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ग़रीबी दूर करने के वायदे अधूरेः रिपोर्ट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के अधिकतर विकासशील देश, ग़रीबी को दूर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के तय लक्ष्यों को समय पर पूरा नहीं कर पाएँगे. इन लक्ष्यों को 2015 तक पूरा किया जाना था. मगर अब विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने एक साझा रिपोर्ट जारी की है जिसमें विकासशील देशों के प्रदर्शन पर टिप्पणी की गई है. इन लक्ष्यों को 'सहस्राब्दी विकास लक्ष्य' का नाम दिया गया था. इनमें कुछ प्रमुख लक्ष्य थे - अत्यधिक ग़रीब लोगों की संख्या आधी करना, सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा और प्रसव के समय माँ और बच्चों की होनेवाली मौतों की संख्या कम करना. ज़रूरत रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ये ज़रूरी है कि अमीर देश और आर्थिक सहयोग के लिए दो साल पहले किए गए अपने वायदे को पूरा करें. विश्व बैंक के प्रमुख जेम्स टी वोल्फ़ेंसन ने कहा है,"हम जितनी बात बनाना चाहें बना सकते हैं मगर जब तक हम बुनियादी प्रश्न का सामना नहीं करते तब तक हम लक्ष्य से दूर ही रहेंगे". इससे पहले बुधवार को विश्व आर्थिक मंच ने भी अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कुछ इसी तरह की बातें थीं जैसी की विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट में हैं. इस रिपोर्ट पर अब इस सप्ताहांत वाशिंगटन में एक मत्रिस्तरीय बैठक में चर्चा की जाएगी. |
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