|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
डब्ल्यूटीओ का अमरीका के ख़िलाफ़ फ़ैसला
विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ ने अमरीका और यूरोपीय संघ के बीच इस्पात पर शुल्क को लेकर चल रहे विवाद पर अमरीका के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया है. डब्ल्यूटीओ का कहना है कि अमरीका का इस्पात के आयात पर शुल्क लगाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. डब्ल्यूटीओ के फ़ैसले पर अमरीका ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वे इससे असहमत है लेकिन वो इसकी सावधानी से समीक्षा करेगा. अमरीका के शुल्क लगाए जाने से यूरोपीय संघ, जापान और ब्राज़ील नाराज़ थे और उन्होंने डब्ल्यूटीओ में अपनी आपत्ति दर्ज की थी. इस साल मई में डब्ल्यूटीओ ने अमरीका के इस आयात शुल्क को ग़ैरक़ानूनी घोषित कर दिया था. धमकी यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त पास्कल लेमी ने कहा है कि यदि फ़ैसले के बाद भी अमरीका आयात शुल्क जारी रखता है तो यूरोपीय संघ इसके जवाब में अमरीकी उत्पादों पर शुल्क लगा सकता है. यूरोपीय संघ ने दो अरब डॉलर के सामान की एक सूची बनाई है जिसे अमरीका से आयात किया जाता है. अमरीका के इस्पात पर आयात शुल्क लगाने के बाद यूरोप को संभावित डंपिंग से बचाने के लिए यूरोपीय संघ ने भी इस्पात पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगा दिया था. लेकिन यूरोप की इस्पात बनानेवाली कंपनियों माना रही हैं कि अमरीका के आयात शुल्क बढ़ाने से उनके लिए अमरीका जैसा आकर्षक बाज़ार बंद हो रहा है. साथ ही बाकी दुनिया की इस्पात कंपनियाँ भी अपने निर्यात के लिए यूरोप के बाज़ारों पर छा सकती हैं. अमरीकी फ़ैसला जनवरी, 2002 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस्पात के आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय किया था.
यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और रूस ने अमरीकी राष्ट्रपति बुश को इस्पात के आयात पर दंडात्मक शुल्क लगाने की आलोचना की थी. अमरीकी राष्ट्रपति बुश का कहना था कि उनका उद्देश्य अमरीका के बीमार इस्पात उद्योग को बचाना है. पिछले कुछ साल में अमरीका अनगिनत इस्पात कंपनियों का दीवाला पिटने से हज़ारों अमरीकी बेरोज़गार हो चुके हैं. उनका तर्क है कि अगर इस उद्योग को बचाने के उपाय नहीं किए गए, तो अमरीका का इस्पात उद्योग तबाह हो सकता है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||