अरामको में एक बार फिर हिस्सेदारी बेचेगा सऊदी अरब, क्या है वजह

    • Author, एम ख़लील
    • पदनाम, बीबीसी अरबी सेवा

सऊदी अरब के इस फ़ैसले का निवेशकों को लंबे समय से इंतज़ार था.

रविवार को दुनिया की टॉप फ़ाइव कंपनियों में से एक 'अरामको' में सऊदी अरब ने अपनी अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी ने एक अरब से अधिक शेयरों की बिक्री की पेशकश की है. इनकी क़ीमत लगभग 10 अरब डॉलर के बराबर है.

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़ इस पेशकश में 1.545 अरब शेयर बेचे जाएंगे जो कंपनी की 0.64 फ़ीसदी हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करते हैं.

अरामको के इस पब्लिक ऑफ़र के लिए प्रति शेयर की क़ीमत 26.70 रियाल से 29 रियाल के बीच तय की गई है. डॉलर और सऊदी मुद्रा रियाल के विनिमय दर को देखें तो एक अमेरिकी डॉलर में 3.75 सऊदी रियाल मिल जाते हैं.

पब्लिक ऑफ़र की अधिकतम मूल्य सीमा के हिसाब से देखें तो इस पेशकश से कंपनी के प्रमोटर को 12 अरब डॉलर की रक़म हासिल होने की उम्मीद है.

इस एलान के बाद अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने कहा, "ये पब्लिक ऑफ़र हमें सऊदी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच शेयर होल्डर बेस को बढ़ाने का मौक़ा देगा और इससे हमें लिक्विडिटी और ग्लोबल इंडेक्स में अपनी अहमियत बढ़ाने में भी मदद मिलेगी."

अरामको के प्रमोटर्स की ओर से किए गए पब्लिक ऑफ़र के एलान की टाइमिंग पर विश्लेषकों की नज़र गई है.

इसकी टाइमिंग क्या कहती है?

पिछले दिनों कुछ पश्चिमी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्टों में ये दावा किया गया था कि सऊदी अरब अपनी परियोजनाओं, ख़ासकर विज़न 2030 के फ़्रेमवर्क के दायरे में आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने की कोशिश कर रहा है.

सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री के पूर्व सलाहकार डॉक्टर मोहम्मद सोरौर अल-सब्बान का मानना ​​है कि अरामको का ये नया पब्लिक ऑफ़र तेल की क़ीमतों से जुड़ा हुआ नहीं है.

वे कहते हैं कि विज़न 2030 के मक़सद को हासिल करने के लिए चरणबद्ध तरीके़ से पैसे जुटाए जा रहे हैं. आने वाले समय में और पब्लिक ऑफ़र्स आएंगे जो पांच फ़ीसदी से अधिक नहीं होंगे.

डॉक्टर अल सब्बान ने बीबीसी न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा कि इस पब्लिक ऑफ़र का फ़ायदा मुख्य रूप से सऊदी अरब के लोगों को होगा. हालांकि सऊदी नागरिकों के अलावा विदेशी निवेशकों के लिए भी निवेश का विकल्प खोला गया है.

उन्होंने कहा कि कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में शेयरधारकों की मौजूदगी से विचारों में विविधता आएगी और अरामको के परफॉर्मेंस में सुधार होगा.

आर्थिक और ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ आयद अल सुवैदान का मानना ​​है कि दुनिया जिस तरह के आर्थिक हालात से गुज़र रही है, ऐसे फ़ैसले काफी सोच समझकर लिए जाते हैं. इसमें तेल की क़ीमतों और दुनिया में अलग-अलग जगहों पर चल रहे आर्थिक तनाव का ख्याल रखा जाता है.

उन्होंने बीबीसी अरबी सेवा से कहा कि इस फ़ैसले की टाइमिंग सावधानी से रखी गई है. ख़ासकर सऊदी अरब के वित्तीय बाज़ार में चल रहे मोमेंटम और उसकी आर्थिक क्षमताओं का ख्याल रखा गया है.

आवेदन की आख़िरी तारीख़

आयद अल सुवैदान ने बताया कि अरामको के पिछले चार पब्लिक ऑफ़र्स के सब्सक्रिप्शन के लिए 480 फ़ीसदी से अधिक आवेदन आए थे.

उन्होंने कहा कि इस पब्लिक ऑफ़र के भी बड़े और कामयाब होने की उम्मीद की जा रही है.

अरामको के एफ़पीओ (आईपीओ के बाद आने वाले पब्लिक ऑफ़र) के लिए दो जून से छह जून तक आवेदन किए जा सकेंगे.

सऊदी नागरिक, गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल के सदस्य देशों के नागरिक और सऊदी अरब में रह रहे कुछ विदेशी नागरिक इस पब्लिक ऑफ़र में हिस्सा ले सकते हैं.

पब्लिक ऑफ़र व्यक्तिगत रूप से निवेश करने वालों के अलावा सऊदी संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भी खुलने जा रहा है.

डॉक्टर मोहम्मद सोरौर अल-सब्बान कहते हैं कि पब्लिक ऑफ़र निश्चित रूप से विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने जा रहा है.

आर्थिक परिणाम क्या होंगे?

डॉक्टर मोहम्मद सोरौर अल-सब्बान ज़ोर देते हैं कि विज़न 2030 का फ़ोकस इकोनॉमिक डायवर्सिफ़िकेशन (अर्थव्यवस्था में विविधता) पर है.

वे कहते हैं, "लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि तेल की वैश्विक मांग ख़त्म हो जाएगी या कम हो जाएगी. बल्कि इसका मतलब केवल ये है कि राज्य आय के स्रोतों में विविधता लाना जारी रख रहा है."

डॉक्टर अल-सब्बान की राय में सऊदी अरब अर्थव्यवस्था के अलग-अलग सेक्टर्स में विकास करना चाहता है, चाहे फिर वह खनिज हो, पर्यटन हो, पेट्रोकेमिकल्स हो या फिर रिफ़ाइनरी से जुड़ा कोई सेक्टर हो.

उनका मानना है कि सऊदी अरब अरामको के इस पब्लिक ऑफ़र के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के मक़सद से निवेश बढ़ाने की इच्छा रखता है.

बाज़ार मूल्य के मामले में अरामको दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी है, सऊदी सरकार के पास कंपनी के लगभग 82 प्रतिशत शेयर हैं.

2019 में कंपनी ने लगभग 1.5 फ़ीसदी शेयरों को पब्लिक ऑफ़र के ज़रिए बेचा था जिसके बाद ये दूसरी बार है जब कंपनी पब्लिक ऑफ़र लेकर आई है. उस समय कंपनी ने पब्लिक ऑफ़र से रिकॉर्ड 29.4 बिलियन डॉलर की राशि जुटाई थी, जो अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफ़र था.

तेल उत्पादन में लगे मुल्कों के संगठन ओपेक+ की सहमति से अरामको ने उत्पादन में कटौती की है. मौजूदा वक्त में अरामको प्रतिदिन लगभग नौ मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है जो उसकी अधिकतम क्षमता का लगभग तीन-चौथाई है.

रविवार को रियाद में ओपेक+ मुल्कों की एक बैठक होनी है जिसमें तेल उत्पादन से जुड़ी मौजूदा नीतियों पर चर्चा होनी है. ये संभव है कि उम्मीदों के बीच मौजूदा कटौती को 2024 की दूसरी छमाही तक बढ़ा दिया जाए.

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