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हर्जाने में 280 अरब डॉलर की माँग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में तंबाकू कंपनियों से हर्जाने के सरकार के दावे पर मंगलवार को अदालती कार्रवाई शुरू हुई हो गई है. अमरीकी सरकार ने तंबाकू कंपनियों से 280 अरब डॉलर की माँग करते हुए आरोप लगाया कि इन कंपनियों ने जानबूझकर धूम्रपान के ख़तरों के बारे में जनता को धोखे में रखा. एल्ट्रिया और आरजे रेनॉल्ड्स जैसी तंबाकू कंपनियों पर विज्ञापनों के ज़रिए किशोर वय के ग्राहकों को लुभाने का भी आरोप लगाया गया है. विश्लेषकों के अनुसार यदि मुक़दमे में सरकार जीतती है तो, तंबाकू उद्योग दिवालिया हो जाएगा. क्लिंटन प्रशासन ने 1999 में यह मुक़दमा दायर किया था. तंबाकू कंपनियों से पिछले 50 साल में बटोरे गया मुनाफ़ा सरकार को सौंपने की माँग की गई है. ऐसी संभावना है कि मुक़दमे के निपटान में छह महीने तक लग सकते हैं. सरकारी वकीलों की दलील है कि अमरीकी तंबाकू कंपनियों ने सिगरेटों में निकोटिन की मात्रा से छेड़छाड़ कर लाखों लोगों में धूम्रपान की लत डलवायी. सरकार ने जो आरोप लगाए हैं उसके अनुसार अमरीका का पाँच बड़ी तंबाकू कंपनियों ने 1953 में एक बैठक में यह तय किया कि अगले 50 वर्षों तक किस प्रकार जनता की आँखों में धूल झोंकी जाए. ये पाँच कंपनियाँ हैं- फ़िलिप मॉरिस, रेनॉल्ड्स अमेरिकन, लोरिलार्ड टोबैको, लिगेट ग्रुप और ब्राउन एंड विलयम्सन. |
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