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चीन ने बंद किया बेरोज़गारी के आंकड़े जारी करना, क्या है वजह?
- Author, मारिको ओई और निक मार्श
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
चीन ने युवाओं की बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े जारी करना बंद कर दिया है जिन्हें कुछ विशेषज्ञों के बीच चीन की आर्थिक मंदी के अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा था.
चीनी सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि यह निर्णय दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में आए सामाजिक बदलाव के कारण हुआ है.
जून में चीन के शहरी क्षेत्रों में 16 से 24 साल के युवाओं के लिए बेरोजगारी दर 20% से अधिक की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई.
देश के केंद्रीय बैंक ने भी विकास को बढ़ावा देने की कोशिशों के तहत मंगलवार को क़र्ज़ पर ब्याज दर घटा दी.
मंगलवार को आए आधिकारिक आंकड़ों से पता चला कि चीन की कुल बेरोजगारी दर जुलाई में बढ़कर 5.3% हो गई है.
साथ ही सरकार ने कहा कि वह युवा बेरोजगारी डेटा जारी करना अस्थायी रूप से रोक रही है.
चीन ने बताई वजह
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के प्रवक्ता फू लिंगहुई ने बताया है कि युवाओं में बेरोज़गारी की गणना करने की पद्धति पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है.
बीजिंग में मीडिया से बात करते हुए फू लिंगहुई ने कहा, "अर्थव्यवस्था और समाज लगातार विकसित होते हुए बदल रहे हैं. सांख्यिकीय कार्यों में निरंतर सुधार की आवश्यकता है."
लिंगहुई ने संकेत दिया कि 16 से 24 साल की उम्र के छात्रों की संख्या में वृद्धि ने बेरोज़गारी के आंकड़ों को प्रभावित किया है.
लेकिन चीन ने छात्रों को बेरोज़गार के रूप में नहीं गिना है. चीन ने साल 2018 में ही युवाओं के बीच बेरोजगारी के आंकड़े जारी करना शुरू किया था.
इन आंकड़ों में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों से जुड़े आंकड़े शामिल नहीं हैं. चीन इस तरह के आंकड़े भी जारी नहीं करते हैं.
चीन सरकार की ओर से लिए गए इस फ़ैसले की ख़बर आने के साथ ही ये मुद्दा चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर ट्रेंड करने लगा.
एक यूज़र ने लिखा, “अपना मुंह ढकने और आंखें बंद करने से क्या वास्तव में समस्याएं हल हो सकती हैं? फ़्लैक्सिबल नौकरी या जो लोग पूरे दिन में सिर्फ एक घंटे काम कर रहे हैं, उन्हें बेरोज़गार नहीं माना जा रहा. सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों पर यक़ीन ना करें.”
वहीं, एक अन्य यूज़र ने लिखा, “जब तक मैं ना कहूं तब तक देश में कोई बेरोज़गार नहीं है.”
फ़ैसले का समय कितना अहम
ये ख़बर ऐसे वक़्त पर आई है जब चीनी अर्थव्यवस्था को कोरोना महामारी के बाद पटरी पर लाने की दिशा में उठाए गए कदम धीमे पड़ते दिख रहे हैं.
विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की ओर से की गयी पहल के तहत पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने तीन महीने में दूसरी बार ब्याज़ दरों में अप्रत्याशित रूप से कटौती की है.
पिछले हफ़्ते चीन ने निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की, जबकि अर्थव्यवस्था में अपस्फीति दर्ज की गई है यानी चीज़ों के दाम घटने लगे हैं.
जूलियन इवांस-प्रिचर्ड ऑफ़ कैपिटल इकोनॉमिक्स ने निवेशकों को लिखे एक नोट में कहा, "जब तक नीतिगत समर्थन नहीं बढ़ाया जाता, तब तक अर्थव्यवस्था के मंदी में फंसने का जोखिम बना हुआ है."
चीन की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता पैदा करने वाला एक और कारण इसके प्रॉपर्टी बाज़ार का संकट से घिरना है.
सोमवार को चीन के सबसे बड़े निजी रियल एस्टेट डिवेलपर कंट्री गार्डन ने चेताया दी कि उसे साल के पहले छह महीनों में 7.6 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है.
चीन के रियल एस्टेट उद्योग को साल 2020 में बड़ा झटका लगा था. सरकार एक नियम लायी थी जिसमें प्रमुख डिवेलपर्स के उधार लेने की राशि को नियंत्रित कर दिया गया था.
इसके अगले साल चीनी संपत्ति की दिग्गज कंपनी एवरग्रांडे ने क़र्ज़ भरने में असर्मथता जताई और खुद को डिफ़ॉल्ट बता दिया.
बीते महीने इस कंपनी ने बताया है कि दो साल में एवरग्रांडे को 81 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.
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