You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
चीनी करोड़पति जो 27 वीं बार यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा में हो गए फ़ेल
फ़ैन वांग
बीबीसी न्यूज़
चीन के एक करोड़पति कारोबारी विश्वविद्यालय की दाखिला परीक्षा में 27वीं बार भी फेल हो गए.
परीक्षा परिणाम शुक्रवार को घोषित हुआ और इसमें 56 साल के लियांग शी को 750 में से 424 नंबर मिले.
चीन के किसी भी विश्वविद्यालय में एडमिशन के लिए न्यूनतम 458 नंबर चाहिए होते हैं.
इस साल परीक्षा में करीब 1.3 करोड़ छात्र बैठे थे. उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना लेकर चलने वाले लियांग की कहानी स्थानीय मीडिया में छपी.
लियांग ने 1983 से ही दर्जनों बार प्रवेश परीक्षा दी. उन्होंने स्थानीय मीडिया से कहा कि इस साल का रिज़ल्ट देख कर वो काफ़ी निराश हुए और उन्हें लगने लगा है कि अब शायद ही उनका सपना सच हो पाए.
सिचुआन के रहने वाले लियांग ने चीनी मीडिया तियानमू न्यूज़ को बताया, “मैं मानता कि मैं ये कर सकता हूं. लेकिन अब मैं टूट गया हूं.”
गाओकाओ (यूनिवर्सिटी में दाखिले की परीक्षा) बहुत मुश्किल परीक्षा मानी जाती है. सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि साल 2021 में केवल 41.6% उम्मीदवारों को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश मिल पाया.
कारोबार में कामयाब लेकिन...
1950 के दशक से ही देश के शिक्षा तंत्र में प्रवेश परीक्षाएं केंद्रीय मुद्दा रही हैं, हालांकि चीनी सांस्कृतिक क्रांति के दौरान इन्हें निलंबित रखा गया था.
लियांग का कहना है कि उन्होंने एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने और एक ‘बुद्धिजीवी’ बनने का सपना देखा था.
पहली बार 1983 में 16 साल की उम्र में उन्होंने ये परीक्षा दी थी. 1992 तक उन्होंने अलग अलग नौकरी करते हुए हर साल इसके लिए आवेदन किया. इस परीक्षा के लिए 1992 में उम्र सीमा ख़त्म हो गई.
जिस फ़ैक्ट्री में वो काम करते थे, उसी साल वो दिवालिया हो गई इसलिए लियांग ने 1990 के मध्य में लकड़ी का होलसेल बिज़नेस शुरू किया.
जल्द ही वो एक छात्र से सफल कारोबारी हो गए गए. एक साल में ही उन्होंने 10 लाख युआन बना लिए और इसके बाद उन्होंने निर्माण सामग्री का बिज़नेस शुरू किया.
लेकिन 2001 में चीनी सरकार ने 2001 में गाओकाओ के लिए उम्र सीमा हटा दी, इसके बाद उन्होंने फिर से परीक्षाएं देनी शुरू कर दीं.
अगले साल फिर देंगे परीक्षा
सालों साल परीक्षाएं देते जाने से लियांग का ध्यान अपनी क़िस्मत बदलने की बजाय इसमें सफलता हासिल करके ही दम लेने पर जम गया.
2014 उन्होंने एक स्थानीय अख़बार से कहा था, “अगर आप कॉलेज नहीं जाते हैं तो यह बहुत ही शर्मिंदगी वाली बात है. बिना उच्च शिक्षा के आपका जीवन पूर्ण नहीं है.”
उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए खेल और अन्य दूसरी चीजों से भी दूरी बना ली थी.
लियांग ने कहा कि ‘वो बीते सालों से उलट, अब खुद को हारा हुआ महसूस करने लगे हैं.’
उन्होंने कहा, “मैं सोचने लगा कि क्या मुझे जारी रखना चाहिए?”
एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “अगले साल शायद मैं हाथ खड़े कर दूं . अगर मैं अगले साल बैठता हूं और फ़ेल हो जाता हूं तो मैं अपना सरनेम हटा दूंगा.”
ये भी पढ़ेंः-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)