लखनऊ में बारिश के दौरान महिला से बदसलूकी पर 16 लोग गिरफ़्तार, पुलिस अफ़सरों के तबादले

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- Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
लखनऊ के गोमती नगर इलाके में बुधवार को भारी बारिश के बीच एक बाइक सवार युवक और उसके पीछे बैठी महिला के साथ बदसलूकी के आरोप में पुलिस ने अब तक 16 लोगों को ग़िरफ़्तार कर लिया है.
इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर क़ानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे.
साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग़िरफ़्तार अभियुक्तों में से सिर्फ़ दो का नाम लेने पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि सीएम इस मामले पर भी राजनीति कर रहे हैं.
बढ़ते दबाव के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने डीसीपी,एडीसीपी और एसीपी का तबादला कर दिया है और एसएचओ समेत चौकी इंचार्ज और कई सिपाहियों को भी निलंबित कर दिया गया है.
योगी सरकार ने कहा कि अपराधियों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जा रही है.
पुलिस ने पवन यादव और सुनील कुमार नाम के शख़्स को सीसीटीवी के आधार पर तो वहीं अरबाज़ और विराज साहू नाम के शख़्स को टिप मिलने के बाद पकड़ा है. पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल बाक़ी लोगों की तलाश की जा रही है.
लेकिन इस मामले में दोनों पीड़ित अब तक सामने नहीं आए हैं.

क्या है मामला

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बुधवार को लखनऊ में कई घंटो बारिश की वजह से कई जगह जलभराव हो गया था.
ताज होटल के पास ब्रिज के क़रीब दर्जन भर लोग पानी में मौज-मस्ती कर रहे थे. वायरल हुए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि इसी दौरान बाइक सवार एक पुरुष और महिला वहां से गुज़र रहे थे. वहां मौजूद बाक़ी युवकों में से कुछ ने इन पर पानी फेंका और फिर बाइक को नीचे गिरा दिया.
ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और रात में ही कई लोगों को चिन्हित करके गिरफ़्तार किया गया.
ये मामला विधानसभा में कांग्रेस की नेता आराधना मिश्रा मोना ने उठाया जिसको लेकर योगी सरकार ने कहा कि अपराधियों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जा रही है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि, “प्रदेश की गोमती नगर की घटना पर हम लोगों ने जवाबदेही तय की है. पहला आरोपी पवन यादव और दूसरा मोहम्मद अरबाज़ है. ये सद्भावना वाले लोग हैं इनके लिए सद्भावना ट्रेन नहीं बुलेट ट्रेन चलेगी. इस घटना को हमने गंभीरता से लिया है पूरी चौकी को सस्पेंड किया है. इनके ख़िलाफ भी कार्रवाई करेंगे.”
इस मामले पर विपक्षी समाजवादी पार्टी ने कड़ा रुख़ अपनाया है. पार्टी के प्रवक्ता फख़रुल हसन ने बीबीसी से कहा, “अपराध को उसके नज़र से ही देखना चाहिए ना कि धर्म और जाति के हिसाब से. मुख्यमंत्री ने दो अभियुक्तों के नाम बताए लेकिन बाक़ी नाम नहीं बताए. समाजवादी पार्टी का रुख है कि अपराध अगर किसी ने किया है तो चाहे वो जिस तबके का हो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए.”
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए. वीडियो रिकॉर्डिंग है, ऐसे में सरकार बहुत आसानी से चिह्नित कर सकती है कि कौन ऐसा कर रहे थे."
पीड़ित नहीं आ रही है सामने

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गोमती नगर पुलिस ने पीड़ित को तलाश करने की कोशिश की है लेकिन गुरुवार दोपहर तक उनका पता नहीं लग पाया है. पुलिस का कहना है कि बाइक का नंबर सीसीटीवी में नहीं आया है इसलिए तलाश नहीं हो पा रही है. इसलिए पुलिस ने अपने सब इंस्पेक्टर की तहरीर पर मुक़दमा दर्ज किया है.
वहीं जब बीबीसी की टीम गोमती नगर थाने पहु्ंची तो वहां अभियुक्तों के परिवार मिले. उन्होंने दावा किया कि उनके बेटों को फंसाया जा रहा है.
लेकिन पुलिस ने दावा किया कि ग़िरफ़्तार लोगों की तस्वीरें सीसीटीवी में आई हैं और इसके हिसाब से कार्यवाई हो रही है.
लखनऊ पुलिस की प्रवक्ता डीसीपी रवीना त्यागी ने मीडिया से कहा, “सीसीटीवी के हिसाब से एक्शन लिया जा रहा है. अभी और लोगों की पहचान की जा रही है. पुलिस की तीन टीमें काम कर रही हैं.”
सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर रूपरेखा वर्मा कहती हैं, “लखनऊ पहले ऐसा नहीं था. लेकिन जिस तरह से राउडी लोगों को ग्लोरीफ़ाई किया जा रहा है उसकी वजह से पूरा वातावरण ख़राब हो रहा है. पुलिस की कार्रवाई तत्कालीन तो होती है लेकिन बाद में कुछ नहीं होता इसलिए लोग इस तरह की हरकतें करते हैं.”
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व पुलिस अधिकारी एस आर दारापुरी के मुताबिक़, “इस प्रकार की घटना दर्शाती है कि पुलिस का कोई डर नहीं है. ये बाइक वाली घटना हो या कहीं पर कांवड़ियों द्वारा लोगों को यहां तक कि पुलिस को पीटे जाने की घटनाएं हों. ये सब साबित करती हैं कि हंगामा करने वाले किस क़दर बेख़ौफ़ हैं.”
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा के मुताबिक 2022 में देश भर में महिलाओं के ख़िलाफ़ क़रीब चार लाख 45 हज़ार अपराध दर्ज किए गए यानी हर घंटे 51 एफ़आईआर दर्ज की गईं. ये आंकड़ा 2021 में 428278 था. कुल केस में से तक़रीबन 19 फ़ीसदी केस छेड़छाड़ के थे और सात फ़ीसदी रेप के मामले थे.
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