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हमास और हिज़बुल्लाह के हमलों से इसराइल को बचाने वाला आयरन डोम क्या है?
इसराइल का कहना है कि उसके आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने ग़ज़ा से किए जाने वाले हमास के रॉकेट हमलों से देश को बचाने में काफी मदद की है.
इसराइली फौज ने बताया कि अगर उनके पास ये डिफेंस सिस्टम न होता तो मौजूदा लड़ाई में उनके जानोमाल का काफी नुक़सान हुआ होता.
हालांकि इसके बावजूद हमास की ओर से दागे गए कुछ रॉकेट उन जगहों पर भी गिरे हैं जहां इसराइली सेना का जमावड़ा था.
इसराइली अधिकारियों के मुताबिक़ ये तकनीक 90 प्रतिशत मामलों में कारगर साबित होती है. ये रॉकेट को रिहायशी इलाकों में ज़मीन पर गिरने से पहले ही मार गिराती है.
अमेरिका की ओर से इसराइल को दिए गए 3.8 बिलियन डॉलर में से 500 मिलियन डॉलर इस मिसाइल डिफेंस के लिए थे. इसमें आयरन डोम को बनाने के लिए निवेश शामिल था. साल 2011 से अमेरिका इसराइल के आयरन डोम टेक्नोलॉजी में 1.6 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है.
आयरन डोम क्या है और ये कैसे काम करता है?
आयरन डोम की डिजाइन इस मक़सद से तैयार की गई है कि छोटी दूरी से किए गए हमलों से बचाव किया जा सके. ये किसी भी मौसम में काम करता है.
इसमें रडार लगा होता है जो उसके इलाके की तरफ़ बढ़ रहे रॉकेट या मिसाइल को रास्ते में ही ट्रैक कर सकता है. आयरन डोम में लगा रडार इसका अनुमान भी लगा सकता है कि कौन सी मिसाइल रिहाइशी इलाके पर हमला कर सकती है और कौन सी नहीं.
आयरन डोम से दागी गई इंटरसेप्टर मिसाइल केवल उन्हीं रॉकेट्स को निशाना बनाती है जिनके बारे में उसका अनुमान होता है कि वो किसी रिहाइशी आबादी वाले इलाके पर हमला करने जा रही है.
आयरन डोम डिफेंस सिस्टम के यूनिट्स पूरे इसराइल में तैनात हैं. हरेक यूनिट्स में तीन से चार लॉन्च व्हीकल होते हैं जो 20 इंटरसेप्टर मिसाइलें दाग सकती हैं.
आयरन डोम डिफेंस सिस्टम किसी एक जगह पर स्थाई रूप से स्थापित करके भी ऑपरेट किया जा सकता है और इसे आसानी से कहीं ले जाया भी सकता है.
आयरन डोम का पहली बार कब इस्तेमाल किया गया था?
साल 2006 में इसराइल और लेबनान में राजनीतिक और मिलिट्री ताक़त रखने वाले इस्लामी गुट के बीच संघर्ष हुआ था जिसके बाद आयरन डोम डिफेंस सिस्टम विकसित किया गया था.
उस लड़ाई में हिज़बुल्लाह ने इसराइल पर हज़ारों की संख्या में रॉकेट दागे. इससे कई इसराइली लोगों की मौत हुई थी और उसे बड़ा नुक़सान उठाना पड़ा था.
इसके जवाब में इसराइल ने कहा था कि वो एक नई मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करेगा.
आयरन डोम का विकास इसराइली कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और इसराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने अमेरिकी मदद से किया है.
इसे ख़ास तौर पर ग़ज़ा से दागी जानी वाली उन मिसाइलों से बचाव के लिए डिजाइन किया गया था जो बहुत आधुनिक किस्म की नहीं होती हैं.
साल 2011 में पहली बार आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम का लड़ाई में इस्तेमाल किया गया था.
इसने ग़ज़ा पट्टी में हमास के नियंत्रण वाले इलाके से दागी गई एक मिसाइल को रास्ते में ही नष्ट कर दिया था.
साल 2019 में अमेरिका ने घोषणा की कि वो ये डिफेंस सिस्टम खरीदेगा और इसका परीक्षण करेगा.
आयरन डोम कितना असरदार है?
इसराइली मिलिट्री का दावा है कि आयरन डोम की सफलता की दर 90 फ़ीसदी तक है.
हमास का कहना है कि हमले के दिन उसने इसराइल पर 5000 रॉकेट्स दागे थे. इस पर इसराइल ने कहा कि पहले दिन हमास ने संभवतः इससे आधी संख्या में रॉकेटों से हमला किया था.
हमास ने ये रॉकेट इतने कम समय में दागे ताकि आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर दबाव बनाया जा सके.
कुछ रॉकेट लेबनान से हिज़बुल्लाह ने भी दागे थे.
इसराइली फौज का कहना है कि सात अक्टूबर को शुरू हुई इस लड़ाई में इसराइल पर अब तक आठ हज़ार से अधिक संख्या में रॉकेट दागे जा चुके हैं.
इसराइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कुछ रॉकेट आयरन डोम से बचने में कामयाब रहे और रिहाइशी इलाकों में गिरे. इससे कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए.
27 अक्टूबर को ऐसे ही एक रॉकेट ने तेल अवीव में एक रिहाइशी इमारत को निशाना बनाया जिसमें चार लोग घायल हो गए.
हालांकि इसराइली फौज के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जोनाथन कॉनरिकस ने कहा, "अगर आयरन डोम सिस्टम नहीं होता तो मरने और घायल होने वाले इसराइली लोगों की संख्या कहीं अधिक होती. ये डिफेंस सिस्टम हमेशा की तरह जान बचाने वाला रहा है."
अमेरिका ने कहा है कि वो इसराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए उसे अपने नियंत्रण वाले दो आयरन डोम यूनिट्स देगा. ये यूनिट्स इसराइल में तैनात हैं लेकिन इनका संचालन अमेरिका करता है. इसराइल को मिलने वाली अमेरिकी मदद में थाड (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) और पैट्रियट मिसाइलें भी शामिल हैं.
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