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अमेरिका में एच-1बी वीज़ा पर ट्रंप के रुख़ से उनके समर्थक नाराज़ क्यों?
- Author, जेक हॉर्टन और बर्न्ड डेबसमैन जूनियर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिका में टेक्नोलॉजी समेत कई दूसरे सेक्टरों की कंपनियों की ओर से विदेशी कर्मचारियों को रोज़गार देने के लिए इस्तेमाल होने वाले एच-1बी वीजा पर फिर विवाद खड़ा हो गया है.
पिछले दिनों अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वो एच-1बी वीजा का समर्थन करते हैं.
इससे कठोर प्रवासी नीति को लागू करने की मांग करते आए, उनके कई समर्थक नाराज़ हो गए हैं.
उनका मानना है कि ग़ैर-अमेरिकी इस वीज़ा पर अमेरिका आकर उनकी नौकरियां खा रहे हैं.
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इस समय सबसे ज़्यादा एच-1बी वीज़ा भारतीयों के पास हैं.
कठोर प्रवासी नीति के समर्थकों का कहना है कि इस वीज़ा की वजह से अमेरिका के लोगों की नौकरियां ख़तरे में हैं.
लेकिन इस वीज़ा के समर्थकों का कहना है कि इसी वजह से अमेरिकी इंडस्ट्री को दुनिया भर की बेहतरीन प्रतिभाओं का लाभ मिलता है.
डोनाल्ड ट्रंप पहले एच-1बी वीजा का विरोध करते थे. लेकिन अब उन्होंने इसका समर्थन किया है.
दुनिया के सबसे अमीर शख़्स और ट्रंप प्रशासन में सहयोगी एलन मस्क भी इसके पक्ष में हैं.
उन्होंने कहा है कि इस वीजा की बदौलत दुनिया भर की टॉप 0.1 फ़ीसदी इंजीनियरिंग प्रतिभाएं अमेरिका आ पाती हैं.
आइए देखते हैं कि एच-1बी वीजा पर कहां-कहां से लोग अमेरिका आते हैं और वो किन उद्योगों में करते हैं.
हर साल कितने लोगों को मिलता है एच-1बी वीज़ा?
अमेरिकी एच-1बी वीजा की शुरुआत 1990 में हुई थी. ये कुशल कर्मचारियों को दिया जाता है.
शुरुआत में अक्सर ये तीन साल के लिए दिया जाता है लेकिन इसकी अवधि छह साल तक बढ़ाई जा सकती है.
साल 2004 से हर साल जारी होने वाले एच-1बी वीज़ा की संख्या 85 हजार पर सीमित कर दी गई है.
इनमें से 20 हजार उन विदेशी छात्रों के लिए है, जिनके पास अमेरिकी विश्वविद्यालयों की मास्टर या इससे ऊंची डिग्री है.
हालांकि ये कैप विश्वविद्यालयों, थिंक टैंक और ग़ैर-लाभकारी रिसर्च संगठनों पर लागू नहीं होता है.
अक्सर यहां काम करने वाले लोगों के लिए वीज़ा संख्या बढ़ा भी दी जाती है.
लोग एच-1बी वीज़ा के लिए तभी आवेदन कर सकते हैं, जब उनके पास अमेरिका स्थित स्पॉन्सर कंपनियों या दूसरे संस्थानों से नौकरी के ऑफर हों.
जो लोग पहले से अमेरिका में काम करते हैं, उनकी वीजा अवधि बढ़ाने का अधिकार अमेरिकी सरकार को होता है.
यूएस सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज यानी यूएससीआईएस के आंकड़ों के मुताबिक़ अक्टूबर 2022 से लेकर सितंबर 2023 तक 3,86,000 एच-1बी वीज़ा आवेदन मंज़ूर हुए थे.
इनमें नए एच-1बी वीज़ा की संख्या 119000 हज़ार थी. 2,67,000 वीज़ा की अवधि बढ़ाई गई थी.
हालांकि 2023 में 2022 की तुलना में कम वीज़ा जारी किए गए थे. 2022 में 474000 वीज़ा आवेदन मंज़ूर हुए थे.
पहले भी एच-1बी वीज़ा की संख्या कम करने की कोशिश हो चुकी है.
2017 में ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा के लिए जांच-पड़ताल कड़ी करने के लिए एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए थे. आदेश में इस स्कीम के तहत होने वाले फ़र्जीवाडे़ के ख़िलाफ़ क़दम उठाने को कहा गया था.
ट्रंप के पहले कार्यक्रम में एच-1बी वीजा का रिजेक्शन रेट उस समय तक सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका था. 2018 (अक्टूबर 2017 से लेकर सितंबर 2018) में यह 24 फ़ीसदी था.
इससे पहले के ओबामा प्रशासन में रिजेक्शन रेट पांच से आठ फ़ीसदी था. बाइडन प्रशासन में रिजेक्शन रेट दो से चार फ़ीसदी रहा है.
हालांकि बााइडन प्रशासन में भी उतने ही एच-1बी वीज़ा आवेदन मंज़ूर हुए थे, जितने ट्रंप के पहले कार्यकाल में जारी किए गए थे.
वीज़ा संख्या घटाने के ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद के तीन सालों (2018-2020) के दौरान 11 लाख आवेदन मंज़ूर किए गए. इनमें से 3,43,000 पहली बार इसके लिए आवेदन कर रहे थे.
बाइडन प्रशासन के पहले तीन सालों ( 2021-23) के दौरान 12 लाख आवेदन मंज़ूर हुए थे. इनमें से 3,75,000 नए आवेदन थे.
अक्सर जितने एच-1बी वीज़ा जारी होते हैं, आवेदकों की संख्या उससे कहीं ज़्यादा होती है.
अगर उपलब्ध वीज़ा की तुलना में आवेदकों की संख्या ज़्यादा होती है तो यूएससीआईए लॉटरी के ज़रिये फ़ैसला लेता है. आलोचकों का कहना है कि ये तरीक़ा ठीक नहीं है.
नंबर्स यूएसए में रिसर्च डायरेक्टर एरिक रूरक कहते हैं,'' अगर 'कुशल' कर्मचारियों को बुलाना मक़सद है तो फिर लॉटरी के ज़रिये वीज़ा न दें. ये बेहतरीन और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को तलाशने का तरीक़ा नहीं है.''
हमारे पास 2024 की पूरी रिपोर्ट नहीं है लेकिन शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि एच-1बी वीज़ा के आवेदकों की संख्या काफ़ी बड़ी है.
यूससीआईएस के आंकड़ों के मुताबिक़ 2024 ( अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024) में 758994 आवेदन आए थे. वहीं 2023 में इनकी संख्या 474421 थी.
एरिक रूरक का कहना है कि जनवरी 2025 में ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के साथ ही एच-1बी वीज़ा की बहस पर पेश किए जाना वाला प्रस्ताव बता देगा कि राष्ट्रपति के तौर पर उनकी नीतियां क्या होंगी.
वो कहते हैं, ''सवाल ये है कि क्या उनका दूसरा कार्यकाल अमेरिकी कामगारों को बढ़ावा मिलेगा या फिर वो रिपब्लिकन पार्टी के उस रुख़ का समर्थन करेंगे, जिसके मुताबिक़ प्रवासी नीति नौकरी देने वाली अमेरिकी कंपनियों को ध्यान में रख कर तैयार की गई है और इसकी क़ीमत अमेरिकी कर्मचारी चुका रहे हैं.''
'' ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ये एक विवादित मुद्दा हो सकता है. ''
एच-1बी वीज़ा पर आने वाले किन सेक्टरों में काम करते हैं?
एच-1बी वीज़ा के लिए आवेदन करने वाले ज़्यादातर लोग साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग सेक्टर या गणित के क्षेत्र में काम करने वाले होते हैं.
ज्यादातर लोग आईटी सेक्टर (कंप्यूटर क्षेत्र से जुड़े) में काम करने वाले होते हैं. 2023 में आवेदन करने वालों में 65 फ़ीसदी लोग इस सेक्टर में काम करने वाले लोग थे.
इसके बाद आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग और सर्वे सेक्टर में काम करने वाले लोग थे. जिन लोगों के आवेदन मंज़ूर हुए थे, उनमें से 10 फ़ीसदी इस सेक्टर में काम करते थे.
कंपनियों की बात करें तो 2024 में सबसे ज़्यादा अमेजन एच-1बी वीजा धारकों को नौकरियां दी थीं. इस स्कीम के ज़रिये उसने 13 हजार लोगों की भर्तियां की थीं.
इसके बाद गूगल, मेटा और एपल ने सबसे ज़्यादा एच-1बी वीजा धारकों को नौकरियां दी थीं. इस मामले में वो क्रमश: चौथे, छठे और आठवें स्थान पर थीं.
एलन मस्क की कंपनी टेस्ला ने 1,700 से ज्यादा एच-1बी वीजा धारकों को नौकरियां दी थीं. इस मामले में 22वें नंबर पर थी.
2024 में कैलिफोर्निया और टेक्सस दो ऐसे राज्य थे जहां एच-1बी वीजा पर काम करने वाले सबसे ज्यादा लोग थे.
एच-1बी वीज़ा पर नौकरी करने वाले कितना कमाते हैं?
2023 में अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाला का औसत सालाना वेतन 1,18,000 हजार डॉलर था.
अमेरिका में कंप्यूटर और गणित से जुड़े पेशों में काम करने वाला का औसत सालाना वेतन 1,13,000 डॉलर था.
अमेरिका में रहने वाले परिवारों की औसत सालाना कमाई 60 हजार डॉलर है.
एच-1बी वीजा के विरोधियों का कहना है कि एच-1बी वीजा धारकों की वजह से अमेरिकी कामगारों को कम वेतन मिलता है.
कुछ इमिग्रेशन वकील और एक्सपर्ट्स इस तर्क का विरोध करते हैं.
ज्यादातर एच-1बी वीजा धारकों में से ज्यादातर को उनके पेशे में दिए जा रहे प्रचलित (मौजूदा) वेतन से ज्यादा मिलता है.
इस वेतन की गणना श्रम विभाग के फॉर्मूले पर आधारित है. ये एच-1बी वीजा धारकों की तुलना में अन्य कर्मचारियों के वेतन का आकलन करता है.
अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन की डायरेक्टर शेव दलाल धेईन ने बीबीसी से कहा,'' जो मौजूदा (प्रचलित) वेतन है उससे पूरे श्रम बाजार के वेतन का पता नहीं चलता. लेकिन ये बताता है कि एच-1बी वीजा धारक बाकी कर्मचारियों को नकारात्मक तौर पर प्रभावित नहीं कर रहे हैं.''
वो उदाहरण देकर बताती हैं,'' मान लीजिए आप वॉशिंगटन डीसी में इंजीनियर हैं. अगर आपको वहां नौकरी दी जा रही है तो आपको वहां चल रहे वेतन के बराबर पैसा देना होगा. साथ ही आपको ये सर्टिफाई करना होगा कि आप कम से कम प्रचलित वेतन तो दे ही रहे हैं.
धेईनी यूएससीआईएस अधिकारी के तौर पर काम करते हुए कई साल तक एच-1बी वीजा पर काम कर चुकी हैं. ''
वो कहती हैं,'' इस तरह देखा जाए तो आप वास्तव में आम कर्मचारियों के वेतन में कटौती नहीं कर रहे होते हैं.''
धेईनी ने कहा कि इसके अलावा अमेरिकी कंपनियों को एच-1बी धारकों को स्पॉन्सर करने के एवज में वकीलों की फीस के अलावा एक अच्छी-खासी रकम एच-1बी पिटीशन फाइल करने पर भी खर्च करनी पड़ती है.
वो कहती हैं,'' जो कंपनियां एच-1बी वीजा धारकों को स्पॉन्सर करती हैं उन्हें अमेरिकी कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन के अलावा अतिरिक्त पांच से दस हजार डॉलर की अतिरिक्त लागत का भी ध्यान रखना पड़ता है.''
वो कहती हैं,'' असल बात तो ये है कि अगर किसी अमेरिकी कंपनी को समान योग्यता वाले अमेरिकी कर्मचारी मिलता है तो वो उसे ही नौकरी देना पसंद करेंगी क्योंकि इससे उन्हें वेतन पर कम खर्च करना होगा
सबसे ज्यादा एच-1बी वीजा पाने वाले लोग किस देश के
एच-1बी वीजा पाने वाले लोगों में सबसे ज्यादा लोग भारतीय हैं. हाल के आंकड़ों के मुताबिक़ 72 फीसदी वीजा भारतीय नागरिकों को दिए गए. इसके बाद 12 फ़ीसदी वीजा चीनी नागरिकों को दिए गए.
फिलीपींस, कनाडा और दक्षिण कोरिया के नागरिकों को एक-एक फीसदी वीजा मिले.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित