तेजस्वी ने ऑस्ट्रेलिया दौरा किया रद्द, क्या नीतीश कुमार से बढ़ते तनाव का है कनेक्शन?

तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार

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बिहार की महागठबंधन सरकार के दो बड़े दलों जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल के बीच ताज़ा तनाव की ख़बरें हैं. ऐसा दावा द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार अपनी एक रिपोर्ट में कर रहा है.

साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस तनाव के कारण राज्य के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपना ऑस्ट्रेलिया दौरा भी रद्द कर दिया है.

अख़बार के मुताबिक़, ताज़ा तनाव जेडीयू के अध्यक्ष पद से राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह को हटाने के बाद से बढ़ा है. ललन सिंह को हटाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जेडीयू अध्यक्ष बनाया गया है.

माना जा रहा है कि ललन सिंह की आरजेडी से बढ़ती नज़दीकी के कारण ऐसा क़दम उठाया गया है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि नीतीश कुमार विपक्षी इंडिया गठबंधन पर अपने लिए एक मुख्य भूमिका का दबाव डाल रहे हैं और पार्टी पर सीधा नियंत्रण चाहते हैं.

बिहार की महागठबंधन सरकार के बीच साफ़ कलह का संकेत तब भी देखने को मिले जब उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने अपना ऑस्ट्रेलिया दौरा रद्द कर दिया. ये दौरा 6 जनवरी से शुरू हो रहा था.

तेजस्वी यादव आईआरसीटीसी मामले में ईडी के सामने पेशी के अगले दिन पहले से प्लान किए गए इस दौरे पर जाने वाले थे.

तेजस्वी और नीतीश को कैसा डर

तेजस्वी यादव

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आरजेडी के एक मुख्य नेता अख़बार से कहते हैं कि पार्टी ‘अपने मुख्य नेता को देश से बाहर भेजकर राज्य की राजनीति में अनिश्चितता के बीच कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहती है.’

उन्होंने कहा, “तेजस्वी ने दिसंबर में चार मौक़ों पर मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा नहीं किया था. यह हमारे तनावपूर्ण संबंधों का संकेत है. मुख्यमंत्री अपने उप-मुख्यमंत्री को ‘कुशासन’ (आरजेडी के कार्यकाल) को लेकर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर शर्मिंदा करते रहे हैं.”

नीतीश कुमार कई बार कह चुके हैं कि उनकी सरकार से पहले बिहार में कुशासन था.

एक अन्य आरजेडी के सूत्र कहते हैं कि ललन सिंह के जेडीयू प्रमुख पद से हटाए जाने से ‘जेडीयू और आरजेडी के बीच एक अविश्वास पैदा हुआ है, जिसे कोई भी नेता सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं कर रहा है.’

वहीं एक आरजेडी नेता ने कहा कि दोनों दलों के लिए जनवरी बेहद ‘महत्वपूर्ण’ होने जा रहा है.

वो कहते हैं, “हम मंत्रिमंडल का विस्तार (चार मंत्रालय अभी भी भरे जाने हैं) जल्द चाहते हैं. इसके बाद हमको यक़ीन होगा कि महागठबंधन मज़बूत है और हम सकारात्मक मानसिकता के साथ लोकसभा चुनावों में जा सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि इन मतभेदों के बावजूद विधानसभा में संख्याबल के कारण नीतीश गठबंधन के साथ ही रहेंगे.

नीतीश वापस बीजेपी के पास जाएंगे?

नीतीश कुमार

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वो नेता कहते हैं, “आरजेडी, कांगेस और वामपंथी दलों के पास कुल मिलाकर 114 विधायक हैं, जिसमें बहुमत के लिए आठ विधायक कम हैं. वो फिर से एनडीए के साथ जाने का ख़तरा नहीं लेंगे क्योंकि वो मुख्यमंत्री की कुर्सी भी गंवा सकते हैं. नीतीश तब तक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं, जब तक कि वो मुख्यमंत्री हैं.”

2020 के विधानसभा चुनावों में आरजेडी या बीजेपी की तुलना में जेडीयू को सिर्फ़ आधी सीटें मिली थीं. जेडीयू को जहाँ 43 सीटें मिली थीं, वहीं बीजेपी को 74 और आरजेडी को 75 सीटें मिली थीं.

हालांकि, उस समय नीतीश कुमार बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे. अगस्त 2022 में उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया.

महागठबंधन में ‘मतभेदों’ पर अब तक किसी भी जेडीयू नेता ने कुछ नहीं कहा है. वहीं ललन सिंह ने ख़ुद को पद से हटाए जाने पर नीतीश से मनमुटाव होने को ख़ारिज किया है और उनका कहना था कि यह ‘उनके 37 साल के राजनीतिक करियर को ख़राब करने की कोशिश है.’

नीतीश कुमार के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा था, “नीतीश कुमार ने वापस कमान संभाली है ताकि वो इंडिया गठबंधन के लिए मज़बूती से काम कर सकें. किसी को भी अफ़वाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और मिशन 2024 पर ध्यान लगाना चाहिए.”

सोनिया गांधी को राम मंदिर उद्घाटन का निमंत्रण देने पर बोला वीएचपी

सोनिया गांधी

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विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का निमंत्रण देने के पीछे कोई राजनीति नहीं है.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़, राम मंदिर के उद्घाटन के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रमुखों को निमंत्रण दिया गया है.

वीएचपी अध्यक्ष ने कहा, “अगर कोई राजनीति होती तो क्या सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे जी को आमंत्रित किया जाता? मैं खड़गे जी को निमंत्रण देने के लिए ख़ुद गया था. वीएचपी और ट्रस्ट के अधिकारी अधीर जी को निमंत्रण देने गए थे और राम मंदिर पैनल के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र सोनिया गांधी को निमंत्रण देने गए थे.”

“हम चाहते हैं कि वे आएं. अगर हम विपक्षी नेताओं को निमंत्रण देते हैं तो पीएम मोदी को निमंत्रण देने में क्या समस्या है.”

वीएचपी नेता ने कहा, “हमने सोनिया गांधी को निमंत्रण दिया है क्योंकि वो कांग्रेस संसदीय बोर्ड की चेयरमैन हैं. क्या इसमें कोई राजनीति है? मैं फिर कह रहा हूं कि अगर वे आएंगी तो हम उनका स्वागत करेंगे. सभी बड़े राजनीतिक दलों के अध्यक्ष को बुलाया गया है. ये कार्यक्रम पूरे देश से जुड़ा हुआ है और सभी का स्वागत है.”

हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक ये साफ़ नहीं किया है कि सोनिया गांधी, खड़गे और अधीर रंजन चौधरी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे या नहीं.

एक सप्ताह में कोरोना के मामले में 22% का उछाल

कोरोना वायरस

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भारत में बीते सप्ताह में कोरोना संक्रमण के मामले में 22 फ़ीसदी का उछाल आया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार के मुताबिक़, बीते 24 घंटों में कुल संक्रमण का मामला बीते सात महीनों में पहली बार 800 के पार चला गया है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल मिलाकर संक्रमण के मामले बेहद कम हैं और ताज़ा मामले सामने में आ रही तेज़ी टेस्टिंग की वजह से हो सकती है.

वहीं, डाटा बताता है कि कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट जेएन.1 के आने से देश में संक्रमण बढ़ा है और इस समय केरल में ये सबसे अधिक है.

भारत में शनिवार को ख़त्म हुए सप्ताह (24-30 दिसंबर) में 4,652 ताज़ा मामले सामने आए थे जबकि उससे पहले वाले सप्ताह में 3,818 मामले सामने आए थे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोनो वायरस के ओमिक्रॉन स्ट्रेन के एक उप-वैरिएंट जेएन.1 के तेजी से हो रहे प्रसार को देखते हुए 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया है.

जेएन.1 भारत, चीन, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में पाया गया है.

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इससे जनता के लिए जोखिम फिलहाल कम है. उसका कहना है कि मौजूदा टीके इससे सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं. लेकिन संगठन ने यह चेतावनी भी दी है कि इस सर्दी में कोविड और अन्य संक्रमण बढ़ सकते हैं.

पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में फ्लू, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) और बचपन के निमोनिया जैसे सांस संबंधी वायरस भी बढ़ रहे हैं.

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