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दिल्ली में जी-20 समिट से पहले गुरुग्राम में दंगे पर उठे सवाल, भारत का जवाब- प्रेस रिव्यू
हरियाणा के नूंह और गुड़गाँव में हुई सांप्रदायिक हिंसा को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम चाहते हैं, जल्द से जल्द एनसीआर में ‘हालात सामान्य़’ हों.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक़, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची की ओर से ये बयान अमेरिकी विदेश विभाग की उस टिप्पणी के ठीक बाद आया है, जिसमें उसने गुड़गांव और नूंह में हिंसा को लेकर बयान दिया था और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी.
अगले महीने दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन होने वाला है.
एक सवाल के जवाब में बागची ने कहा, “ मुझे यक़ीन है कि लोगों को वहाँ हिंसा रोकने, शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए स्थानीय अधिकारियों की ओर से उठाए जा रहे क़दम की जानकारी है. हम चाहते हैं कि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो.”
उन्होंने ये भी कहा कि अब तक जी20 के सदस्य देशों को एनसीआर के हालात को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है.
मंत्रालय जी-20 की बैठक के आयोजन की तैयारी कर रहा है. ये एक बड़ा आयोजन है, जिसके लिए बड़े स्तर पर लॉजिस्टिक की तैयारियां की जा रही हैं.
साथ ही बैठक में शामिल होने वाले लोगों के लिए बड़े पैमाने पर ट्रांसपोर्ट और ठहरने की व्यवस्था की जा रही है.
सोमवार यानी 31 जुलाई को हरियाणा के नूंह में शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा, गुरुग्राम सहित एनसीआर के अन्य हिस्सों में भी फैल गई, जिससे कई मल्टीनेशनल कंपनियों को अपने कर्मचारियों को घरों से काम करने के लिए कहना पड़ा.
इस हिंसा से जी-20 के आगामी बैठक की योजनाओं को धक्का तो ज़रूर लगा है क्योंकि बैठक से एक महीने पहले हुई इस सांप्रदयिक हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी काफ़ी कवरेज की है.
एनसीआर में हुई होटलों की बुकिंग
जी-20 के नेताओं की सभी बैठकें और औपचारिक भोज प्रगति मैदान के भीतर बने भारतमंडपम में किया जाएगा.
लेकिन तमाम देशों के नेता और प्रतिनिधिमंडल दिल्ली, नोएडा, गुड़गाँव और एरोसिटी के कई होटलों में ठहरेंगे. जी20 सचिवालय पहले ही इन होटलों के साथ संपर्क में है.
अधिकारियों का कहना है कि प्रतिनिधिमंडलों के ठहरने के लिए कमरे बुक कर दिए गए हैं. इस शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित जी-20 के अन्य नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है.
यूरोपीय यूनियन सहित 20 सदस्यों के अलावा इस बैठक में नौ अतिथि देश (बांग्लादेश, मॉरिशस, नाइजीरिया, मिस्र, नीदरलैंड, ओमान, स्पेन, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात) हिस्सा ले रहे हैं. इसके अलावा बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के प्रमुख भी मौजूद होंगे.
अब तक का जो भी तय कार्यक्रम है, उसके मुताबिक़ जी-20 नेता और आमंत्रित सदस्य आठ सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे. नौ सितंबर को इन नेताओं के महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट ले जाया जाएगा.
इसके अलावा गुरुवार को बागची ने ऐलान किया है कि भारत यूक्रेन संकट पर सऊदी अरब की ओर से आयोजित पाँच और छह अगस्त की वार्ता में शामिल होगा.
हालांकि भारत यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के "विशेष ऑपरेशन" की निंदा करने से परहेज करता रहा है.
उन्होंने कहा, “हमारी भागीदारी लंबे समय से चली आ रही स्थिति के अनुरूप ही है, हम मानते हैं कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है.”
कुकी महिलाओं के वीडियो को मैतेई संगठन ने की थी डिलीट करने की कोशिश
चार मई को कुकी महिलाओं के निर्वस्त्र कर परेड कराने और उनके साथ हुई यौन हिंसा के वीडियो के वायरल होने से पहले उसे डिलीट करने की पूरी कोशिश की गई थी.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने इस रिपोर्ट को प्रमुखता से पहले पन्ने पर छापा है.
अख़बार लिखता है कि 18 साल के यमलेम्बम जीबन ने ये वीडियो अपने फोन से बनाया था, जिसे पूरी तरह डिलीट करवाने के कोशिशें की गई थीं.
तीन महिलाओं के साथ हुई यौन हिंसा इस मामले में जो सात लोग गिरफ़्तार हुए हैं जीबान उनमें से एक हैं.
थौबल ज़िले के नोंगपोक सेकमाई अवांग लीकाई गांव में जीबान के एक रिश्तेदार के अनुसार, "गांव के वरिष्ठ लोगों" को पता था कि उसने वीडियो शूट किया था और वो उसके फोन में था.
उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “गांव के वरिष्ठ लोगों ने उसे कई बार वीडियो डिलीट करने की सलाह दी और वह हमसे कहता रहा कि वह ऐसा करेगा, लेकिन उसने इसे अपने चचेरे भाई को भेजा, उस भाई ने इसे दूसरे दोस्त को भेजा. मुझे लगता है कि वहीं से (मैतेई कट्टरपंथी समूह) अरामबाई तेंगगोल को इसके बारे में पता चला. जून में वो लोग गांव आए और लोगों के साथ बैठक की. हम सबने अरामबाई तेंगगोल के लोगों को अपने-अपने मोबाइल फ़ोन दिए उन्होंने सबके फ़ोन चेक किए, उन्होंने जीबान के फोन से वीडियो डिलीट किया.”
‘नूंह हिंसा के ज़रिए राजस्थान में सांप्रदायिकता फ़ैलाने की कोशिश’
अंग्रेज़ी अख़ाबर टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि हरियाणा के नूंह में हिंसा भड़कना बीजेपी की "ध्रुवीकरण की राजनीति" का नतीजा था और पड़ोसी राज्य राजस्थान को प्रभावित करने की साजिश की थी, जहां कुछ चुनाव होने हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा, “नूह में हिंसा ध्रुवीकरण की राजनीति का परिणाम है. ये बीजेपी की रणनीति है. वे चाहते हैं कि ये हिंसा फैल कर राजस्थान तक पहुंच जाए. हमने देखा है कि मणिपुर में क्या हो रहा है. हरियाणा में डबल इंजन सरकार मणिपुर की तरह ही फेल रही है.
कांग्रेस के महासचिव रणदीप सूरजेवाला ने कहा है, “प्रधानमंत्री को मणिपुर से लेकर हरियाणा तक हिंसा दिखती है, उन्हें सब पता है, लेकिन वो चुप रहते हैं. और उनके मुख्यमंत्री दंगाई 'टूल किट' को मौन समर्थन देते हैं.”
"न तो प्रधानमंत्री नए भारत के 'कर्तव्य काल' में अपना कर्तव्य निभाते हैं, न ही मुख्यमंत्री अपने 'राजधर्म' का पालन करते हैं."
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