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विपक्षी पार्टियों की पटना में बैठक से पहले खींचतान, कांग्रेस ने ममता को बताया कमज़ोर कड़ी - प्रेस रिव्यू
अगले आम चुनाव की रणनीति बनाने के लिए 23 जून को पटना में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग के लिए जारी तैयारियों के बीच खींचतान के भी संकेत मिल रहे हैं.
जेडीयू के प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है कि इस मीटिंग में बसपा, बीजू जनता दल और वाइएसआर कांग्रेस को निमंत्रण नहीं दिया गया है.
इस बीच लखनऊ में पार्टी की बैठक कर बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा है कि उनकी पार्टी की राजनीतिक घटनाक्रम पर नज़र बनी हुई है.
अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिंदू’ की एक ख़बर के अनुसार, आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक चिट्ठी लिख कर कहा है कि मीटिंग में सबसे पहले 'दिल्ली अध्यादेश' पर बात हो.
अख़बार के अनुसार, बिहार सरकार में शामिल रही जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (हम) महागठबंधन से हाल ही में अलग हो गई और अब उसने एनडीए में शामिल होने का एलान किया है.
इससे पहले ‘हम’ के जेडीयू में शामिल होने की बात चल रही थी.
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ इंटरव्यू में कहा कि ममता 'गठबंधन राजनीति' की सबसे कमज़ोर कड़ी हैं. विपक्षी एकता को कमज़ोर करने में उन्होंने हमेशा ट्रोजन हॉर्स की भूमिका निभाई है.
इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि इस बैठक में देश भर से 20 विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं, जिसमें बीजेपी के ख़िलाफ़ एक साझा एक्शन प्लान पर बात होनी है.
मीटिंग में हिस्सा लेने वालों की सूची में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) मुखिया उद्धव ठाकरे, दिल्ली के सीएम और आप नेता अरविंद केजरीवाल और सपा अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत अन्य नेता हैं.
अख़बार के अनुसार, ममता बनर्जी और स्टालिन 22 जून को ही पटना पहुंच रहे हैं जबकि बाकी नेता 23 जून को पहुंचेंगे और बैठक के बाद उसी दिन वापस रवाना हो जाएंगे.
मणिपुर पर अमित शाह करेंगे ऑल पार्टी मीटिंग
इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर को लेकर 24 जून को एक ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है.
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. ये घोषणा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद की गई है.
विपक्ष मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'चुप्पी' पर लगातार सवाल उठाता रहा है. इस समय मोदी अमेरिका की स्टेट विज़िट पर हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक कांग्रेस संसदीय पार्टी चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने मणिपुर में शांति की अपील करते हुए कहा कि राज्य में अभूतपूर्व हिंसा ने राष्ट्र के मानस पर एक गहरा जख़्म कर दिया है.
ढाई मिनट के वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि पिछले 50 दिनों से मणिपुर में एक भयावह मानव त्रासदी घटित हो रही है, “मैं मणिपुर के लोगों ख़ासकर अपनी बहादुर बहनों से अपील करती हूं कि वो शांति स्थापित करने के लिए आगे आएं.”
इस बीच मणिपुर में छिटपुट हिंसा की घटनाएं जारी हैं. बुधवार को एक कार में हुए विस्फोट से तीन लोग घायल हुए हैं. प्रशासन इसे संदिग्ध आईईडी धमाका मान रहा है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार तीन मई से शुरू हुई हिंसा में अबतक 115 लोगों की मौत हो चुकी है और 40,000 लोग अस्थाई कैंपों में शरण लिए हुए हैं.
ऑनलाइन फ़ैक्ट चेकर्स के लिए नए क़ानून की तैयारी
इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के अनुसार, भारत के इंटरनेट क़ानून की जगह लाए जाने वाले डिज़िटल इंडिया बिल में ऑनलाइन फ़ैक्ट चेक करने वाले प्लेटफ़ार्म के पंजीकरण को मुख्य प्रावधान के रूप में लाने पर विचार हो रहा है.
केंद्र सरकार ने इसे व्यापक जवाबदेही के तहत उठाया गया कदम बताया है. बिल का ड्राफ्ट इस महीने के आखिर तक सामने आ सकता है.
केंद्र सरकार प्रस्तावित बिल में फ़ैक्ट चेकिंग वेबसाइटों समेत विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफ़ार्मों को श्रेणीबद्ध करने का भी प्रावधान है.
अख़बार लिखता है कि सरकार इसलिए श्रेणीबद्ध करना चाहती है ताकि अलग अलग किस्म के प्लेटफार्मों के लिए अलग अलग नियम बनाए जा सकें.
बाइडन ने शी जिनपिंग को तानाशाह कहा
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन के राष्ट्रपति शी को तानाशाह कहा है.
कैलिफ़ोर्निया में एक फंड इकट्ठा करने वाले अभियान में कहा कि शी जिनपिंग डिक्टेटर हैं, जिन्हें उनकी ही सरकार ने जासूसी गुब्बारे के बारे में अंधेरे में रखा.
अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग को पता चला है कि अमेरिका पर जासूसी गुब्बारे की घटना पर बीजिंग प्रशासन के अंदर की अस्पष्टता थी.
अभी हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन बिजिंग गए थे और उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच तनाव कम करने पर सहमति बनी थी.
चीन के विदेश मंत्रालय ने बाइडन की टिप्पणी को ‘बकवास और गैरज़िम्मेदाराना’ बताया है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि गुब्बारे की उड़ान दुर्घटना वश हुई थी और वॉशिंगटन ने उसे ज़रूरत से ज़्यादा हवा दी.
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