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28 की उम्र में फ़ेसलिफ्ट? क्यों बढ़ रहा युवाओं में प्लास्टिक सर्जरी का चलन
- Author, रुथ क्लेग
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
सोशल मीडिया खोलो तो हर जगह एक ही ट्रेंड दिखता है. मेरी फ़ीड में भी ढेरों पोस्ट हैं, ज़्यादातर 20 से 30 साल की उम्र के लोगों की. सब फ़ेसलिफ़्ट के अलग-अलग तरीकों पर बात कर रहे हैं.
कोई मिनी फ़ेसलिफ़्ट की बात करता है, कोई पोनीटेल या डीप प्लेन की.
कभी फ़ेसलिफ़्ट सिर्फ़ अमीर और उम्रदराज़ लोगों की चीज़ हुआ करती थी. अब हालात बदल गए हैं. अब तो कई युवा भी सर्जरी कराने लगे हैं.
कई लोग तो खुलकर सर्जरी से पहले, इसके बाद और इस दौरान जब चेहरा सूजा हुआ होता है, तब की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालते हैं.
अब ये कोई छुपी बात नहीं रही. क्रिस जेनर, कैट सैडलर और मार्क जैकब्स जैसे मशहूर लोगों ने सार्वजनिक तौर पर बताया है कि उन्होंने फ़ेसलिफ़्ट करवाया है.
और कई और हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने भी ये सर्जरी करवाई है.
आमतौर पर फ़ेसलिफ़्ट को आख़िरी उपाय माना जाता है. इसे कॉस्मेटिक सर्जरी की सबसे बड़ी और कठिन प्रक्रिया समझा जाता है.
युवा क्यों कराने लगे हैं प्लास्टिक सर्जरी?
तो क्या लोग इस बनावटी ऑनलाइन दुनिया में इतने असुरक्षित हो गए हैं कि अब वे सर्जरी के लिए लाखों रुपये खर्च करने लगे हैं?
या फिर बोटॉक्स और फिलर जैसे इतने ट्रीटमेंट करा चुके हैं कि अब गालों की त्वचा हटवाना, चेहरे की चर्बी और टिश्यू को फिर से लगवाना उन्हें आसान और टिकाऊ उपाय लगने लगा है?
28 साल की एमिली के लिए फ़ेसलिफ़्ट करवाने का मतलब था एक "स्नैच्ड लुक" पाना, यानी नुकीली जॉलाइन, गाल की ऊंची हड्डियां और फॉक्स आइज़.
वो कहती हैं कि तुर्की में कराई गई ये सर्जरी उनके लिए "ज़िंदगी बदल देने वाला" अनुभव थी और उन्हें इसका कोई अफ़सोस नहीं है.
एमिली बताती हैं, "कुल मिलाकर मैंने एक ही बार में छह सर्जरी करवाईं. इनमें मिड-फ़ेसलिफ़्ट, लिप लिफ्ट और राइनोप्लास्टी यानी नोज़ जॉब शामिल था."
प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कनाडा के टोरंटो की बिज़नेसवुमन एमिली कहती हैं, "ऑपरेशन से पहले सर्जन ने मेरा पसंदीदा गाना बजाया. फिर मैं सो गई, जागी तो उल्टियां की, और मेरे पास नया चेहरा और नई नाक थी."
रिकवरी का समय लंबा था. पहले कुछ हफ़्तों में दर्द और सूजन थोड़ी कम हुई, लेकिन गाल के कुछ हिस्सों में अहसास लौटने में छह महीने लग गए.
सर्जरी कराने वालों की उम्र पहले से कम होती जा रही है?
क्या वो दोबारा ऐसा करवाना चाहेंगी? इस सवाल पर एमिली थोड़ी रुकती हैं.
वो कहती हैं, "सर्जरी के बाद मैंने अपनी ज़िंदगी बदल दी है. अब मैं ज़्यादा सेहतमंद हूं, शराब बहुत कम पीती हूं, अपनी त्वचा का ख्याल रखती हूं और अच्छी नींद लेती हूं. मुझे लगता है कि अगर आज मुझे वो सब पता होता जो अब जानती हूं, तो शायद मैं ये सर्जरी नहीं करवाती."
एमिली बताती हैं, "मेरी मां को भी इसके बारे में तभी पता चला जब मैंने ऑपरेशन के दो दिन बाद उन्हें बताया."
फिर वो कुछ पल रुककर सोचती हैं और कहती हैं, "मैं बस ख़ुद का सबसे बेहतर वर्ज़न चाहती थी, और अब मुझे लगता है कि मैं बन गई हूं."
ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ़ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में ब्रिटेन में फ़ेसलिफ़्ट कराने वालों की संख्या 8 फ़ीसदी बढ़ी है.
उम्र के हिसाब से आंकड़े नहीं दिए गए हैं, लेकिन कई सर्जन बताते हैं कि अब सर्जरी कराने वालों की उम्र पहले से कम होती जा रही है.
दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी यही रुझान दिख रहा है. अमेरिकन सोसाइटी ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स के मुताबिक, अब जनरेशन एक्स यानी 45 से 60 साल के लोगों में भी फ़ेसलिफ़्ट का चलन बढ़ रहा है.
ब्रिटिश एसोसिएशन की अध्यक्ष नोरा न्यूजेंट कहती हैं कि इस बदलाव की कई वजहें हैं, जिनमें वज़न घटाने वाली दवाओं का बढ़ता चलन भी शामिल है.
वो कहती हैं, "इन दवाओं से वज़न बहुत जल्दी घटता है, जिससे शरीर पर ढीली त्वचा रह जाती है. फ़ेसलिफ़्ट से इसे ठीक किया जा सकता है. अब सर्जरी के तरीके बहुत विकसित हो चुके हैं."
हालांकि नोरा न्यूजेंट कहती हैं कि फ़ेसलिफ़्ट अब भी एक बड़ी सर्जरी है और इसे सिर्फ़ किसी विशेषज्ञ, रजिस्टर्ड प्लास्टिक सर्जन से, सही उपकरणों वाले रजिस्टर्ड सेंटर में ही करवाना चाहिए.
सर्जन चुनना बेहद ज़रूरी
ब्रिस्टल के अपने क्लिनिक में कंसल्टेंट प्लास्टिक सर्जन साइमन ली अब तक सैकड़ों फ़ेसलिफ़्ट कर चुके हैं. वो एक सर्जरी का वीडियो दिखाते हैं.
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज पूरी तरह होश में रहता है. उसे सिर्फ़ हल्की लोकल एनेस्थीसिया दी जाती है जो त्वचा और उसके नीचे के टिश्यू तक असर करती है.
ली बताते हैं कि वो चेहरे पर छोटे-छोटे चीरे लगाते हैं. फिर त्वचा, चर्बी और सुपरफ़िशियल फेशिया यानी एसएमएएस तक पहुंचते हैं. यही वो हिस्सा है जो चेहरे के भावों को नियंत्रित करता है. इसके बाद वो गहराई में जाकर टिश्यू और मांसपेशियों को दोबारा ठीक करते हैं ताकि चेहरे का आकार सुधर सके.
करीब चार घंटे तक चली सर्जरी के बाद जब प्रक्रिया पूरी होती है, तो मरीज राहत की मुस्कान के साथ उठता है.
साइमन ली कहते हैं कि अब फेस और नेक लिफ्ट आसान हो जाने की वजह से लोग इसे ज़्यादा पसंद करने लगे हैं. पहले ये सर्जरी अस्पताल में जनरल एनेस्थीसिया के साथ ही होती थी, लेकिन अब वो अपने क्लिनिक में बिना बेहोशी के ही फेस और नेक लिफ्ट कर लेते हैं.
वो कहते हैं, "ये इंडस्ट्री के लिए बहुत रोमांचक समय है. नए-नए बदलाव तेज़ी से हो रहे हैं."
वो बताते हैं कि क्लासिक फ़ेसलिफ़्ट, जिसका फ़ोकस निचले जबड़े और गर्दन पर होता है, अब भी लोकप्रिय है, लेकिन अब ऐसे ट्रीटमेंट भी हैं जो चेहरे के ऊपरी दो हिस्सों पर काम करते हैं. उनके मुताबिक, उम्र का असर सबसे पहले वहीं दिखने लगता है.
हालांकि सर्जन ये भी साफ़ करते हैं कि फ़ेसलिफ़्ट 40 साल से ऊपर के लोगों के लिए उपयुक्त है. 20 या 30 साल की उम्र में इतनी जटिल सर्जरी करवाना सामान्य नहीं माना जाएगा.
ऐसी सर्जरी में कई तरह के ख़तरे और कठिनाइयां होती हैं. इनमें हेमेटोमा यानी त्वचा के नीचे खून जमा होना शामिल है. अगर इसका इलाज न किया जाए तो आसपास के टिश्यू की मौत यानी नेक्रोसिस हो सकता है. इसके अलावा संक्रमण, नसों को नुकसान और बाल झड़ने जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं.
ब्रिटेन में फ़ेसलिफ़्ट की औसत लागत 15,000 से 45,000 पाउंड के बीच होती है. हालांकि कुछ क्लिनिक इसे सिर्फ़ 5,000 पाउंड में भी करते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्जरी करवाने से पहले पूरी जानकारी जुटाना और ऐसा सर्जन चुनना ज़रूरी है जो फ़ेसलिफ़्ट में विशेषज्ञ हो.
तुर्की में सर्जरी कराने का चलन क्यों बढ़ा?
34 साल की जूलिया जिलांडो ने भी फ़ेसलिफ़्ट करवाने का फ़ैसला किया. बचपन में जबड़े की बनावट ठीक न रहने की वजह से उनके चेहरे में हल्की असमानता आ गई थी.
उनकी कई दोस्तों ने कहा कि उनके चेहरे में कोई समस्या नज़र नहीं आती, लेकिन जूलिया को ख़ुद फ़र्क महसूस होता था. वो कहती हैं कि उन्होंने अपने मन की सुनी और तुर्की जाकर सर्जरी करवाई. इसकी लागत 8,000 डॉलर यानी करीब 6,000 पाउंड थी.
हालांकि तुर्की में कॉस्मेटिक सर्जरी से जुड़े जोख़िमों के बारे में चेतावनियां दी जाती रही हैं, लेकिन वहां सर्जरी करवाने का चलन लगातार बढ़ा है. इसकी एक बड़ी वजह वहां की सस्ती लागत है.
हेल्थकेयर पेशे से जुड़ी जूलिया जिलांडो कहती हैं, "शुरुआत में मुझे ये पूरा आइडिया पागलपन लगा था, लेकिन मैंने रिसर्च की और तय किया कि मुझे करना है. मैं डरी हुई थी, एक अनजान देश में अकेली थी, और वहां की भाषा भी नहीं जानती थी."
वो बताती हैं, "सर्जरी के बाद मैंने दो दिन अस्पताल में बिताए और फिर ख़ुद ही सब संभाला. चेहरा इतना सूज गया था कि मैं देख भी नहीं पा रही थी. कुछ दिन बहुत मुश्किल थे, ये पूरे भावनात्मक उतार-चढ़ाव वाला सफर था."
रिसर्चर्स को इस बात की चिंता है कि क्या इस तरह की कॉस्मेटिक सर्जरी वास्तव में वही आत्मविश्वास और आत्मसम्मान देती है, जिसका दावा इंडस्ट्री करती है.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्ट इंग्लैंड के सेंटर ऑफ़ अपीयरेंस रिसर्च की विशेषज्ञ डॉ. किर्स्टी गार्बेट कहती हैं, "मुझे लगता है कि आज अभूतपूर्व दबाव है. ख़ासकर चेहरे को लेकर. हम वीडियो कॉल्स और सोशल मीडिया पर ख़ुद को बार-बार देखते हैं और बहुत आसानी से दूसरों से तुलना करने लगते हैं."
वो कहती हैं कि जो हम स्क्रीन पर देखते हैं, वो हमेशा सच्ची तस्वीर नहीं होती.
"एआई और फिल्टर ने एक नकली ऑनलाइन दुनिया बना दी है. इसी के साथ कॉस्मेटिक सर्जरी को भी सामान्य मानने का ट्रेंड बढ़ रहा है."
डॉ. गार्बेट कहती हैं, "सेलिब्रिटीज़ का इस पर खुलकर बात करना कुछ हद तक अच्छा है, लेकिन ये इसे सामान्य बना देता है, मानो ये ज़िंदगी का एक हिस्सा हो गया हो, और यही सबसे चिंताजनक बात है."
कम उम्र में सर्जरी करवाने वाले लोग बढ़े
टीवी प्रेजेंटर और 'रियल हाउसवाइव्स ऑफ दुबई' की स्टार कैरोलीन स्टैनबरी ने दो साल पहले, 47 साल की उम्र में फ़ेसलिफ़्ट करवाई, जबकि बहुत लोगों ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी.
कैरोलीन कहती हैं, "ये मेरे जीवन का सबसे अच्छा फ़ैसला था. मैं क्यों 60 की उम्र तक इंतज़ार करूं, जब ज़रूरत पड़े तब कराऊं? मैं अभी अच्छा दिखना और महसूस करना चाहती हूं."
20 साल तक नियमित रूप से बोटॉक्स और फिलर करवाने के बाद उन्हें लगने लगा कि उनका चेहरा "अजीब" दिखने लगा है. उन्होंने अमेरिका में डीप प्लेन फ़ेसलिफ़्ट के लिए 45,000 डॉलर यानी लगभग 40 लाख रुपये ख़र्च किए.
वो कहती हैं, "मैं अब भी वैसी ही दिखती हूं, लेकिन इस सर्जरी ने मुझे अगले 20 सालों तक आत्मविश्वास से भरा चेहरा दे दिया है."
बेल्जियम के प्लास्टिक सर्जन एलेक्सिस वर्पाल, जिनके क्लाइंट्स दुनिया भर से आते हैं, कहते हैं कि उन्हें कम उम्र में सर्जरी करवाने वाले लोगों की बढ़ती संख्या की चिंता है.
वो बताते हैं कि वो अक्सर अपने युवा क्लाइंट्स से लंबे समय तक बातचीत करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि कुछ लुक्स बिना सर्जरी के भी हासिल किए जा सकते हैं.
वर्पाल कहते हैं, "अगर कोई अपने ट्वेंटीज़ में फ़ेसलिफ़्ट करवाता है, और मान लें कि इसका असर 10-15 साल तक रहता है, तो 60 की उम्र तक वही इंसान तीन फ़ेसलिफ़्ट करवा चुका होगा."
वो कहते हैं, "एक चेहरे के लिए ये बहुत बड़ा आघात है, और ये तो उस स्थिति में है जब सब कुछ सही चले और कोई कठिनाई न हो."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित