|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एशियाई देशों में विकास सबसे तेज़: एडीबी
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) का कहना है कि पिछले दिनों सार्स बीमारी के कारण पड़े आर्थिक असर के बावजूद एशियाई देश दुनिया में सबसे तेज़ी से विकास कर रहे हैं. एडीबी के अनुसार ये तेज़ी आगे भी जारी रहेगी और इस साल जापान के सिवाय एशिया के बाक़ी देशों में विकास की गति 5.3 प्रतिशत रहेगी और अगले साल ये बढ़कर 6.1 प्रतिशत तक चली जाएगी. इस वर्ष सार्स के कारण 900 से भी ज़्यादा लोगों की जान गई थी और एक अनुमान है कि इससे अर्थजगत को भी लगभग 60 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ. एशियाई विकास बैंक का कहना है कि सिंगापुर और चीन जैसे देशों ने तत्काल क़दम उठाकर सार्स के असर को काफ़ी नियंत्रित भी किया. एडीबी का कहना है कि इस साल की पहली छमाही में अमरीका और यूरोपीय देशों के कमज़ोर प्रदर्शन को देखते हुए एशियाई देशों का ये प्रदर्शन 'ज़्यादा सराहनीय' है. बैंक के अनुसार एशियाई देशों के इस प्रदर्शन का मुख्य कारण चीन में हो रहा विकास है मगर सिंगापुर और थाईलैंड ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है. लेकिन अभी भी एशिया पर से ख़तरा टला नहीं है क्योंकि सार्स के फिर से उभरने की आशंका, आतंकवाद और विश्व अर्थव्यवस्था को लेकर जारी अनिश्चितता जैसे कारण फिर सामने आ रहे हैं. जापान एडीबी ने अपनी रिपोर्ट से जापान को बाहर रखा है जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है मगर पिछले 10 वर्षों से जापान मंदी के दौर से गुज़र रहा है. फ़िलहाल अर्थशास्त्री ये देख रहे हैं कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में आ रहा सुधार जापान को मंदी से उबारता है या नहीं. वैसे मंगलवार को जापान के लिए अच्छी ख़बर ये आई कि वहाँ बेरोज़गारी की दर पिछले दो साल में सबसे निचले स्तर पर चली गई है. मगर जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव यासुओ फुकुदा ने चेतावनी दी है कि अभी ज़्यादा उत्साहित नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, "ख़बर अच्छी है मगर हम अभी भी ये समझते हैं कि स्थिति गंभीर है." |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||