इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग प्रमुख की अयोध्या पर टिप्पणी से विवाद- प्रेस रिव्यू

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इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी आईयूएमएल के केरल प्रमुख सादिक़ अली शिहाब थंगल ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर 22 जनवरी को आयोजित कार्यक्रम के दो दिन बाद टिप्पणी की थी.
इस टिप्पणी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
द इंडियन एक्सप्रेस ने इसी ख़बर को अखबार में जगह दी है.
थंगल केरल के पनक्कड़ परिवार से हैं और इस परिवार की केरल में काफ़ी अहमियत है.
थंगल ने कहा था, ''राम मंदिर के ख़िलाफ़ विरोध करने की कोई ज़रूरत नहीं है. ये मंदिर देश के बहुसंख्यकों की ज़रूरत थी.''
थंगल ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर और प्रस्तावित मस्जिद को धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक भी बताया था.
उन्होंने कहा था, ''मुस्लिम समाज को इस मुद्दे में फँसे रहने के अलावा भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.''
ये बातें थंगल ने मलापुरम में एक सभा के दौरान 24 जनवरी को कही थीं. अब जब इस घटना का वीडियो वायरल हुआ है, तो इस पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है.

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थंगल ने और क्या कहा
आईयूएमएल कांग्रेस का सहयोगी है.
आईयूएमएल का कहना है कि थंगल का बयान भाईचारे और सहिष्णुता के हमारे रुख़ जैसा है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि आईयूएमएल प्रमुख संघ की भाषा बोल रहे हैं और एक ऐसा वक़्त आएगा जब पार्टी के समर्थक ही थंगल के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे.
थंगल ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का ज़िक्र करते हुए कहा था, ''देश में एक बड़ी चीज़ हुई. देश की बहुसंख्यक आबादी की चाहत राम मंदिर अब हक़ीक़त का रूप ले चुकी है. देश अब पीछे नहीं जा सकता. ये बहुसंख्यकों की ज़रूरत थी. अयोध्या में मंदिर बनने का हमें विरोध नहीं करना है. बहुलतावादी समाज में हर किसी को अपनी आस्था के अनुसार, आगे बढ़ने की आज़ादी है.''
थंगल ने कहा था, ''सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बन रहे राम मंदिर और बाबरी मस्जिद धर्मनिरपेक्षता की सबसे बड़ी मिसाल हैं. हमें उसे आत्मसात करना चाहिए. दोनों धर्मनिरपेक्षता के बेहतरीन उदाहरण हैं. ये सच है कि कारसेवकों ने मस्जिद गिराई थी और हमने उन दिनों में इसका विरोध भी किया. लेकिन देश के मुसलमान उन हालात को सहिष्णुता के साथ ले सकता था. ख़ासकर केरल में, जहाँ का मुसलमान बहुत सक्रिय और संवेदनशील है.''
थंगल ने कहा, ''जब मस्जिद गिराई गई, तब केरल के मुसलमान मॉडल की तरह पेश आ सकते थे. फिर राजनीतिक नेतृत्व दक्षिण में केरल की तरफ़ देखता. वो ये जानना चाहते कि क्या केरल में शांति है. हम कभी उकसावों में नहीं फँसते.''

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1992 में पनक्कड़ परिवार का रुख़ क्या था
1992 में अयोध्या में जब बाबरी मस्जिद गिराई गई, तब आईयूएमएल के प्रमुख पनक्कड़ सैयद मुहम्मदाली शिहाब थंगल थे. वो सादिक़ अली के बड़े भाई थे.
शिहाब थंगल ने तब मुसलमानों से अपील की थी, ''हिंदुओं के घर पर एक पत्थर नहीं गिरना चाहिए. अगर ज़रूरत हो तो मुसलमान हिंदुओं के मंदिरों की हिफाज़त करें.''
हालांकि बाबरी गिराए जाने पर पनक्कड़ परिवार और आईयूएमएल के मध्यमार्गी होने से पार्टी दो धड़ों मे बँट गई.
कई बार सांसद रहे इब्राहिम सुलैमान पार्टी से अलग हुए और इंडियन नेशनल लीग यानी आईएनएल बनाई. बाद में ये दल सीपीआई-एम की अगुवाई वाले एलडीएफ का हिस्सा बन गया.
अपने परिवार के 1992 के रुख़ का ज़िक्र करते हुए थंगल ने कहा, ''मुसलमानों के राजनीतिक केंद्र ने तब स्थिति को सही से संभाल लिया था. समय ने तत्कालीन नेतृत्व के रुख़ पर मुहर लगा दी है. अगर तब नेतृत्व ने अलग रुख अपनाया होता तो समुदाय को इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती. इतिहास तब कुछ अलग होता.''
थंबल ने कहा, ''कुछ लोगों को लगता है कि मुसलमानों को बाबरी के मामले से बँधे रहना चाहिए. पर भविष्य ज़रूरी है. हमें इतिहास नहीं भूलना चाहिए. इतिहास को समझते हुए हमें ये सोचना चाहिए कि ये कैसे समुदाय और अल्पसंख्यकों के लिए फ़ायदे की बात हो सकती है. आईयूएमएल की रणनीति ही यही है कि अतीत के अनुभवों की पृष्ठभूमि में भविष्य की सोची जाए.''

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थंगल के बयान का विरोध
थंगल के इस बयान की केरल के मुस्लिम समाज में आलोचना हो रही है.
आईएनएल के स्टेट सेक्रेटरी कासिम इरिक्कुर ने कहा, ''वो दिन दूर नहीं जब आईयूएमएल के कार्यकर्ता थंगल के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे. मंदिर से धर्मनिरपेक्षता मज़बूत होगी, ये कहकर थंगल आरएसएस और संघ परिवार की लाइन पर चल रहे हैं. जब संघ ने देश की दूसरी मस्जिदों पर अपना दावा किया, तब थंगल ने समाज को धोखा किया. समझदार केरल थंगल को उचित जवाब देगा.''
आईयूएमएल नेता और पार्टी के विधायक पीके कुनहालिकुट्टी ने कहा कि थंगल का बयान अच्छे इरादे से दिया गया है.
वो बोले, ''थंगल चाहते थे कि कोई बीजेपी के जाल में ना फँसे और इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक फ़ायदे के लिए ना किया जाए. ये बयान पार्टी के मस्जिद वाले रुख़ जैसा ही है. इसे तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं करना चाहिए.''
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और विपक्ष नेता वीडी सतीशन कहते हैं, ''जब नफ़रत बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं, तब थंगल ने शांति और भाईचारे की बात की. थंगल की कोशिश की थी कि ये मुद्दा दोनों पक्षों के कट्टरपंथियों के हाथ में ना जाए.''

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वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद कमिटी मूर्तियों पर क्या बोली
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के व्यास तहख़ाने में हाल ही में अदालत के फ़ैसले के बाद पूजा शुरू हुई.
टेलीग्राफ की ख़बर के मुताबिक़, मस्जिद प्रबंधन कमिटी के सेक्रेटरी मुफ़्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिम नोमानी ने कहा- स्थानीय प्रशासन की मदद से पूजा वाली रात को ही वहां मूर्तियां रखी गईं और पूजा शुरू की गई.
उन्होंने कहा, ''हम समझते हैं कि देश के मुसलमानों के ख़िलाफ़ क्या हो रहा है. हम ज्ञानवापी के लिए अंत तक लड़ेंगे. मैं समुदाय के लोगों से हमारी जीत की दुआ करने के लिए कहता हूं.''
टेलीग्राफ के मुताबिक़, हिंदू पक्ष का कहना है कि जब तहख़ाने में पूजा शुरू की गई तब वहां चार मूर्तियां थीं.
इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट छह फरवरी को सुनवाई कर सकता है. मस्जिद प्रबंधन कमिटी ने ज़िला अदालत के पूजा की इजाज़त देने वाले फ़ैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
अपनी रिटायरमेंट के आख़िरी दिन ज़िला जज एके विश्वेशा ने कहा था कि व्यास जी के तहख़ाने को खोलने की अनुमति देने का फ़ैसला सबूतों के आधार पर है.
कोर्ट ने ज़िला प्रशासन से एक हफ़्ते के भीतर तहख़ाने में पूजा का प्रबंध करने को कहा था. मगर प्रशासन ने फ़ैसले वाली रात की हो पूजा शुरू करवा दी.
1993 तक इस तहख़ाने में व्यास परिवार पूजा किया करता था. मगर 1993 में मुलायम सिंह यादव ने इस जगह की बैरिकेटिंग करवा दी थी.
इस तहख़ाने में दर्शन के लिए लोग नहीं जा सकते हैं. मगर प्रशासन से 18 फुट की दूरी से पूजा होते हुए देख सकने की व्यवस्था कर दी है.

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श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष क्या बोले?
22 जनवरी को जब श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, तब मंच से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने पीएम मोदी की काफ़ी तारीफ़ की थी.
गोविंद देव के बयान तब सोशल मीडिया पर काफी साझा किए गए.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़, अब गोविंद देव ने कहा है कि अगर काशी, मथुरा को शांतिपूर्वक तरीके से छोड़ दिया जाता है तो हम देश के बाक़ी सारे उन मंदिरों को भूल जाएंगे, जो विदेशी आक्रमणकारियों ने गिराए थे.
गोविंद देव मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और अयोध्या में ज्ञानवापी-विश्वनाथ मंदिर की बात कर रहे थे.
गोविंद देव ने दावा किया था विदेशी हमलों में क़रीब साढ़े तीन हज़ार मंदिर गिराए गए थे.
वो जिस कार्यक्रम में ये बोल रहे थे, वहां संघ प्रमुख मोहन भागवत और श्री श्री रविशंकर भी मौजूद थे.
गोविंद देव ने मुस्लिम समाज से समर्थन की मांग की और कहा कि इसका शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकलना चाहिए.
वो बोले- ये मुद्दा सिर्फ़ हमलों के निशां मिटाने का है और इसे दो समुदायों के बीच झगड़े की तरह नहीं देखना चाहिए.
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