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जेएनयू में बीती रात क्या-क्या हुआ जिसके बाद पुलिस ने स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के वामपंथी छात्र संगठनों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की है. छात्र संगठनों ने इसको लेकर शनिवार को प्रदर्शन किया और विरोध मार्च निकाला.
वहीं एबीवीपी ने भी लेफ़्ट के छात्र संगठनों पर हिंसा का आरोप लगाया है.
लेकिन शाम होते-होते यह प्रदर्शन तनावपूर्ण हो गया. वामपंथी संगठनों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया और कहा कि पुलिस ने जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष नीतीश कुमार समेत 28 स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया.
दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ी और 'छह पुलिसकर्मियों को घायल' किया.
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हालांकि, रविवार सुबह ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने जानकारी दी कि पुलिस ने हिरासत में लिए गए स्टूडेंट्स को छोड़ दिया है.
जेएनयू में स्टूडेंट यूनियन के चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. नवंबर महीने में चुनाव होनी की संभावना है.
यूनिवर्सिटी ने चुनाव प्रक्रिया की देखरेख के लिए इस महीने की शुरुआत में औपचारिक रूप से एक शिकायत निवारण सेल का गठन किया था.
क्या है मामला?
बीते दिनों जेएनयू के वामपंथी छात्र संगठनों ने एबीवीपी पर मारपीट का आरोप लगाया था. इस मामले में एबीवीपी के स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की मांग हो रही है.
इस मांग को लेकर लेफ़्ट के छात्र संगठन शनिवार को वसंत कुंज थाने तक विरोध मार्च निकाल रहे थे.
हालांकि, पुलिस का कहना है कि उसने स्टूडेंट्स से अपना मार्च वापस लेने की मांग की थी, थाने का 'घेराव' नहीं करने का अनुरोध किया था. लेकिन स्टूडेंट्स ने उनकी बात नहीं मानी.
जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने हिरासत में लिए जाने के बाद एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह पुलिस पर कई आरोप लगाते दिख रहे हैं.
नीतीश कुमार ने कहा, "एसएसएस की जनरल बॉडी मीटिंग के दिन एबीवीपी के लोगों ने मुझे, उपाध्यक्ष, जनरल सेक्रेटरी और काउंसलर को दो घंटे तक बंधक बनाया. हमने दिल्ली पुलिस को फ़ोन किया और मदद मांगी."
"लेकिन, पुलिस के सामने एबीवीपी के लोगों ने जातिवादी गालियां दीं, हमें मारा. दिल्ली पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया. हमने शिकायत भी की, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज नहीं की."
शनिवार के विरोध मार्च के बारे में नीतीश कुमार ने कहा, "जब हम मार्च करते हुए वसंत कुंज थाने जा रहे थे, तो दिल्ली पुलिस के लोगों ने मॉल गेट पर हमें मारा. और अब हमें डिटेन करके ले जा रही है."
समाचार एजेंसी एएनआई ने शनिवार रात का एक वीडियो साझा किया, जिसमें स्टूडेंट पुलिस के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते नज़र आ रहे हैं.
ये स्टूडेंट्स जेएनयूएसयू के पदाधिकारियों को हिरासत में लिए जाने के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी कर रहे थे.
छात्र संगठनों ने क्या कहा?
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने कहा कि जब उसने वसंत कुंज थाने तक मार्च निकालने का प्रयास किया, तो पुलिस ने जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष नीतीश कुमार और कई अन्य स्टूडेंट्स को कैंपस के पश्चिम गेट पर "बेरहमी से पीटा" और हिरासत में ले लिया.
आइसा ने एक बयान में कहा, "एबीवीपी की हिंसा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर की मांग करते समय जेएनयूएसयू अध्यक्ष और अन्य स्टूडेंट्स पर दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की."
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई) ने आरोप लगाया कि पुलिस ने "महिला स्टूडेंट्स के बाल खींचे और उनके साथ हाथापाई की, जिसमें पुरुष पुलिसकर्मी भी शामिल थे."
एसएफ़आई ने दावा किया कि एसपीएस काउंसलर अभिषेक को "बेरहमी से पीटा गया" और उन्हें अस्पताल ले जाया गया.
एसएफ़आई ने कहा, "पुलिस ने जेएनयू के पश्चिम गेट से 28 स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया है और उन्हें कापसहेड़ा बॉर्डर पुलिस स्टेशन ले जाया गया."
जेएनयू में हुई हिंसा को लेकर नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ़ इंडिया (एनएसयूआई) ने भी बयान जारी किया है.
एनएसयूआई ने कहा, "जेएनयू में स्टूडेंट यूनियन के प्रतिनिधियों और अन्य स्टूडेंट्स पर हुई हिंसा की हम निंदा करते हैं. एबीवीपी ने एक बार फिर उन स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ हिंसा, मारपीट और धमकाने का रास्ता अपनाया है, जो उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं."
पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने लेफ़्ट के छात्र संगठनों के आरोपों को ख़ारिज किया है. डीसीपी दक्षिण-पश्चिम अमित गोयल ने इसको लेकर एक बयान जारी किया है.
डीसीपी के मुताबिक़, "क़रीब 70 से 80 स्टूडेंट्स शनिवार शाम क़रीब छह बजे जेएनयू के पश्चिम गेट पर जमा हुए. इन्होंने नेल्सन मंडेला मार्ग पर लगी पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ा और पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की."
पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि स्टूडेंट्स ने यातायात बाधित किया.
डीसीपी अमित गोयल ने कहा, "किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए जेएनयूएसयू पदाधिकारियों समेत कुल 28 स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया गया."
उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना में "छह पुलिसकर्मी घायल हुए" हैं
एबीवीपी ने भी मारपीट का लगाया आरोप
एक तरफ़ लेफ़्ट के छात्र संगठनों ने एसएसएस के जनरल बॉडी मीटिंग के दिन एबीवीपी पर बंधक बनाने और मारपीट का आरोप लगाया, तो वहीं एबीवीपी ने भी लेफ़्ट के छात्र संगठनों पर हिंसा का आरोप लगाया है.
एबीवीपी ने शुक्रवार को एक्स पर दो वीडियो साझा किए और कहा, "जेएनयू में एसएल जीबीएम में लेफ़्ट के काउंसलर्स ने बैठक को केवल एक घंटे के भीतर समाप्त कर दिया. संयोजक की रिपोर्ट पढ़े बिना ही उसे पारित कर दिया गया."
"एबीवीपी के कार्यकर्ता ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो उन पर बेरहमी से हमला किया गया और घायल कर दिया गया."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.