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वर्ल्ड कप में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ जीत को पाकिस्तानी क्यों बता रहे 'क़ुदरत का निज़ाम'
अक्सर जब पाकिस्तान की टीम आईसीसी के किसी टूर्नामेंट में मुश्किल स्थिति में फंसती है, तो ऐसा कहा जाता है कि कभी बारिश, कभी कोई बड़ा उलटफेर, तो कभी विरोधी टीमों की बेहद ख़राब फ़ील्डिंग उसकी मदद के लिए सामने आती है.
ऐसा ही कुछ शनिवार को बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में पाकिस्तान और न्यूज़ीलैंड के बीच खेले गए बेहद अहम मैच में हुआ, जिसे पाकिस्तानी प्रशंसक 'क़ुदरत का निज़ाम' कह रहे हैं.
बारिश के कारण सीमित मैच में पाकिस्तान ने न्यूज़ीलैंड को डकवर्थ-लुईस नियम के तहत 21 रनों से हरा दिया और सेमीफ़ाइनल में जाने की अपनी उम्मीदें बरक़रार रखीं.
वैसे तो इस मैच की दोनों पारियों में गेंदबाज़ों को मार पड़ी और बल्लेबाज़ हावी रहे, लेकिन फ़ख़र ज़मान की महज़ 81 गेंदों पर 126 रनों की पारी ने मैच का पासा पाकिस्तान के पक्ष में पलट दिया.
मैच बारिश के कारण दो बार बाधित हुआ. पहली रुकावट तब आई जब पाकिस्तान की टीम बारिश से प्रभावित होने वाले मैचों के लिए बनाए गए डीएलएस यानी डकवर्थ-लुईस सिस्टम के तहत आगे चल रही थी.
क्रीज़ पर जमे दोनों पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों ने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हुए पाकिस्तान के लिए जिताऊ बढ़त बनाए रखी.
फिर जब आख़िरी बार बारिश के कारण मैच रोका गया तो पाकिस्तान डीएलएस के तहत जीत के लिए ज़रूरी स्कोर से 21 रन आगे था. लगातार हो रही बारिश के कारण पाकिस्तान को विजेता घोषित कर दिया गया.
इस मैच की ख़ूबसूरती यह थी कि किसी ने नहीं सोचा था कि पाकिस्तान इस बड़े लक्ष्य का पीछा कर पाएगा. मगर फिर फ़ख़र ज़मान की आक्रामक बल्लेबाज़ी, बाबर आज़म की ज़िम्मेदारी भरी पारी और आख़िरकार, फ़ैन्स के शब्दों में 'क़ुदरत के निज़ाम' के चलते पाकिस्तान ने 21 रनों से मैच जीत लिया.
बादलों भरे आसमान के नीचे छक्कों की बरसात
इस विश्व कप में पाकिस्तान के लिए सिर्फ़ तीन मैचों में हिस्सा ले सके फ़ख़र जम़ान ने शनिवार को ऐसी शानदार पारी खेली कि किवी गेंदबाज़ों के साथ-साथ पाकिस्तानी फैन्स भी हैरान रह गए.
फ़ख़र इससे पहले एशिया कप में ख़राब फ़ॉर्म में थे और विश्व कप के अभ्यास मैचों के साथ-साथ नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के पहले मैच में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे.
इसी वजह से पाकिस्तान ने उनकी जगह अब्दुल्ला शफ़ीक़ को टीम में शामिल किया था. हालांकि विश्व कप के दौरान इमामुल हक़ के ख़राब प्रदर्शन और पाकिस्तानी टीम प्रबंधन के मुताबिक, घुटने की चोट के कारण उन्हें बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में भी नहीं खिलाया जा सका.
आख़िरकार फ़ख़र को तब टीम में जगह मिली थी जब पाकिस्तान को सेमीफ़ाइनल में पहुंचने की संभावनाओं को बनाए रखने के लिए न सिर्फ़ अपने सभी मैच जीतने थे बल्कि अपने नेट रन रेट भी सुधारना था.
उन्हें बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में शामिल किया गया और उन्होंने उस मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए सात छक्कों और तीन चौकों की मदद से 81 रन बनाए.
हालांकि, शनिवार को बाएं हाथ के इस पाकिस्तानी ओपनर ने जब मैदान पर क़दम रखा तो सामने पहाड़ जैसा लक्ष्य था. 402 का लक्ष्य बड़े से बड़े बल्लेबाज़ी क्रम को दबाव में लाने के लिए काफ़ी है.
मगर फ़ख़र जमान ने छक्के मारने की फ़ॉर्म को बरक़रार रखा. इस विश्व कप में वापसी के बाद से उन्होंने 18 छक्के लगाए हैं. पाकिस्तान को वह आक्रामक शुरुआत देने में सफल रहे, जिसकी उसे ज़रूरत थी.
मैच के दौरान कभी-कभी तो ऐसा लगा जैसे उनके हाथ में कुल्हाड़ी है और वे उसे क्रीज़ पर लहरा रहे हैं.
जब अब्दुल्ला शफ़ीक़ के जल्दी आउट होने के बाद बाबर आज़म क्रीज़ पर आए, तो दोनों ने ज़िम्मेदारी से खेलते हुए एक साझेदारी बनाई.
बेंगलुरु के आसमान पर मंडराते काले बादलों के बीच शनिवार को फ़ख़र ज़मान ने जो बहादुरी भरी और आक्रामक पारी खेली, वह विश्व कप के इतिहास में अमर हो गई है.
न्यूज़ीलैंड के ग्लेन फ़िलिप्स की ऑफ़ स्पिन से उन्हें चुप कराने की कोशिश की, लेकिन अपना पहला ओवर मेडन खेलने के बाद उन्होंने अपने अगले चार ओवरों में 42 रन बनाए, जिनमें तीन छक्के और तीन चौके शामिल थे.
इसी तरह, बारिश के कारण हुए पहले ब्रेक के बाद बाबर आज़म ने भी आक्रामक रुख़ अपनाया और ईश सोढ़ी के ख़िलाफ़ आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हुए अर्धशतक पूरा किया और इस तरह पाकिस्तान 21 रन की बढ़त हासिल करने में सफल रहा.
क़ुदरत का निज़ाम क्या है?
पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर शनिवार रात को 'क़ुदरत का निज़ाम' शब्द देखने को मिला. दरअसल ये बात पाकिस्तान के पूर्व कोच सक़लैन मुश्ताक़ ने पिछले साल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही थी, जब वो टी20 वर्ल्ड कप से पहले पाकिस्तान के प्रदर्शन का बचाव कर रहे थे.
उन्होंने कहा था कि 'सर्दी, गर्मी, बारिश, घटा - ये तो चलता है, ये कुदरत का निज़ाम है. खेल भी ऐसा ही है. हार-जीत, चलनी ही चलनी है. इसे मानना चाहिए और हम मानते भी हैं. जब क़ुदरत का निज़ाम ही ऐसा है तो हम क्या कर सकते हैं?'
इस बयान के बाद उनकी काफ़ी आलोचना हुई थी, लेकिन जब टी20 वर्ल्ड कप 2022 में पाकिस्तान की टीम काफ़ी मुश्किल स्थिति में थी और सेमीफ़ाइनल में पहुंचने के लिए नीदरलैंड्स को साउथ अफ्रीका को हराना ज़रूरी था, तो मैदान पर यही हुआ. एडिलेड में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जीत के साथ पाकिस्तान सेमीफ़ाइनल और फिर फ़ाइनल में पहुंचा था. तब से, यह शब्द पाकिस्तानी प्रशंसकों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गया है.
इससे पहले जब भी पाकिस्तान को आईसीसी टूर्नामेंटों में मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा है, पाकिस्तान को अपने प्रदर्शन के अलावा अन्य टीमों और कारणों से भी मदद मिली है.
1992 के विश्व कप में बारिश ने भी पाकिस्तान की मदद की थी. इसी तरह, 2009 के टी-20 विश्व कप में पाकिस्तान को सेमीफ़ाइनल में पहुंचने के लिए दूसरी टीमों के मैचों के नतीजों पर निर्भर होना पड़ा था.
ये सभी कारक और अगर-मगर का खेल पाकिस्तान के लगभग हर टूर्नामेंट में देखने को मिल जाते हैं.
इस विश्व कप में भी पाकिस्तान को सेमीफ़ाइनल में पहुंचने के लिए अभी भी श्रीलंका बनाम न्यूज़ीलैंड मैच पर नज़र रखनी होगी. इस मैच में न्यूज़ीलैंड की हार ज़रूरी है और फिर उसके बाद पाकिस्तान को इंग्लैंड को हराना होगा. साथ ही अफ़गानिस्तान की टीम को कम से कम एक मैच हारना होगा.
पत्रकार सलीम ख़ालिक़ ने लिखा कि 'क़िस्मत भी बहादुरों का साथ देती है, आज लगभग हारा हुआ मैच फ़ख़र ज़मान की पारी से पाकिस्तान जीत सका. आज अगर बारिश न भी हुई होती तो बाबर आज़म के साथ मिलकर वह लक्ष्य तक भी पहुंचा सकते थे.'
'पाकिस्तान टीम में फ़ख़र की ही कमी थी जो पूरी हो गई.'
एक यूज़र ओसामा ने लिखा कि 'इस वर्ल्ड कप में 25 से ज्यादा शतक लगे हैं लेकिन फ़ख़र ज़मान का ये शतक किसी भी शतक से बेहतर था.'
वहीं, उनके अलावा मोहम्मद वसीम जूनियर की भी तारीफ़ हो रही है, जिन्होंने पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ों में सबसे अच्छी गेंदबाज़ी की और 10 ओवर में 60 रन देकर तीन विकेट लिए.
एक अन्य यूज़र ने लिखा, 'इस टीम के लिए दुआएं करने और अपनी मानसिक सेहत को तबाह करने के लिए एक और हफ़्ता बढ़ गया है.'
विलियम्सन की वापसी और रचिन का एक और शतक
न्यूज़ीलैंड ने पाकिस्तान को जीत के लिए 402 रनों का लक्ष्य दिया था. न्यूज़ीलैंड ने 6 विकेट के नुक़सान पर 401 रन बनाए थे.
जवाब में पाकिस्तान ने 25.3 ओवर में एक विकेट के नुक़सान पर 200 रन बनाए. आउट होने वाले इकलौते खिलाड़ी अब्दुल्ला शफ़ीक़ थे जो चार रन बनाकर साउदी की गेंद पर विलियम्सन को कैच दे बैठे.
उनके आउट होने के बाद कप्तान बाबर आज़म ने फ़ख़र ज़मान का साथ दिया. वहीं फ़ख़र ज़मान ने अपने करियर का 11वां शतक भी पूरा कर कर लिया. यह उनका सबसे तेज़ शतक है. वह 81 गेंदों पर 126 रन बनाकर नॉट आउट रहे.
पाकिस्तान को न्यूज़ीलैंड का पहला विकेट 11वें ओवर में मिला. डायोन कॉनवे हसन अली की गेंद पर मोहम्मद रिज़वान के हाथों कैच आउट हुए. उन्होंने 39 गेंदों पर 35 रन बनाए. इस तरह हसन अली को अपना 100वां वनडे विकेट मिला.
न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ रचिन रवींद्र ने 34वें ओवर में 88 गेंदों पर शतक पूरा किया. इस वर्ल्ड कप में यह उनका तीसरा शतक है लेकिन 36वें ओवर में 108 रन के स्कोर पर वह मोहम्मद वसीम की गेंद पर सऊद शकील के हाथों कैच आउट हो गए.
केन विलियम्सन ने रचिन रवींद्र के साथ साझेदारी में 35वें ओवर में इफ़्तिख़ार अहमद की गेंद पर फ़ख़र ज़मान के हाथों कैच आउट होने से पहले 95 रन बनाए.
हारिस रऊफ़ ने 42 ओवर में डेरिल मिशेल की गेंद पर पाकिस्तान के लिए चौथा विकेट लिया. डेरिल मिशेल 19 गेंदों पर 29 रन बनाकर आउट हुए.
45वें ओवर में मोहम्मद वसीम ने मार्क चैपमैन को 39 रन पर आउट किया और फिर 49वें ओवर में मोहम्मद वसीम ने ग्लेन फ़िलिप्स को 41 रन पर आउट किया. टॉम लैथम और मिचेल सेंटनर नॉट आउट रहे.
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