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मंगलवार, 03 अगस्त, 2004 को 20:53 GMT तक के समाचार
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खाना बनाने-खिलाने वालों की भारी कमी
भारतीय भोजन
ब्रिटेन में भारतीय खाने की भारी माँग है
ब्रिटेन में दक्षिण एशियाई रेस्तराँ में खानसामों और वेटरों की भारी कमी महसूस की जा रही है.

ब्रिटेन में भारतीय, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी रेस्तराँ के खाने की “करी” के नाम से जाना जाता है और ये खाना दक्षिण एशियाइयों ही नहीं, गोरों को भी काफ़ी लुभाता है.

इस धंधे में मुनाफ़े की गुंजाइश ख़ूब है और इसीलिए ब्रिटेन भर में और ख़ासकर लंदन में आपको जगह-जगह मिल जाएँगे ये रेस्तराँ.

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से लोगों को इन रेस्तराँ में बुलाकर काम कराने के लिए वीज़ा लेना टेढ़ी खीर है.

उसके मुक़ाबले पूर्वी यूरोप के देशों से कई लोग आसानी से ब्रिटेन आ जाते हैं लेकिन उससे परेशानी कम करने में मदद नहीं मिल सकी है.

लंदन में रह रहे बांग्लादेशी मूल के अहमद कोयसूर “बांग्लाटाउन” रेस्तराँ चलाते हैं. परेशान हैं, कहते हैं, “हाल ही में हमने कोशिश की कि पूर्वी यूरोप से आए लोगों को अपने रेस्तराँ में नौकरी दें. लेकिन वो न तो हमारे खाने पहचानते हैं, न उनका नाम समझते हैं और न ही उसका ज़ायका.”

ऐसे में अगर भारत से आप किसी को ब्रिटेन में बुलाना चाहें तो उसकी प्रक्रिया कुछ ऐसी है.

बड़ी कसरत

ब्रिटेन में जिस रेस्तराँ मालिक को भारत से किसी को बुलाना है तो उसे ब्रिटेन के गृह मंत्रालय को बताना होगा कि क्यों उसे इस काम के लिए ब्रिटेन में कोई व्यक्ति नहीं मिल रहा.

हाल ही में ब्रिटेन सरकार तैयार हो गई है कि कुछ लोगों को भारत जैसे देशों से बुलाया जा सकता है बशर्ते वो सिर्फ़ एक साल के लिए आएँ.

अब जो खानसामा भारत से ब्रिटेन आ रहा है उसे भी भारत में ब्रिटेन के वीज़ा अधिकारी को साबित करना होगा कि वो एक साल बाद भारत लौटना चाहता है और वो ऐसा करेगा.

इस लंबी प्रक्रिया के बाद शायद वीज़ा मिल सके. पर ये भी हो नहीं रहा है.

वीज़ा दिलाने का काम कर रही कंपनी इमिग्रेशन एडवाइज़री सर्विस, आईएएस का कहना है कि जितने लोगों को ब्रिटेन बुलाने की अनुमति मिली वो संख्या तो कुछ ही हफ़्तों में पूरी हो गई लेकिन माँग फिर भी पूरी नहीं हुई.

बांग्लादेशी रेस्तराँ के मालिक
कर्मचारी न मिलने से परेशान है रेस्तराँ मालिक

इसके अलावा बांग्लादेश से 10,000 लोगों के आवेदन मंज़ूर किए गए लेकिन इनमें से कई को वीज़ा नहीं दिए गए क्योंकि कुछ के दस्तावेज़ नक़ली पाए गए तो कई के बारे में ये तय नहीं हो सका कि एक साल बाद वो क्या सचमुच ब्रिटेन से स्वदेश लौट जाएँगे.

हज़ारों लोग भारत से नौकरियाँ करने ब्रिटेन आना चाहते हैं. ब्रिटेन में रेस्तराँ मालिकों को तुरंत कई लोगों की ज़रूरत भी है लेकिन ब्रिटेन का गृह मंत्रालय वीज़ा देने को तैयार नहीं है.

इसी स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश केटरिंग एसोसिएशन के महासचिव अशरफ़ुद्दीन ने गृह मंत्रालय से तुरंत बैठक कर कुछ महत्वपूर्ण फ़ैसले लेने की अपील की है.

अशरफ़ुद्दीन कहते हैं, “हमें लगभग 20 हज़ार लोगों की ज़रूरत है. ये हमारी समझ के बाहर है कि जो लोग ब्रिटेन में आकर जमकर मेहनत करेंगे और सरकार को बाक़ायदा टैक्स अदा कर फ़ायदा पहुँचाएँगे उन्हें देश में न आने देकर वो किसका फ़ायदा कर रहे हैं.”

अभी तक ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने इस पर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की है.

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