चंडीगढ़: नेहरू के सपनों के शहर का इतिहास क्या है

    • Author, अवतार सिंह
    • पदनाम, बीबीसी पंजाबी

पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ को संविधान की धारा 240 के दायरे में शामिल करने संबंधित बिल संसद में लाने की चर्चाओं के साथ चंडीगढ़ पर दावे को लेकर दोनों राज्यों में सियासत गरमा गई है.

इससे पहले यह बात सामने आई थी कि केंद्र सरकार एक से 19 दिसंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र में, चंडीगढ़ को संविधान की धारा 239 की जगह धारा 240 में शामिल करने को लेकर एक विधेयक पेश कर सकती है."

लेकिन इस मामले पर विवाद होने के बाद गृह मंत्रालय ने रविवार को कहा कि शीतकालीन सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश करने का कोई इरादा नहीं है.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने इस मामले पर केंद्र सरकार की निंदा की है.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

गृह मंत्रालय की ओर से ये कहा गया, "संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ के लिए सिर्फ़ केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है. इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को परिवर्तित करने की कोई बात नहीं है. "

"चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा.इस विषय पर चिंता की आवश्यकता नही है. आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई बिल प्रस्तुत करने की केंद्र सरकार की कोई मंशा नहीं है."

लोकसभा और राज्यसभा के 21 नवंबर के बुलेटिन के अनुसार, सरकार 1 दिसंबर, 2025 से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 पेश करेगी.

मौजूदा समय में पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) के प्रशासक हैं. मगर इस विधेयक के पास होने के बाद चंडीगढ़ में प्रशासक के रूप में एलजी (लेफ़्टिनेंट गवर्नर) की नियुक्ति की जा सकती है.

पंजाब चंडीगढ़ पर अपना दावा क्यों करता है और भारत के इस 'ख़ूबसूरत शहर' को बसाने की ज़रूरत क्यों पड़ी? यह समझने के लिए आइए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में.

चंडीगढ़ अस्तित्व में कैसे आया?

नई दिल्ली से लगभग 240 किलोमीटर दूर शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित चंडीगढ़ की परिकल्पना 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पंजाब की राजधानी लाहौर के पाकिस्तान में चले जाने के बाद की गई थी.

चंडीगढ़ की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह शहर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सपनों का शहर है, जिसकी योजना प्रसिद्ध फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कोर्बुज़िए ने बनाई थी.

वेबसाइट के अनुसार, "इसे बीसवीं सदी में भारत में शहरी नियोजन और आधुनिक वास्तुकला के बेहतरीन प्रयोगों में से एक माना जाता है."

लगभग 8 हज़ार साल पहले यह क्षेत्र हड़प्पावासियों के निवास स्थान के रूप में भी जाना जाता था.

जवाहरलाल नेहरू के सपने के अनुसार इस शहर की आधारशिला साल1952 में रखी गई थी.

1 नवंबर, 1966 को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के पुनर्गठन के दौरान चंडीगढ़ को पंजाब और हरियाणा दोनों की राजधानी बनाया गया. इसे एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में रखा गया.

इनमें से 'चंडीगढ़- योजनाबद्ध विकास का एक प्रतीक' नाम के भाषण में वह शहर और इसकी दूरदर्शी योजना के बारे में बात करते हैं.

इस प्रकाशित भाषण में नेहरू कहते हैं, "मुझे बहुत ख़ुशी है कि पंजाब के लोगों ने किसी पुराने शहर को अपनी नई राजधानी बनाने की ग़लती नहीं की. वह एक बहुत बड़ी ग़लती और मूर्खता होती. यह सिर्फ़ इमारतों का सवाल नहीं है. अगर आपने किसी पुराने शहर को राजधानी चुना होता, तो पंजाब मानसिक रूप से जड़ और पिछड़ा राज्य बन जाता."

उन्होंने कहा, "इसलिए, चंडीगढ़ नामक एक नए शहर के निर्माण का निर्णय, नए जीवन और नई सोच का प्रतीक है और भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है."

चंडीगढ़ के योजनाकार कौन थे?

चंडीगढ़ शहर अपनी वास्तुकला और योजना के लिए जाना जाता है.

शहर की वेबसाइट के अनुसार, नए शहर का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए 1950 में पहली बार एक अमेरिकी फर्म को काम पर रखा गया था. अल्बर्ट मेयर और मैथ्यू नोविकी ने पंखे के आकार का मास्टर प्लान तैयार किया था.

नोविकी की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद, मायर ने काम जारी न रखने का फैसला किया. इसके बाद, 1951 में, ले कोर्बुज़िएर के नेतृत्व में एक टीम को इस काम की ज़िम्मेदारी सौंपी गई. ले कोर्बुज़िएर को मैक्सवेल फ्राई, जेन बी. ड्रू और पियरे जेनेरेट ने सहयोग किया.

इस टीम को अन्य लोगों के अलावा युवा भारतीय योजनाकारों एमएन शर्मा और एआर प्रभावलकर का भी साथ मिला.

ले कोर्बुज़िएर ने राजधानी परिसर का मास्टर प्लान और डिजाइन तैयार किया तथा शहर की मुख्य इमारतों का डिज़ाइन बनाया.

पंजाब के गांवों में बना चंडीगढ़

चंडीगढ़ का निर्माण पंजाब के लगभग 27 गांवों को उजाड़कर किया गया था, यही कारण है कि पंजाब के लोग और राजनीतिक दल इस पर अपना अधिकार मानते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार जसपाल सिद्धू कहते हैं कि पंजाब की राजधानी लाहौर के पाकिस्तान में चले जाने के बाद यह लंबे समय तक शिमला में ही रही और पंजाब विश्वविद्यालय भी होशियारपुर में चला गया.

उनके अनुसार, "चंडीगढ़ का निर्माण पंजाब की राजधानी, पंजाब विश्वविद्यालय और कई अन्य चीज़ों को एक साथ लाने के लिए किया गया था. इसके लिए पंजाब के 27 गांवों को खाली करवाया गया, जिसके कारण पंजाब चंडीगढ़ पर अपना दावा करता है."

विभाजन के बाद नवंबर 1966 में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम (1966) के माध्यम से वर्तमान पंजाब और हरियाणा अस्तित्व में आए. दोनों राज्यों की इस राजधानी में कर्मचारियों के लिए 60:40 का अनुपात बनाए रखा गया.

शिरोमणि अकाली दल ने 1982 में धर्मयुद्ध मोर्चा का ऐलान कर दिया था, जिसमें चंडीगढ़ को पंजाब को देने की मांग भी शामिल थी.

1985 में पंजाब में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और शिरोमणि अकाली दल के तत्कालीन अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के बीच एक समझौता हुआ था. इसे 'राजीव-लोंगोवाल समझौता' कहा गया.

इस समझौते में पानी के मुद्दे, हिंसा के निर्दोष पीड़ितों को मुआवज़ा देने समेत एक और अहम मुद्दे पर सहमति बनी थी. वह ये कि चंडीगढ़ पंजाब को सौंप दिया जाएगा और बदले में हरियाणा को पंजाब के हिंदी भाषी इलाके दिए जाएंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.