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रोहित शर्मा ने ख़ुद को पीछे कर यशस्वी को क्यों किया आगे
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, डोमिनिका से
भारतीय क्रिकेट में ऐसे मौक़े कितनी बार आते हैं, जब रोहित शर्मा जैसे दिग्गज और कप्तान को शतक लगाने के बाद भी सुर्खियों में पीछे रहना पड़ता है?
वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ विंडसर स्पोर्ट्स पार्क के तीसरे दिन के खेल में रोहित ने शतक तो ज़रूर लगाया लेकिन उन्हें अपने शतक से ज़्यादा ख़ुशी युवा और साथी ओपनर यशस्वी जायसवाल के शतक से हुई.
इसकी वजह ये भी है कि रोहित शतक लगाने के बाद तुरंत पविलियन लौट गये लेकिन 21 साल के जायसवाल अब शतक के बाद दोहरे शतक की तरफ बढ़ते दिखाई दे रहे हैं.
दिन का खेल ख़त्म होने के बाद जायसवाल जब प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिए आए तो वह थके हुए थे और सिर्फ़ कुछ मिनटों की ही बातचीत की.
कप्तान शर्मा इतने ज़्यादा अपने युवा खिलाड़ी की थकान से परेशान थे कि उन्होंने हमें इशारे में गुज़ारिश की कि जायसवाल को ज़्यादा देर तक सवालों में उलझाया ना रखा जाय.
जायसवाल का कमाल
बाद में जैसे ही जायसवाल ड्रेसिंग रूम की सीढियां चढ़ते हुए जा रहे थे तो बॉलकनी में उनके लिए कोई और नहीं बल्कि सिर्फ़ और सिर्फ़ कप्तान खड़े थे.
दरअसल, रोहित का ये रवैया एक कप्तान का ना होकर एक बड़े भाई जैसा था. जिस तरह से उनकी पीठ ठोकते हुए रोहित उन्हें पवेलियन लेकर गए उससे उनके चेहरे पर वो खुशी देखी जा सकती थी जो ये कह रही थी उनके दसवें शतक से ज्यादा बेहतर इस युवा का पहला शतक है.
लेकिन, पहले शतक में ही तो जायसवाल ने रिकॉर्ड की बौछार लगा दी है. ईरानी ट्रॉफी में शतक और दोहरा शतक बनाने वाले इकलौते बल्लेबाज़ जायसवाल ने आईपीएल 2023 में भी अनकैप्ड खिलाड़ी के तौर पर 625 रन बनाकर रिकॉर्ड बना दिया था और उसी फॉर्म और सिलसिले को बरकरार रखते हुए उन्हें पहले ही मैच में शतक जड़ दिया.
विनोद कांबली, प्रवीण आमरे और सचिन तेंदुलकर ऐसे तीन पूर्व खिलाड़ी रहें हैं, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में शुरुआत करने से पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 70 से ज़्यादा का औसत रखा था.
जायसवाल भी इन तीनों की ही तरह इत्तेफाक से मुंबई से आते हैं और उन्होंने शतक लगाकर ये संकेत तो ज़रूर दिया है कि लंबे समय के बाद भारत को एक ऐसे युवा बल्लेबाज़ की तलाश जो कि तीनों फॉर्मेट में सहज और आक्रामक हो, वो मिल गया है.
ये ठीक है कि मौजूदा कैरेबियाई आक्रमण ना तो 1970-80 के दशक वाला खूंखार आक्रमण है और ना ही डोमिनिका की पिच बहुत चुनौतीपूर्ण लेकिन इसके बावजूद किसी युवा खिलाड़ी के लिए पहले ही टेस्ट में शतक के बाद दोहरे शतक की तरफ़ बढ़ते जाने को हल्की उपलब्धि तो कतई नहीं माना जा सकता है.
जायसवाल ने हमें बताया कि इस शतक को वो ईश्वर के अलावा अपने परिवार वालों को समर्पित करना चाहेंगे. जब मैंने उनसे ये ख़ासतौर पर पूछा कि क्या अब उनका इरादा नाबाद शतक को डबल में बदलने का है तो वो सफ़ाई से इस बात को टाल गये और कहा कि उनका मुख्य इरादा अपनी टीम को हमेशा अच्छी शुरुआत देना है.
रोहित शर्मा की क्लास
जायसवाल को मैंने टेस्ट से ठीक पहले रोहित शर्मा के मोटिवेशनल क्लास वाली बात की याद दिलायी तो मुस्कराते हुए उन्होंने कहा कि कप्तान का दूसरे छोर पर होना और लगातार उन्हें सलाह मिलने से काफ़ी राहत मिली.
दरअसल, शिखर धवन के खेल में ढलान आने के बाद टीम इंडिया को तीनों फॉर्मेट के लिए एक ऐसा ओपनर नहीं मिल पाया है जा ना सिर्फ बायें हाथ से बल्लेबाज़ी करता हो बल्कि आक्रामक खेल भी दिखा सके.
इत्तेफाक देखिये कि धवन की ही तरह जायसवाल ने अंडर 19 वर्ल्ड कप में मैन ऑफ द सिरीज़ बने तो और धवन की ही तरह पहले टेस्ट में शतक जमाया. लेकिन, उनके पास एक मौका है जो उन्हें धवन से भी आगे ले जा सकता है. पहले ही टेस्ट में और वो भी विदेशी ज़मीं पर दोहरा शतक लगाने का. ऐसा आज तक किसी भारतीय बल्लेबाज़ ने नहीं किया है.
ख़ैर, मैच के तीसरे दिन जायसवाल के साथ बल्लेबाज़ी करने उतरेंगे विराट कोहली. अब आपको इस दौर पर उनकी भी एक ख़ास कहानी का ज़िक्र करता चलूं. बारबेडोस में नेट प्रैक्टिस सेशन ख़त्म होने के बाद कोहली अपना किट बैग लेकर वापस लौट रहे थे तभी उनकी नज़र जायसवाल पर पड़ती है जो थोड़े से हिचकते हुए कुछ सावल करना चाह रहे थे.
कोहली ने ये बात भांप ली और जायसवाल को प्यार से पूछा क्या जानना चाहते हो. उसके बाद, कोहली ने करीब आधे घंटे तक जायसवाल के साथ लगातार बैटिंग स्टांस से लेकर शेडो प्रैक्टिस से लेकर ना जाने कितनी बातों पर बेहद गंभीरता से चर्चा करते मैंने देखा.
इस पूरे वाक़ये के दौरान बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौर और हेड कोच राहुल द्रविड़ दूर से इस बातचीत को देख रहे थे.
शायद, उन्हें लगा कि कोहली को कोचिंग टेस्ट से पहले इस युवा खिलाड़ी के लिए ज़्यादा मददगार साबित हो. और शायद यही अब तक हुआ है.
दूसरे छोर पर रोहित के रहते हुए शतक लगाने वाले जायसवाल अगर तीसरे दिन कोहली के दूरे छोर पर रहते हुए दोहरा शतक बनाने में कामयाब होते हैं तो इस बात में किसी को शक नहीं रहेगा कि जायसवाल को पहले टेस्ट से पहले पूरी तरह से तैयार करने में दो मौजूदा दिग्गजों का कितना अहम योगदान रहा.
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