'ज़मीन बेची और दो एजेंटों को 42 लाख रुपये दिए', अमेरिका से लौटाए गए भारतीयों की आपबीती

इस साल जनवरी से 26 सितंबर 2025 तक 2417 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया

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    • Author, अवतार सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
    • Author, कमल सैनी
    • पदनाम, बीबीसी के लिए

"मेरा सपना था कि मैं बच्चों के लिए कुछ अच्छा करूंगा. मैं 35 लाख रुपये लगा कर अमेरिका गया था और वहां एक शेफ़ के रूप में अच्छी नौकरी कर रहा था, लेकिन ट्रंप प्रशासन में मुझे पकड़ कर वापस भारत भेज दिया गया."

अमेरिका की चकाचौंध भरी ज़िंदगी से भारत लौटाए गए हरियाणा के 54 लोगों में से एक, अंबाला ज़िले के जगौली गांव के हरजिंदर सिंह रात के अंधेरे में अपने परिवार के साथ बैठे अमेरिकी सरकार को कोस रहे हैं.

भावुक होते हुए हरजिंदर सिंह कहते हैं कि उन्होंने खेती-बाड़ी करके ये पैसे कमाए थे. अब उनके बच्चे बड़े हो रहे हैं, लेकिन उनकी कमाई के 35 लाख तो जा चुके हैं.

लगभग चार साल पहले अमेरिका गए हरजिंदर सिंह कहते हैं, "मेरी उम्मीदें धराशायी हो गईं. यह अफ़सोस की बात है कि मैं कुछ नहीं कर सका."

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वह कहते हैं कि अमेरिका से वापस भेजे जाने के दौरान उन्हें हथकड़ियां पहनाई गई थीं.

इस पर वह कहते हैं, "उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था, मुझे भी बुरा लगा, मुझे 25 घंटे तक बेड़ियों में रखा गया."

'डंकी रूट से गए थे अमेरिका'

कैथल ज़िले के 14 युवक डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे थे

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डंकी रूट से अमेरिका गए 54 लोग 25 अक्तूबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे.

अमेरिका से वापस भेजे गए ये लोग हरियाणा के करनाल, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, जींद, सोनीपत और पंचकुला के हैं.

कैथल के पुलिस उपाधीक्षक ललित यादव के अनुसार, कैथल ज़िले के14 युवक जो अवैध रूप से अमेरिका पहुंचे थे, उन्हें वापस भेज दिया गया है. ये सभी डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे थे.

26 अक्तूबर को सुबह कैथल पुलिस की एक टीम दिल्ली हवाई अड्डे पहुंची थी और वो इन युवकों को लेकर कैथल पुलिस लाइन ले गई.

कैथल में उनसे पूछताछ की गई और उनके डॉक्यूमेंट्स की जांच हुई.

पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान तारागढ़ निवासी नरेश कुमार के आपराधिक पृष्ठभूमि का पता चला और उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

जानकारी के अनुसार, नरेश कुमार चेक बाउंस और आबकारी अधिनियम से जुड़े एक मामले में फ़रार चल रहे थे. बाकी 13 लोगों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और पूछताछ के बाद उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया.

एजेंट के ख़िलाफ़ कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई

अमेरिका से वापस भेजे गए ये लोग हरियाणा के करनाल, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, जींद, सोनीपत और पंचकुला के हैं

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पुलिस के अनुसार, इनमें से कई लोग सालों से अमेरिका में रह रहे थे और बाकी कुछ महीने पहले ही अमेरिका आए थे. इन लोगों की उम्र 25 से 40 साल के बीच बताई गई है.

कैथल के पुलिस उपाधीक्षक ललित यादव ने बताया कि अभी तक किसी भी युवक ने ग़लत तरीके़ से विदेश भेजने वाले एजेंटों के ख़िलाफ़ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

उन्होंने कहा कि अगर कोई शिकायत दर्ज कराएगा तो पुलिस उसके अनुसार कार्रवाई करेगी.

अमेरिका से वापस भेजे गए कई युवाओं ने कहा कि वे पहले अपने परिवार के लोगों से बात करेंगे और उसके बाद ही आगे कोई निर्णय लेंगे.

इस साल फ़रवरी में हरियाणा के कैथल ज़िले के 18 युवकों को अमेरिका से वापस भेजा गया था.

'ज़मीन बेची, जेल गया लेकिन वापस आना पड़ा'

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अमेरिका से वापस भेजे गए नरेश कुमार का कहना है कि उन्होंने अपनी ज़मीन बेचकर एजेंटों को 57 लाख 50 हज़ार रुपये दिए, लेकिन फिर भी वह अमेरिका में बस नहीं पाए.

नरेश कुमार ने कहा, "मैं 9 जनवरी, 2024 को भारत से ब्राज़ील गया था, मैंने ज़मीन बेची और दो एजेंटों को 42 लाख रुपये एडवांस में दिए. मेरे रिश्तेदार रास्ते में समय-समय पर मुझे पैसे देते रहे. मैंने 14 महीने जेल में बिताए, लेकिन मुझे वापस भारत भेज दिया गया."

वह कहते हैं, "मैं सभी से हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि वे डंकी रूट से अमेरिका जाने के बारे में कभी न सोचें."

करनाल ज़िले के रजत पाल को भी अमेरिका से वापस भेजा गया है.

उनका कहना है कि वो 45 लाख रुपये खर्च करके पनामा के रास्ते अमेरिका गए थे और इसके लिए उन्होंने अपनी दुकान और प्लॉट भी बेच दिया था.

वे 26 मई, 2024 को अमेरिका के लिए घर से निकले थे. वो पनामा में 12-13 लड़कों के एक समूह का हिस्सा थे.

रजत पाल कहते हैं, "मैंने 2 दिसंबर 2024 को अमेरिकी सीमा पार की थी. हम पनामा के रास्ते अमेरिका गए थे और यह बहुत ख़तरनाक रास्ता था. मुझे 20 अक्तूबर के आसपास पता चला कि मुझे वापस भेज दिया जाएगा. मेरे पिता हलवाई का काम करते हैं, अब मैं भी उनके साथ दुकान पर काम करने की सोच रहा हूं."

डंकी रूट क्या है?

पनामा के ख़तरनाक जंगल को पार करने के बाद कोस्टा रिका और वहां से निकारागुआ पहुंचा जाता है

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इमेज कैप्शन, पनामा के ख़तरनाक जंगल को पार करने के बाद कोस्टा रिका और वहां से निकारागुआ पहुंचा जाता है (सांकेतिक तस्वीर)

एजेंट अलग-अलग मार्गों से अवैध रूप से लोगों को अमेरिका ले जाते हैं. आसान वीज़ा व्यवस्था के कारण, उन्हें पहले लैटिन अमेरिकी देशों में ले जाया जाता है.

एजेंट कुछ लोगों को पहले इक्वाडोर ले जाते हैं, वहां से डंकी रूट के जरिए कोलंबिया और फिर पनामा.

पनामा के ख़तरनाक जंगल को पार करने के बाद कोस्टा रिका और वहां से निकारागुआ पहुंचा जाता है.

होंडुरास में प्रवेश निकारागुआ से होता है. यहाँ से ग्वाटेमाला और मेक्सिको की ओर लोग जाते हैं. मेक्सिको पहुंचने के बाद सीमा पारकर अमेरिका में दाखिल होते हैं.

कुछ एजेंट युवाओं को ब्राज़ील और वेनेज़ुएला के रास्ते भी मेक्सिको ले जाते हैं.

डॉनकर शब्द का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जो युवाओं को अवैध रूप से एक देश से दूसरे देश पहुंचाने में मदद करते हैं.

इस साल 2400 से अधिक भारतीयों को वापस भेजा गया

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस साल जनवरी से 26 सितंबर 2025 तक 2,417 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया है.

2020 से 2024 तक 5,541 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया.

20 जनवरी से 22 जुलाई, 2025 तक 1703 भारतीयों को अमेरिका से वापस भेजा गया. इनमें 1562 पुरुष और 141 महिलाएं शामिल थीं.

इनमें से 620 पंजाब से, 604 हरियाणा से, 245 गुजरात से और 38 उत्तर प्रदेश से थे.

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार आने के बाद अवैध भारतीयों को वापस भेजा जाने लगा.

2020 से 2024 तक 5,541 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया

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अवैध प्रवासियों को लेकर पहला विमान इस साल 5 फ़रवरी को और दूसरा 15 फ़रवरी को अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरा.

अमेरिकी सीमा गश्ती (यूएसबीपी) प्रमुख माइकल डब्ल्यू बैंक्स ने 5 फ़रवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीयों को भारत भेजे जाने का एक वीडियो शेयर किया.

इस वीडियो के साथ, बैंक्स ने अपने पोस्ट में अमेरिका से वापस भेजे गए अवैध प्रवासियों पर अमेरिका के रुख़ को भी स्पष्ट किया.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अमृतसर में मीडिया को संबोधित करते हुए अमेरिका से लाए जा रहे अवैध प्रवासियों के दूसरे विमान के अमृतसर में उतरने पर सवाल उठाए थे.

सीएम ने कहा था, "हमारे पवित्र शहर (अमृतसर) को डिटेंशन सेंटर या निर्वासन केंद्र न बनाएं. अमृतसर दरबार साहिब, दुर्गियाना मंदिर, जलियांवाला बाग और वस्त्रों के लिए जाना जाता है, आप हमें किन कामों के लिए प्रसिद्ध कर रहे हैं?"

उन्होंने कहा, "मैं केंद्र से इस बात पर आपत्ति जता रहा हूं कि आपके पास दूसरे हवाई अड्डे, एयरबेस हैं, वहां विमान उतारिए...आप अमृतसर को बदनाम क्यों कर रहे हैं?"

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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