'यमुना के पानी में अमोनिया' पर घमासान, क्या होते हैं इसके नुक़सान

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यमुना के पानी में अमोनिया की ज़्यादा मात्रा को लेकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान के बाद अब उनके और चुनाव आयोग के बीच वार-प्रतिवार जारी हैं.
अमोनिया की मात्रा पानी में ज़्यादा होने से शरीर पर क्या असर पड़ता है इसकी बात हम आगे करेंगे लेकिन जान लेते हैं कि अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ?
अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि हरियाणा की तरफ़ से दिल्ली को जो पानी भेजा जा रहा है उसमें ज़रूरत से ज़्यादा अमोनिया है जिसकी वजह से पानी ज़हरीला हो जाता है.

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जवाब में क्या बोले केजरीवाल

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केजरीवाल ने इसके लिए सीधे तौर पर हरियाणा की बीजेपी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा था, "हरियाणा की बीजेपी सरकार यमुना में ज़हर मिला रही है."
जिस पर बीजेपी ने सख्त एतराज़ जताया था और चुनाव आयोग में केजरीवाल के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई
जिसके बाद चुनाव आयोग ने केजरीवाल को उनके आरोप के संबंध में सबूत सौंपने को कहा.
केजरीवाल ने 29 जनवरी को अपना जवाब चुनाव आयोग को सौंपा जिस पर आयोग ने असंतुष्टि जताते हुए उनसे कुछ और सवाल पूछे और उनका जवाब 31 जनवरी तक देने को कहा.
जिसके बाद अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार, 31 जनवरी को अपना जवाब आयोग को भेज दिया.

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उन्होंने चुनाव आयोग को एक पत्र लिख कर कहा, "हरियाणा से दिल्ली भेजे जा रहे अमोनिया के उच्च स्तर वाले अत्यधिक ज़हरीले पानी को पाए जाने के बाद, दिल्ली की मुख्यमंत्री ने दिसंबर के आखिरी हफ़्ते में हरियाणा के मुख्यमंत्री को फोन किया और उनसे अमोनिया को कम करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया."
पत्र में कहा गया, "हालांकि सीएम हरियाणा ने आश्वासन दिया था कि वह ज़रूरी कदम उठाएंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया."
पत्र में हरियाणा सरकार पर आरोप लगाते हुए आगे कहा गया, "यह बिल्कुल स्पष्ट है कि गलती हरियाणा के मुख्यमंत्री की है. भारत की राजधानी के लोगों को गंभीर कष्ट पहुंचाने के प्रयास के लिए उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए."
उन्होंने अपना पत्र जारी करते हुए एक्स पर लिखा,"दिल्लीवासियों को बहुत-बहुत बधाई. हम सबका संघर्ष रंग लाया. दिल्ली में जो ज़हरीला पानी भेजा जा रहा था, वो अब बंद हो गया. दिल्ली में आने वाले पानी में अमोनिया की मात्रा 7 ppm से घटकर 2 ppm हो गई है. अगर हम आवाज़ नहीं उठाते और संघर्ष नहीं करते, तो आज दिल्ली की आधी आबादी को पानी नहीं मिल रहा होता. हमने दिल्ली को बहुत बड़े पानी के संकट से बचा लिया. चुनाव आयोग ने मुझे नोटिस देकर सज़ा देने की धमकी दी है. चुनाव आयोग को मेरा जवाब."
चुनाव आयोग को भेजे जवाब में केजरीवाल ने कहा है कि 15 जनवरी को यह 3.2 पीपीएम था और फिर बाद के दिनों में यह 7 पीपीएम तक पहुंच गया था. यह दिल्ली में पानी कमी करने की जानबूझकर साजिश की जा रही थी.
आइए जानते हैं आखिर क्या है अमोनिया? इसका स्वास्थ्य पर क्या पड़ता है प्रभाव.
अमोनिया क्या होती है?

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अमोनिया एक ज़हरीली गैस है. यह नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से मिलकर बनती है.
इसका उत्पादन उद्योगों के माध्यम से किया जाता है. अमोनिया का इस्तेमाल उर्वरकों, ठंडा करने वाली प्रशीतन इकाइयों (रेफ़्रिजरेशन), प्लास्टिक, विस्फोटक, कपड़ा, कीटनाशक, रंग और अन्य रसायनों के निर्माण में भी किया जाता है.
न्यूयॉर्क के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक़ इस गैस की ज़्यादा मात्रा नुक़सानदायक हो सकती है.
अमोनिया का उत्सर्जन यूं तो सबसे अधिक कृषि से होता है.
हालांकि, अमोनिया काफ़ी उपयोगी भी होता है. ये डिस्टलरी और टेनरी (चमड़ा उद्योग) कारख़ाना भी इसके उत्सर्जन के प्रमुख केंद्र है.
इसके अलावा गंदा पानी साफ़ करने के संयंत्र, निर्माण सामग्री यानी सीमेंट और पेंट वगैरह के कारख़ानों से भी इसका उत्सर्जन होता है.
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसन की एक रिपोर्ट के मुताबिक घर और औद्योगिक सफाई में प्रयोग होना वाला अमोनिया 5 से 25 फीसदी तक तरल पदार्थ के रूप में होता है.
पानी में इसके बढ़ने का मुख्य कारण औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट हो सकते हैं.
पानी साफ़ करने के सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) अमोनिया को पानी से निकालने के लिए प्रभावी नहीं है.
अमोनिया का शरीर पर असर
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मुताबिक पीने के पानी में अमोनिया की मात्रा 0.5 पीपीएम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. एक पीपीएम से अधिक अमोनिया शरीर के लिए हानिकारक है.
न्यूयॉर्क स्टेट हैल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक़ अमोनिया के कारण त्वचा में जलन, खुजली, चकत्ते और फफोले पड़ सकते हैं. इसके कारण मितली, उल्टी और पेट दर्द जैसी पाचन संबंधी समस्या हो सकती है. शरीर के कई अंगों को इसके कारण गंभीर नुकसान हो सकता है.
हवा में अमोनिया की ज़्यादा मात्रा होने से नाक और गले में जलन हो सकती है. लंबे समय तक अमोनिया के संपर्क में रहने से सांस की गंभीर बीमारी होने का ख़तरा होता है.
इसकी तीव्र बदबू होती है. हवा में कम मात्रा में होने पर भी ये शरीर को थका देती है.
पानी में इसकी मात्रा ज़्यादा होने पर मुंह, गले और पेट को नुक़सान पहुंचता है. हलांकि ये फ़ौरन जानलेवा नहीं होती लेकिन लंबे समय तक अमोनिया युक्त पानी पीने से स्वास्थ्य को गंभीर नुक़सान पहुंचता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित












