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उत्तर कोरिया में खाद्य संकट की आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम ने आगाह किया है कि उत्तर कोरिया में उसकी खाद्य सामग्री समाप्त होने के कगार पर है जिससे नया संकट खड़ा होने की आशंका पैदा हो गई है. खाद्य सामग्री की इस किल्लत का कारण विश्व खाद्य कार्यक्रम ने धन नहीं मिलना बताया है. साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर इस संकट को जल्दी ही नहीं सुलझाया गया तो अप्रेल के महीने तक उत्तर कोरिया में क़रीब साठ लाख लोगों को खाना नहीं मिल पाएगा. इसका सीधा सा मतलब बताया गया है कि उत्तर कोरिया में मौजूदा खाद्य राहत अप्रेल से पहले ही समाप्त हो जाएगी. विश्व खाद्य कार्यक्रम के उत्तर कोरिया प्रतिनिधि मसूद हैदर का कहना है कि खाद्य सामग्री अब अंतिम चरण है और बहुत ज़रूरतमंद लोगों तक ही पहले यह सहायता पहुँचाने की कोशिश की जा रही है. हैदर का कहना था कि अगले दो महीने तक सिर्फ़ एक लाख लोगों तक ही खाना पहुँचाया जा सकेगा जिनमें ज़्यादातर बच्चों वाली महिलाएं और अस्पतालों और अनाथालयों में रहने वाले बच्चे हैं. इसका मतलब है कि खाद्य सहायता हासिल करने वाली देश की क़रीब एक चौथाई आबादी को बिना पर्याप्त राशन के ही ये महीने गुज़ारने होंगे. हैदर ने आशंका व्यक्त की है कि इससे लोगों की परेशानियाँ और कुपोषण और बढ़ेंगे. हैदर ने आरोप लगाया कि उत्तर कोरिया में चल रहे खाद्य कार्यक्रम को राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से सहायता राशि नहीं मिल पाई है और इसके लिए उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकाँक्षाएं भी काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार हैं. उत्तर कोरिया पिछले क़रीब नौ साल से विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत सहायता हासिल कर रहा है. उत्तर कोरिया में अंतरराष्ट्रीय खाद्य सहायता कार्यक्रम के तहत अगली खेप अप्रेल में पहुँचनी है. लेकिन तब तक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सामग्री और राशि पहले ही कम हो चुकी है और अगर समुचित राशि नहीं मिली तो जून के बाद नया संकट खड़ा हो सकता है. |
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