोवेल ने पौने दो करोड़ डॉलर अदा किए हैं. मैकडोवेल के प्रवक्ता का कहना है कि भारत में परंपरागत रूप से बियर और व्हिस्की ही अधिक पसंद किए जाते हैं लेकिन अब वाइन का चलन पिछले कुछ सालों में बढ़ा है. कंपनी का कहना है कि वह जल्दी ही बोवे लाउदबे वाइन को भारतीय बाज़ार में उतारेगी. मैकोडोवेल का कहना है कि इस नए उत्पाद के आने से शराब के बाज़ार में उसकी साख और पकड़ मज़बूत होगी, कंपनी अभी रम और व्हिस्की के कई जाने-माने ब्रांड भारतीय बाज़ार में बेचती है. कंपनी बड़े पैमाने पर फ्रांसीसी वाइन के निर्यात की भी योजना बना रही है, इसके अलावा वह वाइन को भारत में बोतलबंद करने का काम भी करेगी. बोवे लाउदबे को महँगी कार्बोनेटेड वाइन बनाने के लिए जाना जाता है जिनकी ब्रिटेन, जर्मनी और अमरीका के बाज़ारों में अच्छी माँग है. पिछले वर्ष बोवे लाउदबे ने वाइन की तीस लाख बोतलें बेची थीं और उनका कुल कारोबार डेढ़ करोड़ डॉलर का था. | इससे जुड़ी ख़बरें कोबरा बीयर की कहानी22 अगस्त, 2003 | कारोबार प्राचीन नुस्ख़े से बीयर03 अगस्त, 2002 | पहला पन्ना दो रूपए में बीयर कैन24 दिसंबरजनवरी, 2002 | कारोबार बीयर और लॉटरी का नशा25 अप्रैल, 2003 | कारोबार ज़ायक़ा वही लेकिन बियर असली या नक़ली?19 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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