अयोध्या की तरह काशी-मथुरा में भी हिंदू पक्ष में फ़ैसला हो सकता है?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा

इमेज स्रोत, Suresh Saini

    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

30 सितंबर, दिन बुधवार. भारतीय इतिहास में ये दिन और तारीख़ हमेशा के लिए दर्ज हो चुकी है.

क्योंकि इस दिन लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सभी को बरी कर दिया और अपने आदेश में माना है कि मस्जिद गिराने के लिए किसी तरह की साज़िश नहीं की गई थी.

अदालत के फ़ैसले पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

इस फ़ैसले के साथ देश में दशकों से चले आ रहे मंदिर-मस्जिद विवाद ख़त्म होता हुआ दिख रहा था.

लेकिन तीस सितंबर को ही उत्तर प्रदेश की एक अन्य अदालत में मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर मामला सामने आया.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

काशी-मथुरा बाकी?

राम जन्मभूमि मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इतना स्पष्ट हो गया है कि अब भारत में किसी अन्य धार्मिक स्थान के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है.

देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने ऐतिहासिक फ़ैसले में साल 1991 के प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट (उपासना स्थल क़ानून) का उल्लेख किया है.

लेकिन इसके बाद भी जब राम जन्म भूमि का फ़ैसला आया है, तब से एक बार फिर रह रहकर काशी मथुरा बाकी है, नारा उछाला जाने लगा है.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने 11 अगस्त को मथुरा में कहा है कि अयोध्या के बाद अब मथुरा का नंबर है.

वहीं, देवमुरारी बापू ने भी बयान दिया था कि 'मंदिर बनाने के लिए मस्जिद को हटाना पड़ेगा.'

देवमुरारी बापू के ख़िलाफ़ पुलिस ने उकसाने के इरादे से भड़काऊ भाषण देने का मुक़दमा दर्ज किया गया है.

मथुरा में मस्जिद

इमेज स्रोत, SURESH SAINI

लेकिन बीते दिनों काशी और मथुरा में भी मस्जिदों को हटाए जाने की माँग सिर्फ बयानों तक सीमित रहकर कोर्ट तक पहुंच चुकी है.

रंजना अग्निहोत्री, विष्णु शंकर जैन, हरिशंकर जैन समेत तीन अन्य लोगों ने मथुरा के एक कोर्ट में एक सिविल सूट दाख़िल किया.

याचिकाकर्ताओं ने इस केस में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग उठाई और ये भी कहा कि शाही ईदगाह मस्जिद जिस ज़मीन के ऊपर बनाई गई है, उसके नीचे ही कृष्ण जन्मभूमि है.

इस मामले में भी यही दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम आक्रांताओं, इस मामले में औरंगजेब ने, मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया था.

लेकिन अदालत ने इस मामले को ये कहते हुए रद्द कर दिया कि ये सुनवाई योग्य नहीं है.

इसके साथ ही अदालत ने साल 1991 में पास हुए प्लेसेज़ ऑफ़ वरशिप एक्ट का भी ज़िक्र किया.

आख़िर क्या है ये एक्ट?

मंदिर मस्जिद

साल 1991 में नरसिम्हा राव सरकार ने उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम पारित करवाया था.

ये क़ानून कहता है कि भारत में 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थान जिस स्वरूप में था, वह उसी स्वरूप में रहेगा. इस मामले में अयोध्या विवाद को छूट दी गई थी.

लेकिन ये क़ानून ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह समेत देश के तमाम धार्मिक स्थलों पर लागू होता है.

इस क़ानून का सेक्शन (3) कहता है कि कोई भी व्यक्ति किसी धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग (सेक्ट) के किसी उपासना स्थल का उसी धार्मिक संप्रदाय के भिन्न अनुभाग के या किसी भिन्न धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग के उपासना स्थल में परिवर्तन नहीं करेगा.

वीडियो कैप्शन, अयोध्या के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद की चर्चा क्यों?

इसी क़ानून के सेक्शन 4 में लिखा है- यह घोषित किया जाता है कि 15 अगस्त, 1947 को विद्यमान उपासना स्थल का धार्मिक स्वरूप वैसा ही बना रहेगा जैसा वह उस दिन मौजूद था.

इसी क़ानून के सेक्शन 4(2) में लिखा है–यदि इस अधिनियम के लागू होने पर, 15 अगस्त, 1947 को मौजूद किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप के परिवर्तन के बारे में कोई वाद, अपील या अन्य कार्रवाई किसी न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष लंबित है तो वह रद्द हो जाएगी. और ऐसे किसी मामले की बाबत कोई वाद, अपील, या अन्य कार्यवाही ऐसे प्रारंभ पर या उसके पश्चात किसी न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष नहीं होगी.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

काशी को लेकर भी विवाद जारी

वाराणसी के काशी विश्व नाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर भी विवाद जारी है.

लेकिन स्थानीय मुस्लिम समुदाय प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट और मौजूद सुरक्षा से संतुष्ट नज़र आता है.

ज्ञानवापी मस्जिद संरक्षक समिति के महासचिव एस एम यासीन ने इस बारे में बीबीसी से बात की.

वाराणसी में प्राचीन मस्जिद

वे कहते हैं, "ये बात सही है कि ये नारे लग रहे हैं. और नारे पहले भी लगते थे. लेकिन बनारस की बात कुछ और है. यहां हिंदु और मुसलमानों के बीच काफ़ी एकता है. और इसके ऊपर से प्लेसेज़ ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 है जो कि ये सुनिश्चित करता है कि जो भी धर्मस्थल 15 अगस्त 1947 को जिस स्थिति में था, वो उसी स्थिति में रहेगा. क़ानूनी मुकदमा तो ज्ञानवापी को लेकर भी चल रहा है. और कोशिशें चलती रहेंगी. इसमें कोई दो राय नहीं हैं. क्योंकि कुछ तत्वों की राजनीति ही इन मुद्दों पर चलती है."

बाबरी मस्जिद विवाद में अदालत ने सभी को बरी कर दिया है लेकिन फ़ैसला आने से पहले लोग खुल कर कह रहे थे कि जो किया वो राम लला के लिए किया.

अब सवाल ये है कि क्या कृष्ण जन्मभूमि के लिए भी सरकारें अराजक तत्वों को वो सब करने देंगी जो उन्होंने बाबरी मस्जिद के साथ किया.

या सरकार उसी तरह ज्ञानवापी मस्जिद और शाही ईदगाह की हिफ़ाज़त करेंगी जिससे एस एम यासीन ज्ञानवापी के भविष्य को लेकर आश्वस्त नज़र आते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)