सैम ऑल्टमैन: एआई सुपरस्टार को उनकी कंपनी ने क्यों किया बाहर?

    • Author, ज़ोई क्लाइनमैन
    • पदनाम, तकनीकी मामलों के संपादक

तकनीकी जगत सदमे में है. बीते शुक्रवार को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया के सबसे चमकदार सितारों में से एक और इसके सबसे बेहतर प्रवक्ता माने जाने वाले सैम ऑल्टमैन को उन्हीं की कंपनी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया.

सैम ऑल्टमैन को उसी कंपनी ओपनएआई ने बोर्ड से बाहर निकाल दिया जिसने पहली बार कई लोगों को एआई के कॉन्सेप्ट को लागू करने का तरीका सिखाया था और जिसके वो खुद सह-संस्थापक थे.

देखा जाए तो एआई सालों से हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बना हुआ है. ये तय करता है कि हमारी सोशल मीडिया फ़ीड में हमें क्या दिख रहा है और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म हमें कौन-सी फ़िल्म देखने का सुझाव दे रहा है. यहां तक कि हमें इंश्योरेंसस प्रीमियम कितना देना है इसका हिसाब करने में एआई हमारी मदद करता है.

लेकिन एआई चैटबॉट चैटजीपीटी के आने से पहले तक शायद ही किसी ने सीधे-सीधे एआई से बात की थी और अपने सवालों पर उसके जवाब सुने थे.

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस बेहद ताकतवर तकनीक है. सुनने में ये एक ख़तरनाक़ फ़िल्म की कहानी की तरह है, लेकिन तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाले कई जानकार गंभीरता के साथ कहते हैं कि ये तकनीक या तो दुनिया को बचा सकती है या फिर इसे पूरी तरह तबाह कर सकती है.

इस क्षेत्र में हो रहे काम पर बड़ा दांव लगा है और सैम ऑल्टमैन उन चंद लोगों में शुमार हैं जिनके हाथों में भविष्य को परिभाषित करने वाली इस तकनीक की कुंजी है.

सैम ऑल्टमैन का जाना

चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई, सुरक्षित और इंसान को फायदा पहुंचाने वाले आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस बनाने के उद्देश्य के साथ साल 2015 में अस्तित्व में आई थी.

एक नॉन प्रॉफ़िट ऑर्गेनाइज़ेशन के तौर पर शुरू हुई इस कंपनी के को-चेयर सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क थे.

कंपनी के अस्तित्व में आने के आठ साल बाद इसके बोर्ड से सैम ऑल्टमैन को बाहर करने की घटना अचानक तो हुई ही, ये चौंकाने वाली घटना थी और नाटकीय भी थी.

मैं कह सकता हूं कि जब से ये ख़बर आई है तब से मेरा फ़ोन एक घड़ी के लिए शांत ही नहीं हो सका. तकनीकी दुनिया के लोग और पत्रकार ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जो हुआ वो क्यों और कैसे हुआ.

कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने एक बयान में कहा है कि उनका मानना है कि सैम उनके साथ बातचीत में "संवाद में लगातार स्पष्ट" नहीं थे और इस कारण उन्होंने सैम के नेतृत्व पर "अपना भरोसा खो दिया" था.

अगर हम ये समझने की कोशिश करें कि इन शब्दों का आशय क्या है तो ये समझ आता है कि है कुछ था जो सैम ने या तो बताया था या फिर नहीं बताया था और किसी तरह से वो पकड़ लिए गए थे.

बयान में दिए गए ये शब्द इतने तीखे हैं कि ऐसा लगता है जैसे निजी तौर पर बोले गए हों.

इसे लेकर तकनीकी दुनिया में कई तरह की अफ़वाहें उड़ रही हैं, लेकिन इनमें कितना तथ्य है किसी को नहीं पता.

तकनीकी कंपनियों में काम करने का एक घातक वर्क कल्चर होना और इस कारण कंपनी के बॉस का पद से हाथ धोना कोई नई बात नहीं है. इस तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं लेकिन ओपनएआई के मामले में इसे लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई है.

इसी साल अक्तूबर में कंपनी का मूल्य क़रीब 80 अरब डॉलर तक आंका गया था, ऐसे में ये स्पष्ट है कि कंपनी के सामने पैसों को लेकर कोई परेशानी नहीं थी.

ओपनएआई के बोर्ड में कौन-कौन हैं-

ग्रेग ब्रॉकमैन (चेयरमैन और अध्यक्ष), सैम ऑल्टमैन (सीईओ) जो कंपनी के कर्मचारी भी थे.

इल्या सुतस्वेकर (चीफ़ साइंटिस्ट) जो कंपनी की कर्मचारी भी हैं.

एडम डी एंजेलो, ताशा मैककॉले और हेलेन टोनर जो कंपनी के कर्मचारी नहीं है.

ओपनएआई में निवेश करने वाले-

सैम ऑल्टमैन, ग्रेग ब्रॉकमैन, एलन मस्क, रीड हॉफ़मैन, जेसिका लिविंगस्टन, पीटर थील, अमेज़न वेब सर्विसेस, इंफ़ोसिस और वाईसी रीसर्च.

कंपनी की तकनीक के साथ समस्या थी?

कुछ दिन पहले सैम ऑल्टमैन ने लिखा था कि चैटजीपीटी की "मांग लगातार बढ़ रही है" और इसे पूरा करना मुश्किल हो रहा है.

उन्होंने लिखा कि कंपनी को अपने इस उत्पाद को लेकर टॉप लेवल सबस्क्रिप्शन पर उपभोक्ताओं के लिए साइन-अप को रोकना पड़ रहा है.

लेकिन क्या ये ऐसी मुश्किल है जिसके लिए सैम ऑल्टमैन को बर्खास्तगी का सामना करने पड़े?

सैम ऑल्टमैन को बोर्ड से निकाले जाने के कुछ देर बाद कंपनी के एक और सह-संस्थापक ग्रेग ब्रॉकमैन को भी निलंबित कर दिया गया.

ब्रॉकमैन ने कहा कि पूरा घटनाक्रम जिस तेज़ी से हुआ उससे वो और सैम दोनों आश्चर्यचकित हैं.

ग्रेग ब्रॉकमैन और सैम ऑल्टमैन को शामिल करने के बाद कंपनी के बोर्ड में कुल छह लोग हैं. अगर हम ये भी मान कर चलें कि फ़ैसला लेते वक्त बोर्ड ने अधिक कुछ नहीं सोचा तो भी ये कुल मिलाकर चार लोगों का फ़ैसला था. सवाल ये है कि ऐसा क्या हुआ कि इस छोटे से समूह ने इतना बड़ा फ़ैसला इतनी जल्दी ले लिया?

सैम ऑल्टमैन जो अब ओपनएआई के पूर्व सीईओ बन चुके हैं उन्होंने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसी ताकतवर तकनीक से जुड़े जोख़िमों और फायदों को लेकर दुनिया के कई बड़े नेताओं से चर्चा की है.

उनकी जो एक बाद याद रह जाती है वो ये है कि उन्होंने कहा था कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस "एक औज़ार है कोई जीव नहीं.

इस तकनीक से जुड़े अपने डर को लेकर उन्होंने ईमानदारी से कहा था कि हो सकता है कि "एक दिन ये तकनीक इंसान के हाथ से बाहर निकल जाए."

दो सप्ताह पहले वो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को लेकर हो रहे दुनिया के सबसे पहले सम्मेलन में शामिल होने के लिए ब्रिटेन में थे. सम्मेलन में शामिल हुई तकनीक की दुनिया की 100 जानीमानी हस्तियों में वो एक थे.

बीते सप्ताह अपनी कंपनी को लेकर दिए एक भाषण में उन्होंने अपनी कंपनी और तकनीक के भविष्य को लेकर चर्चा की थी.

मैं मान सकता हूं कि उन्हें वाकई उस वक्त अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि सप्ताह भर बाद स्थिति उलट जाएगी और कंपनी से बाहर हो जाएंगे.

'हीरो' के जाने पर खामोशी

बीते दिनों की बात करें तो सिलिकन वैली के जानेमाने नाम, सैम ऑल्टमैन का समर्थन करते दिखे हैं. इनमें गूगल के सीईओ एरिक श्मिड शामिल हैं जिन्होंने सैम को "मेरा हीरो" कहा था.

माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी के प्रमुख सत्या नडेला ने कहा कि उन्हें सैम की कंपनी पर "पूरा भरोसा" है.

देखा जाए तो उनके लिए ऐसा कहने की वाजिब वजह भी है. माइक्रोसॉफ़्ट ने ओपनएआई और चैटजीपीटी को ताकत देने वाली तकनीक में अरबों डॉलर का निवेश किया है. आज की तारीख में ये तकनीक माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस के ऐप को भी मजबूती दे रही है.

लेकिन अब तक इस मामले में तकनीकी दुनिया का जो एक व्यक्ति अभूतपूर्व रूप से खामोश है वो हैं एलन मस्क.

औरों के साथ मिलकर उन्होंने और सैम ऑल्टमैन ने ही ओपनएआई की शुरुआत की थी. लेकिन कहा जाता है कि कंपनी को आगे के वक्त में नॉन-प्रॉफ़िट न रखने के मुद्दे को लेकर दोनों के बीच मतभेद पैदा हो गए थे.

अफ़वाहों की मानें तो इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर कंपनी के भीतर लोगों की राय विभाजित हो गई है.

एलन मस्क की कंपनी एक्स (पहले ट्विटर) ने कुछ दिनों पहले ही ग्रॉक नाम का एक नया आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट लॉन्च किया है.

और उन्हें पता है कि कुछ वक्त तक ओपनएआई कंपनी के भीतर चल रहे ड्रामे में व्यस्त रहेगा. इससे शायद वो नाखुश नहीं होंगे.

इस बीच कंपनी ने अपनी चीफ़ तकनीकी अधिकारी मीरा मूर्ती को कंपनी का अंतरिम सीईओ बनाया है.

तकनीक की दुनिया बेहद छोटी है और ओपनएआई से पहले मीरा एलन मस्क की कंपनी टेस्ला में काम कर चुकी हैं.

लेकिन क्या वो अचानक भंवर में फंस गए ओपनएआई की नाव को इस मुश्किल से बाहर निकाल पाएंगी?

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