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विश्व बैंक से भारत को दोगुना कर्ज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक ने भारत में विकास कार्यों को प्रोत्साहन देने और गरीबी दूर करने के लिए कर्ज़ की रकम दोगुनी कर दी है. इस हिसाब से अब भारत को सालाना तीन अरब डॉलर कर्ज़ आंवटित किया जाएगा. बढ़ी हुई रकम सिंचाई, बिजली, पानी और सड़क परियोजनाओं में उपयोग में लाई जाएगी. इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और गाँववासियों की जीवनशैली में सुधार लाने की योजनाओं पर भी काम होगा. बिहार, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा जैसे पिछड़े राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. विश्व बैंक भारत को अंतरराष्ट्रीय विकास संस्था की ओर से दी जाने वाली 75 करोड़ डॉलर सालाना की रक़म के अलावा दो अरब पंद्रह करोड़ की सालाना राशि भी मुहैया कराएगा. पिछले साल विश्व बैंक ने भारत को क़रीब एक करोड़ पचास लाख की सहायता राशि दी थी. विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "हम ज़्यादा से ज़्यादा राज्यों में काम करेंगे और जिन राज्यों में सबसे ज़्यादा गरीबी होगी, उन पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा." हालाँकि विश्व बैंक ने ये भी कहा कि नई कांग्रेस सरकार ने आंध्र प्रदेश में किसानों को जो मुफ़्त बिजली देने के लिए बजट में प्रावधान की बात कही है, उसे वे समर्थन नहीं देते. प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि कृषि के लिए मुफ़्त बिजली देना अच्छा उपाय है, कम से कम वातावरण के लिए तो इसका कोई लाभ नहीं है." मुफ़्त बिजली होने पर कई किसानों ने ज़्यादा पानी निकाल लिया था, जिससे उसकी कमी हो गई थी. |
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