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बिहार: एनडीए के संकल्प पत्र पर तेजस्वी का तंज, नड्डा और योगी राहुल गांधी पर हमलावर
बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं. शुक्रवार को पटना में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन ने अपना चुनावी संकल्प पत्र जारी किया, जिसमें रोज़गार और विकास से जुड़े कई बड़े वादे किए गए हैं.
विपक्षी महागठबंधन ने इस घोषणापत्र की आलोचना की है, उधर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ़ से छठ पर्व को लेकर की गई टिप्पणी पर एक के बाद एक बयान आ रहे हैं.
चुनाव प्रचार के बीच बिहार के मोकामा में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या ने कानून-व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है और इस मुद्दे पर भी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है.
कुल मिलाकर, मतदान की तारीख़ नज़दीक आने के साथ ही सूबे में सियासी गतिविधियां चरम पर हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है.
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एनडीए ने पटना में अपना संयुक्त चुनावी संकल्प पत्र जारी किया.
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, चिराग पासवान समेत गठबंधन के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में यह घोषणापत्र पेश किया गया.
इसमें राज्य के मतदाताओं को लुभाने के लिए रोज़गार, उद्योग, कृषि और कल्याण से जुड़े कई बड़े वादे शामिल हैं.
एनडीए नेताओं ने इसे बिहार को विकसित बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी ख़ाका बताया.
एनडीए का संकल्प: कई वादे और विपक्ष की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के संकल्प पत्र की सराहना करते हुए कहा, "एनडीए का संकल्प-पत्र आत्मनिर्भर और विकसित बिहार के हमारे विजन को स्पष्ट रूप से सामने लाता है. इसमें यहां के किसान भाई-बहनों, युवा साथियों और माताओं-बहनों के साथ ही राज्य के मेरे सभी परिवारजनों के जीवन को और आसान बनाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता दिखाई देती है."
उन्होंने भरोसा जताया कि जनता एनडीए की इन कोशिशों को भरपूर समर्थन देगी.
एनडीए के संकल्प पत्र की विपक्षी दलों ने आलोचना की है.
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, "इतिहास में पहली बार किसी गठबंधन का घोषणा पत्र केवल 26 सेकंड में जारी किया गया. एनडीए को बिहार के लिए संकल्प पत्र नहीं 'सॉरी पत्र' लाना चाहिए! 14 करोड़ जनता के लिए सॉरी पत्र!''
तेजस्वी यादव ने कहा कि एनडीए 20 साल के शासन में बुनियादी ज़रूरतें तक पूरी नहीं कर पाया.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी एनडीए पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने युवाओं की तरफ़ से रील बनाने की बात कही थी.
उन्होंने कहा, ''शायद इसी बात से प्रेरणा लेते हुए, आज बिहार में एनडीए नेताओं ने अपने चुनावी घोषणा पत्र का प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी मात्र 26 सेकंड में निपटा दिया.''
जयराम रमेश ने कहा कि इसमें एनडीए का बहुत दोष नहीं है, उन्होंने कहा, ''उनके पास पिछले 20 वर्षों में उपलब्धियों के नाम पर गिनाने जैसा कुछ था ही नहीं.''
बयानबाज़ी तेज: छठ पूजा से लेकर 'जंगलराज' तक
बिहार में छठ पूजा की पवित्रता को लेकर भी सियासी घमासान छिड़ गया है. 29 अक्तूबर को बिहार में अपनी पहली चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली की यमुना नदी की प्रदूषण समस्या का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा.
छठ पर्व का हवाला देकर राहुल ने कहा था, "प्रधानमंत्री को यमुना से कुछ लेना-देना नहीं है. उनको छठ पूजा से कुछ लेना-देना नहीं, उन्हें सिर्फ़ आपका वोट चाहिए. अगर आप कहेंगे कि मोदी जी ऐसा ड्रामा करो तो वोट के लिए वो कर देंगे. आप कहेंगे स्टेज पर आकर नाच लो, तो वो नाच लेंगे.''
राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने कड़ा पलटवार किया है. अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में अपनी सभाओं में इसे छठ व्रतधारियों का अपमान क़रार दिया.
प्रधानमंत्री के अलावा बीजेपी के अन्य नेता भी राहुल के बयान को भुनाने में जुट गए हैं.
शुक्रवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी रैलियों में लगातार इस पर प्रतिक्रिया दी. योगी आदित्यनाथ ने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी प्रचार में आ गए, तो मानकर चलिए एनडीए की विजय सुनिश्चित है.
मोकामा हत्याकांड: कानून-व्यवस्था पर सवाल
चुनावी माहौल के बीच बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में हुई एक हत्या ने राजनीति को गर्मा दिया है. गुरुवार को मोकामा में दुलारचंद यादव नाम के व्यक्ति की हत्या कर दी गई. दुलारचंद इस चुनाव में जन सुराज अभियान के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे.
मृतक के परिजनों और जन सुराज समर्थकों ने इस हत्या के लिए मोकामा से जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह को जिम्मेदार ठहराया है.
जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर ने कहा कि यह घटना चुनाव के दौरान बिहार में पहले भी देखे गए "जंगलराज" की याद दिलाती है.
प्रशांत किशोर ने कहा, "जिन सज्जन की हत्या हुई है वो आधिकारिक तौर पर जन सुराज के सदस्य नहीं हैं. वो जन सुराज के आधिकारिक उम्मीदवार पीयूष जी का समर्थन कर रहे थे. ये दिखाता है कि बिहार में जिस जंगलराज की बात होती थी कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा होती थी, ये कहीं न कहीं उसी को दिखता है."
उन्होंने कहा, "मतभेद होना, आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा है. लेकिन किसी की हत्या हो जाना.. वो आदमी सही है या ग़लत है, उसने क्या किया है यह बहस का मुद्दा हो सकता है. लेकिन लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है. किसी की हत्या प्रशासन के लोगों की ज़िम्मेदारी है, और यह उनकी नाकामी है."
मोकामा हत्याकांड पर राघोपुर विधानसभा सीट से आरजेडी उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कहा, "लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. हम हैरान हैं कि 40 वाहनों का काफिला हथियारों के साथ लैस कैसे घूम सकता है? चुनाव आयोग क्या कर रहा है? प्रशासन क्या कर रहा है? अब तक क्या कार्रवाई की गई है?...चुनाव आयोग को इसका संज्ञान लेना चाहिए कि यह कैसे हुआ..."
वहीं एनडीए की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति का बचाव किया. मांझी ने कहा, "घटना की जांच का आदेश दिया गया है. आरोपियों को पकड़ा जाएगा...हम समझते हैं कि जानबूझकर राजद के लोग ऐसा कर रहे हैं...कानून-व्यवस्था की कोई विफलता नहीं है..."
बता दें कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होने वाला है.
पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा, जबकि 14 नवंबर को मतगणना के बाद नतीजों का एलान किया जाएगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित