वेनेज़ुएला की घटना से चीन को कितना बड़ा झटका लगा?

मादुरो, शी जिनपिंग के साथ

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इमेज कैप्शन, ये तस्वीर 2015 की है जब निकोलस मादुरो, बीजिंग पहुंचे थे और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की थी.

बीते शनिवार को राजधानी काराकास से एक गुप्त सैन्य कार्रवाई करके अमेरिका ने वेनेज़ुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ़्तार कर लिया.

ड्रग्स तस्करी को लेकर उन पर न्यूयॉर्क में मुक़दमा चलाया जा रहा है और सोमवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया.

वेनेज़ुएला में अमेरिकी ऑपरेशन को लेकर सबसे तीख़ी प्रतिक्रिया चीन ने दी थी.

चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए मादुरो को तुरंत रिहा किए जाने की मांग की.

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करार दिया.

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अमेरिकी कार्रवाई को लेकर रूस, ब्राज़ील, भारत समेत तमाम देशों ने चिंता ज़ाहिर की और बातचीत के ज़रिए समाधान की अपील की.

सोमवार को ही वेनेज़ुएला के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई.

यह बैठक कोलंबिया के अनुरोध पर बुलाई गई, जिसे चीन और रूस का समर्थन मिला.

बैठक में मादुरो को पकड़ने के ट्रंप के फ़ैसले पर बहस हुई. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि यह क़दम "ख़तरनाक मिसाल" बन सकता है.

चीन का कहना है कि वो इस तरह के हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ है और उसकी नीति भी यही है.

चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी के बिना की गई सैन्य कार्रवाई का मुखर आलोचक भी रहा है.

हालाँकि इस मामले में उसकी प्रतिक्रिया काफ़ी कड़ी रही और उसकी वजह वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र में चीन के भारी भरकम निवेश को माना जा रहा है.

रूस और चीन वेनेज़ुएला के क़रीबी सहयोगी रहे हैं और इन्हीं वजहों से वेनेज़ुएला प्रतिबंधों के असर को कम करने की कोशिश करता रहा है.

चीन की प्रतिक्रिया

चीन के विदेश मंत्री वांग यी

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इमेज कैप्शन, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि किसी भी देश को 'दुनिया का दारोगा' बनाने का अधिकार नहीं है.
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जब बीते शनिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर मादुरो को पकड़े जाने की जानकारी दी, तो उसके तुरंत बाद ही चीन की प्रतिक्रिया आ गई.

भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने कहा, "चीन एक संप्रभु देश के ख़िलाफ़ अमेरिका के खुलेआम बल प्रयोग और उसके राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है और इससे बहुत हैरान है."

"अमेरिका के ऐसे दबंगई वाले काम अंतरराष्ट्रीय क़ानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन करते हैं, और लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में चीन के विशेष दूत ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की.

चीन के दूत सुन लेई ने कहा, "परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सबसे गंभीर चिंता को नज़रअंदाज़ किया है."

"अमेरिका ने वेनेज़ुएला की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके वैध अधिकारों व हितों को मनमाने ढंग से रौंदा है और संप्रभु समानता के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन किया है. इसके साथ ही उसने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग से जुड़े नियमों का भी गंभीर उल्लंघन किया है."

"हम अमेरिका से अपील करते हैं कि वो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आवाज़ पर ध्यान दे, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के सिद्धांतों को पालन करे और दूसरे देशों की संप्रभुता और सुरक्षा में दख़ल देना बंद करे. और वेनेज़ुएला में सरकार पलटने की बजाय बातचीत से समाधान के रास्ते पर लौटे."

उन्होंने मादुरो और उनकी पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की.

रविवार को बीजिंग में पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर इसहाक़ डार के साथ मुलाक़ात के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि 'किसी भी देश के पास दुनिया का दारोगा बनने या दूसरों पर अपनी इच्छा लादने का कोई अधिकार नहीं है.'

वांग यी ने कहा, "हम कभी यह नहीं मानते कि कोई देश दुनिया की पुलिस बन सकता है और न ही यह स्वीकार करते हैं कि कोई देश ख़ुद को दुनिया का जज कहे. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा की पूरी तरह रक्षा होनी चाहिए."

सोमवार को चीन के राष्ट्रपति ने शी जिनपिंग ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का पालन करने की अपील की.

अमेरिका का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि बड़ी शक्तियों को दुनिया के सामने 'उदाहरण पेश करना' चाहिए.

लैटिन अमेरिका में चीन की मौजूदगी

पेरू का विशाल चांके बंदरगाह चीन की मदद से बना है

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इमेज कैप्शन, पेरू का विशाल चांके बंदरगाह चीन की मदद से बना है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इससे उत्तरी अमेरिका को बाइपास करने में चीन को मदद मिलेगी.

बीते दो दशकों में चीन ने लैटिन अमेरिका में अपनी मौजूदगी को तेज़ी से बढ़ाने की कोशिश की है और इस दौरान अमेरिका उस क्षेत्र में बहुत सक्रिय नहीं रहा.

साल भर पहले नवंबर 2024 में चीन के सहयोग से बने पेरू के समुद्रतट पर चांके बंदरगाह के उदघाटन के मौक़े पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद उपस्थित थे.

माना जाता है कि 3.5 अरब डॉलर की लागत से बने इस बंदरगाह से व्यापार के लिए उत्तरी अमेरिका को पूरी तरह बाइपास किया जा सकता है.

इसी तरह चीन अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड परियोजना के साथ अमेरिका के बैकयार्ड कहे जाने वाले इस कैरिबियन क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ा रहा है.

पिछले दो दशकों में बीजिंग ने कई लैटिन अमेरिकी देशों को ताइवान से कूटनीतिक मान्यता हटाकर चीन के पक्ष में करने में सफलता पाई है.

कोस्टा रिका, पनामा, डोमिनिकन गणराज्य, अल साल्वाडोर, निकारागुआ और होंडुरास ने इस दौरान चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी को चुना.

वेनेज़ुएला में तेल का विशाल भंडार है, जो दुनिया के किसी भी देश के मुक़ाबले सबसे बड़ा है.

रॉयटर्स ने लंदन स्थित एनर्जी इंस्टीट्यूट के हवाले से बताया है कि, वैश्विक तेल भंडार का क़रीब 17 प्रतिशत यानी लगभग 303 अरब बैरल वेनेजुएला के पास है. इस मामले में वह पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के अग्रणी देश सऊदी अरब से भी आगे है.

लेकिन प्रतिबंधों के कारण वो अपने तेल को वैश्विक बाज़ार में खुलकर नहीं बेच पाता.

ऐसे हालात में मदद के लिए चीन आगे आया.

चीन न केवल वेनेज़ुएला के तेल का ख़रीदार है, जबकि देश में तेल क्षेत्र में निवेश करने वाले चंद देशों में से एक है.

काउंसिल ऑफ़ फॉरेन रिलेशन के अनुसार, 2000 में लैटिन अमेरिका के कुल निर्यात में चीन का हिस्सा 2 प्रतिशत से भी कम था.

2021 तक चीन और लैटिन अमेरिका के बीच व्यापार 450 अरब डॉलर से अधिक हो गया.

चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, 2024 में यह बढ़कर रिकॉर्ड 518 अरब डॉलर तक पहुँच गया.

कुछ अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि 2035 तक यह आँकड़ा 700 अरब डॉलर से भी ऊपर जा सकता है.

वर्तमान में चीन दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि पूरे लैटिन अमेरिका के लिए वह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा साझेदार है.

वेनेज़ुएला से चीन का रिश्ता और निवेश

वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है (सांकेतिक फ़ोटो)

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इमेज कैप्शन, वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है

वेनेज़ुएला के साथ चीन का रिश्ता 1990 के दशक के अंतिम में मज़बूत हुआ, जब समाजवादी नेता ह्यूगो चावेज़ 1998 में सत्ता में आए.

चावेज़ ने अमेरिका से दूरी बनाते हुए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शासन मॉडल की तारीफ़ की थी.

साल 2013 में चावेज़ की मौत के बाद मादुरो वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति बने और यह रिश्ता और मज़बूत हुआ.

चीन ने वेनेज़ुएला की तेल रिफ़ाइनरियों और बुनियादी ढाँचे में भारी निवेश किया.

साल 2017 से अमेरिका और उसके सहयोगियों के प्रतिबंध कड़े होने के बाद वेनेजुएला के लिए यह बड़ी आर्थिक मदद साबित हुआ.

समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक़, चीनी सीमा शुल्क के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में चीन ने वेनेजुएला से क़रीब 1.6 अरब डॉलर का सामान ख़रीदा. इसमें क़रीब आधा हिस्सा तेल का था.

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के 2023 के एक अनुमान के अनुसार, 2016 के बाद चीनी निवेशकों ने वेनेज़ुएला तेल क्षेत्र में 2.1 अरब डॉलर का निवेश किया.

वे उन चुनिंदा विदेशी कंपनियों में शामिल हैं, जिन्हें अब भी देश में संचालन की इजाज़त है.

चीन की सरकारी कंपनी साइनोपेक ग्रुप की तेल क्षेत्र में सबसे अधिक हिस्सेदारी है.

चीन के लिए झटका

निकोलस मादुरो

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इमेज कैप्शन, सोमवार को कराकास में नेशनल असेंबली के बाहर हुई रैली में अपदस्थ वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की तस्वीर लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया.

मादुरो की गिरफ़्तारी से कुछ घंटे पहले चीन के लैटिन अमेरिका और कैरेबियन मामलों के विशेष प्रतिनिधि क्यू शियाओची कराकास में थे और मादुरो से उनकी मुलाक़ात हुई थी.

रॉयटर्स ने एक चीनी सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा, "यह चीन के लिए बड़ा झटका था. हम वेनेजुएला के भरोसेमंद दोस्त के रूप में दिखना चाहते थे."

वेनेज़ुएला के नेता के साथ साथ चीन की सदाबहार रणनीतिक दोस्ती रही है, ऐसे में उनका जाना चीन के लिए झटका माना जा रहा है.

विश्लेषकों का कहना है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और प्रमुख वैश्विक व्यापारिक साझेदार चीन, अमेरिका की कार्रवाई के ख़िलाफ़ आलोचना को संगठित करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

चीन-ग्लोबल साउथ प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक एरिक ओलांडर ने रायटर्स से कहा, "इस समय चीन के पास वेनेजुएला को देने के लिए ठोस मदद बहुत कम है, लेकिन बयानबाज़ी के स्तर पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य विकासशील देशों के साथ अमेरिका के ख़िलाफ़ राय बनाने में चीन की भूमिका अहम होगी."

ट्रंप ने कोलंबिया और मेक्सिको के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी है और यह भी कहा है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार "अपने आप गिरने को तैयार" दिख रही है.

ऐसे में जिन लैटिन अमेरिकी देशों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव पर दस्तख़त किए हैं, वे अब सोच सकते हैं कि संकट की घड़ी में यह समझौता उन्हें कितनी सुरक्षा प्रदान करेगा.

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