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चाय उत्पादन पर संकट के बादल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के असम राज्य में चाय की लगभग एक चौथाई फ़सल पर हेलोपेल्टिस नामक मच्छर ने धावा बोल दिया है. भारत के चाय उत्पादन में असम का हिस्सा पचास प्रतिशत से भी अधिक है. चाय की खेती करने वालों का कहना है कि इस कीड़े के हमले से इस साल की लगभग 15 प्रतिशत फ़सल नष्ट हो जाने का ख़तरा है. भारत के चाय उत्पाद को हाल ही में भारी धक्का लगा है. चाय की गिरती कीमत, घटता निर्यात और चीन, श्रीलंका, कीनिया के चाय की सस्ती क़ीमत इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं. असम में लगभग 50 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है. असम के 200 छोटे-बड़े बागानों पर इस कीड़े का प्रभाव हुआ है क्योंकि ये मच्छर पौधे के हरे पत्तों को खा जाता है और फ़सल को बर्बाद कर देता है. भारतीय चाय संघ की असम शाखा के सचिव धीरज काकोटी ने कहा कि कीड़ों के हमले को फैलने से रोकने में नाकामी के कारण ये तबाही हुई है. भारत का चाय निर्यात पिछले साल के 22 करोड़ किलोग्राम से घटकर 19 करोड़ किलोग्राम रह गया है और भारतीय चाय की कीमत लगभग 35 प्रतिशत गिर गई है. |
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