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इंडिगो की 100 से ज़्यादा उड़ानें रद्द और दर्जनों में घंटों की देरी से यात्री नाराज़, पायलटों की कमी बताई जा रही है वजह
बुधवार को इंडिगो एयरलाइंस की दर्जनों उड़ानें रद्द होने और देरी होने से हज़ारों यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, बुधवार को भारत की सबसे बड़ी एयरलाइंस में से एक इंडिगो की 150 उड़ानें रद्द हो गईं और दर्जनों उड़ानों को देरी का सामना करना पड़ा है.
एजेंसी ने सूत्रों और इंडिगो के एक पायलट के हवाले से बताया कि 'थकान से निपटने और पायलटों के लिए आराम का समय बढ़ाने के लिए एक जुलाई और एक नवंबर को लागू किए गए नए सरकारी नियमों के बाद एयरलाइन को पायलटों की कमी से जूझना पड़ रहा है, जिससे रोस्टर प्रबंधन जटिल हो गया है.'
स्थानीय मीडिया में ऐसी ख़बरें हैं कि कई उड़ानों में 12-12 घंटे तक की देरी हुई है.
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प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने अधिकारियों ने हवाले से कहा कि बुधवार को रात 12 बजे से शाम 8 बजे के बीच, कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो की 15 उड़ानें रद्द कर दी गईं जबकि 130 से ज़्यादा उड़ानें देर शाम तक देरी से चलीं.
उड़ानों के रद्द होने और देर होने की शिकायतें हैदराबाद एयरपोर्ट से भी मिली हैं.
हैदराबाद एयरपोर्ट की ओर से एक्स पर आपातस्थिति के बारे में जानकारी देते हुए लिखा गया, "हमें पता है कि परिचालन संबंधी कारणों से आरजीआईए की कुछ उड़ानों में देरी और समय में बदलाव हो रहे हैं."
"हवाई अड्डे पर हमारी टीमें एयरलाइनों के साथ मिलकर उनके संचालन में सहयोग कर रही हैं और यात्रियों को समय पर जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं."
यात्रियों ने बताई परेशानी
यात्रियों का कहना है कि उन्हें इन हालात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
बीबीसी हिंदी के संपादक नितिन श्रीवास्तव दो दिसंबर को कोलकाता जा रहे थे. हवाईअड्डे पर क्या हाल था उन्होंने बताया-
दो दिसंबर को दिल्ली-कोलकाता जाने वाली इंडिगो फ़्लाइट 6E223 को शाम साढ़े चार बजे उड़ान भरनी थी लेकिन यात्रियों को समय से हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद ही पता चला कि विलंब है.
सुरक्षा जांच होने के बाद भीतर का नज़ारा ये था कि बेचैन यात्री 'फ़्लाइट शेड्यूल स्क्रीन' के सामने भीड़ लगाए हुए थे. इंडिगो की लगभग हर फ्लाइट में विलंब था या कैंसल होने का निशान दिख रहा था.
इंडिगो की दूसरी फ़्लाइट के बोर्डिंग गेट्स पर इंतज़ार करने वालों की लंबी तादाद थी और कई गेट्स पर तो लोग अपना गुस्सा भी ज़ाहिर कर रहे थे, स्टाफ़ से जवाब मांग कर.
हमारी फ़्लाइट का बोर्डिंग गेट हर आधे घंटे पर बदला जा रहा था ये बताते हुए कि 'सिर्फ़ घंटे भर का ही विलंब है'. ऐसा रात नौ बजे तक चलता रहा और पांच घंटे के इंतज़ार और चार बोर्डिंग गेट बदले जाने के बाद विमान ने उड़ान भरी.
आज यानी चार दिसंबर को भी वापसी की फ़्लाइट के लिए कुछ वैसा ही हो रहा है. इंडिगो 6E 5077 की फ़्लाइट जिसे सुबह 9:50 पर उड़ान भरनी थी उसके यात्रियों को दो बार उड़ान में विलंब के अलर्ट आ चुके हैं.
इस बीच दूसरी एयरलाइन कंपनियों के टिकट के दाम आसमान छू रहे हैं मसलन आज यानी गुरुवार को ही एक दूरी बड़ी एयरलाइन का कोलकाता से दिल्ली जाने वाली फ़्लाइट का टिकट 38,000 रुपये तक का हो चुका है.
ज़ाहिर है, ये उन लोगों की पहुंच से बाहर है जो इसी तरह के टिकट को आमतौर पर 5500-7500 रुपये तक में ख़रीदते रहे हैं.
नागपुर से कोलकाता जा रही एक महिला ने द टेलीग्राफ़ को बताया कि वो सुबह 6 बजे एयरपोर्ट पर पहुंच गई थीं. उनकी उड़ान का समय सुबह 7.30 बजे था, लेकिन उन्हें बताया गया कि उड़ान रद्द हो गई है.
महिला के ट्रैवल एजेंट ने अख़बार को बताया, "एयरलाइन ने गुरुवार की बेंगलुरु होते हुए उड़ान को फिर से बुक किया, लेकिन वो भी बाद में रद्द हो गई."
महिला को एयर इंडिया एक्सप्रेस के टिकट 22,000 रुपये में ख़रीदनी पड़ी जो इंडिगो के 5,000 रुपये के किराए से चार गुना था.
वाराणसी कोलकाता जा रहे के एक व्यवसायी ने बताया कि उन्हें 11.55 बजे सुबह इंडिगो की उड़ान पकड़नी थी और सुबह 10 बजे एयरपोर्ट पहुंच गए थे लेकिन उड़ान रद्द हो गई.
उन्होंने बताया कि उन्हें 25000 रुपये किराया देकर कार से कोलकाता जाना पड़ा.
पहले से थी परेशानी, डीजीसीए ने क्या बताया
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को इंडिगो वैकल्पिक यात्रा सुविधाएं या रीफ़ंड की पेशकश कर रही है.
डीजीसीए के अनुसार, उड़ानों के रद्द होने और विलंब की समस्या को कम करने के लिए डीजीसीए हालात पर नज़र बनाए हुए है और समीक्षा कर रहा है.
डीजीसीए ने एयरलाइन से मौजूदा हालात के पैदा होने के कारण बताने को कहा है और हालात सुधारने के लिए वैकल्पिक योजनाएं भी पेश करने को कहा है.
डीजीसीए के ने पिछले दो महीनों में एयरलाइन के प्रदर्शन को लेकर भी आंकड़े दिए हैं.
इसमें बताया गया है कि उड़ानों के समय से चलने को लेकर इंडिगो का प्रदर्शन नवंबर में 67.70 प्रतिशत और अक्तूबर में 84.1 प्रतिशत था.
जबकि नवंबर में इंडिगो की कुल 1,232 उड़ानें रद्द हुईं.
इंडिगो ने क्या बताया
बड़े पैमाने पर उड़ानों के रद्द होने, देरी होने और यात्रियों को परेशानी का सामना करने को लेकर इंडिगो ने बयान जारी किया है.
इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा, "हम मानते हैं कि पिछले दो दिनों से पूरे नेटवर्क में इंडिगो का संचालन काफी बाधित रहा है और हम अपने ग्राहकों को हुई असुविधा के लिए तहे दिल से क्षमा चाहते हैं."
"छोटी-मोटी तकनीकी गड़बड़ियां, सर्दियों के मौसम से जुड़े शेड्यूल में बदलाव, ख़राब मौसम, विमानन प्रणाली में बढ़ती भीड़भाड़ और नए क्रू रोस्टरिंग नियमों (उड़ान ड्यूटी समय सीमा) की समस्याओं सहित कई अप्रत्याशित परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है."
"हमारे संचालन पर इतना नकारात्मक प्रभाव पड़ा है कि इसकी उम्मीद करना भी संभव नहीं था. इस व्यवधान को रोकने और स्थिरता बहाल करने के लिए, हमने अपने शेड्यूल में कुछ बदलाव शुरू किए हैं. ये उपाय अगले 48 घंटों तक लागू रहेंगे.
"हमें अपने संचालन को सामान्य बनाने और पूरे नेटवर्क में अपनी समयबद्धता को धीरे-धीरे बहाल करने में मदद करेंगे. हमारी टीमें ग्राहकों की असुविधा को कम करने और संचालन को जल्द से जल्द स्थिर करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं.
कंपनी के यात्रियों की मदद करने, वैकल्पिक व्यवस्था करने या किराया वापस किए जाने की पेशकश की बात कही है.
क्यों नाराज़ हैं पायलट
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के अनुसार, सरकारी आंकड़ों से पता चला कि दो दिसंबर को इंडिगो की केवल 35% उड़ानें समय पर थीं और एक दिसंबर को केवल 49.5% उड़ानें समय पर थीं.
द हिन्दू ने लिखा है, ''एक नवंबर से पायलटों के ड्यूटी मानक पूर्ण रूप से लागू होने के कारण संकट की शुरुआत हुई. सरकार ने इसे एक साल के लिए टाल दिया था ताकि एयरलाइन अपने चालक दल की योजना बना सकें. एयरलाइन ने इसे लागू होने पर व्यापक उड़ान रद्द होने की चेतावनी दी थी. लेकिन पायलट संगठनों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख़ किया और अप्रैल 2025 में लागू करने का आदेश मिला.''
''पायलटों की बढ़ती थकान को लेकर चिंताओं से निपटने के लिए तैयार किए गए आराम और ड्यूटी घंटों के नए मानदंडों, जिनके ख़िलाफ़ एयरलाइन ने दो साल लंबी लड़ाई लड़ी. दिल्ली हाई कोर्ट के अप्रैल 2025 के आदेश के अनुसार, दो चरणों में इसे लागू किया जाना था. इसमें साप्ताहिक आराम के घंटे 36 से बढ़ाकर 48 घंटे करने सहित कई प्रावधान एक जुलाई से लागू कर दिए गए थे. वहीं रात के समय पायलटों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले बाक़ी प्रावधान एक नवंबर से लागू होने थे.
हिन्दू ने लिखा है, ''इन्हीं अंतिम प्रावधानों के लागू होने के बाद से एयरलाइंस पायलटों की कमी से जूझ रही हैं. पायलटों से अपनी छुट्टियाँ रद्द करने का अनुरोध कर रही हैं. लेकिन पिछले कई वर्षों से चल रहे असंतोष के कारण पायलट सहयोग करने के मूड में नहीं हैं. डीजीसीए मानकों के तहत 13 घंटे की ड्यूटी अवधि से ज़्यादा काम करना, 7,000 करोड़ के मुनाफे के बावजूद वेतन वृद्धि न होना और एयरलाइन द्वारा नए पायलट ड्यूटी मानदंडों की व्याख्या अपने हित में मोड़ने को लेकर हालिया विवाद ने पायलटों को नाराज़ कर दिया है.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.