अमेरिका ने ईयू को साथ आने के लिए कहा, क्या भारत की मुश्किलें बढ़ाने की हो रही है तैयारी

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इमेज कैप्शन, ईयू कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वोन के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल ख़रीदने वाले देशों के ख़िलाफ़ और सख़्ती की अपील की है.

रविवार को बेसेंट ने कहा कि अगर ईयू भी रूस से तेल ख़रीदने वाले देशों के ख़िलाफ़ अतिरिक्त पाबंदी लगाता है तो रूस की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी.

अमेरिकी प्रसारक एनबीसी से बात करते हुए बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने ईयू की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लीयेन से रूस के ख़िलाफ़ और दबाव बनाने पर काफ़ी महत्वपूर्ण बात की है.

रूस से तेल ख़रीदने वालों में भारत भी अहम देश है और अमेरिका ने इसी का हवाला देकर अतिरिक्त 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है.

यानी भारत पर अमेरिका पहले ही कुल 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगा चुका है. बेसेंट के बयान से ऐसा लग रहा है कि अमेरिका एक बार फिर से भारत पर और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.

बेसेंट ने कहा कि अमेरिका रूस पर और दबाव बनाने के लिए तैयार है लेकिन यूरोप के देशों को भी साथ आना चाहिए. अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि यूक्रेन की सेना कितने दिनों तक डटी रहती है और रूस की अर्थव्यवस्था कितने दिनों तक टिकी रहती है के बीच रेस है.

बेसेंट ने कहा, ''अगर अमेरिका और ईयू साथ आते हैं तो रूस से तेल ख़रीदने वाले देशों के ख़िलाफ़ पाबंदी और सख़्त की जा सकती हैं और अतिरिक्त टैरिफ़ भी लगाया जा सकता है. इससे रूसी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो जाएगी और राष्ट्रपति पुतिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत की टेबल पर आने के लिए मजबूर होंगे.''

रूस-यूक्रेन युद्ध

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इमेज कैप्शन, ईयू भी चाहता है कि भारत रूस से तेल ख़रीदना बंद करे लेकिन ख़ुद ईयू के सदस्य देशों ने भी रूस से ऊर्जा आयात बंद नहीं किया है

भारत की बढ़ेंगी मुश्किलें?

पिछले हफ़्ते शुक्रवार को यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने कहा था कि यूरोपियन यूनियन वॉशिंगटन में एक प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है, जो रूस के ख़िलाफ़ और कड़े प्रतिबंधों पर बात करेगा.

कोस्टा ने कहा था कि ईयू अमेरिका और अन्य साझेदारों के साथ रूस के ख़िलाफ़ सख़्त प्रतिबंध को लेकर बात कर रहा है.

ट्रंप ने कहा है कि भारत जितनी मात्रा में रूस से तेल ख़रीद रहा है, उससे वह बहुत निराश हैं. ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि उन्होंने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ़ लगाया है और यह बहुत बड़ा टैरिफ़ है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके बहुत अच्छे संबंध हैं.

ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारी भारत को लगातार निशाने पर ले रहे हैं. इनमें अमेरिका के वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री से लेकर ट्रंप के ट्रेड सलाहकार तक शामिल हैं.

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भारत का कहना है कि अमेरिका का टैरिफ़ बेवजह और अनुचित है. भारत ने रूस से तेल आयात का बचाव करते हुए कहा है कि यह उसके हित में है.

भारत ने यह भी कहा है कि रूस से एलएनजी ख़रीद में अब भी ईयू पहले नंबर पर है. एक तथ्य यह भी है कि चीन भारत की तुलना में रूस से ज़्यादा तेल ख़रीद रहा है लेकिन ट्रंप ने चीन पर भारत जितना टैरिफ़ नहीं लगाया है.

स्कॉट बेसेंट की इस अपील को अमेरिका के दो विदेश मंत्रियों और एक वित्त मंत्री के सलाहकार रह चुके ईवान ए फेइजेनबाउम ने पाखंड बताया है.

ईवान ने बेसेंट के वीडियो क्लिप को रीपोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा है, ''अमेरिकी वित्त मंत्री ने रूस से तेल ख़रीदने के मामले में भारत के ख़िलाफ़ ईयू से साथ आने की अपील की है. दूसरी तरफ़ सच्चाई यह है कि यूरोपियन यूनियन के दो सदस्य रूस से तेल और गैस दोनों ख़रीद रहे हैं और मुझे नहीं लगता है कि निकट भविष्य में इसे रोका जा सकेगा.''

''क्या ईयू और अमेरिका का यह गठजोड़ चीन पर भी प्रतिबंध लगाएगा? सेंटर फोर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के मुताबिक़ ईयू ने यूक्रेन पर हमले के तीसरे साल में रूस से जीवाश्म ईंधन का जितना आयात किया है, वह 2024 में ईयू की तरफ़ से यूक्रेन को भेजी गई वित्तीय मदद से 18.7 अरब डॉलर ज़्यादा है.''

पुतिन-मोदी

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इमेज कैप्शन, एससीओ समिट में पीएम मोदी की मुलाक़ात रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी हुई थी

क्या ट्रंप पर भरोसा करेगा भारत?

अमेरिकी राष्ट्रपति भले पीएम मोदी को दोस्त बता रहे हैं लेकिन भारत पर लगातार निशाना साध रहे हैं. 31 अगस्त को पीएम मोदी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन (एससीओ) समिट में शामिल होने चीन के तियानजिन शहर पहुँचे थे. यहीं उनकी मुलाक़ात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई थी.

इस मुलाक़ात के क़रीब एक हफ़्ते बाद ट्रंप ने पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा था, ''ऐसा लग रहा है कि हमने भारत और रूस को संदिग्ध चीन के हाथों खो दिया है. उम्मीद करता हूं कि इनकी सोहबत सुखद और लंबे समय के लिए होगी.''

ट्रंप की इस टिप्पणी के तीन दिन बाद रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने रूस के सरकारी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ''तीन अहम शक्तियां चीन, रूस और भारत एक साथ दिखे. तीनों महान सभ्यताओं के प्रतिनिधि हैं. तीनों देश अपने साझे हितों को समझते हैं.

उन्होंने कहा, ''इसका मतलब यह नहीं है कि तीनों देश हर मुद्दे पर एकमत हैं. लेकिन चीन, भारत और रूस की साझेदारी पारस्परिक हितों पर आधारित है.''

ट्रंप की भाषा भले शुक्रवार को भारत के प्रति उदारता भरी थी लेकिन इस पर मोदी सरकार के लिए भरोसा करना आसान नहीं होगा.

शु्क्रवार को अमेरिका के वाणिज्य मंत्री होवार्ड लुटनिक ने ब्लूमबर्ग से कहा था, ''एक या दो महीने में भारत बातचीत की टेबल पर आएगा और सॉरी बोलेगा. भारत ट्रंप के साथ समझौता करने की कोशिश करेगा. इसके बाद ट्रंप तय करेंगे कि मोदी के साथ कैसे डील करना है.''

ट्रंप ने शुक्रवार को ही कहा था कि अमेरिका-भारत के संबंधों को लेकर बहुत चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि दोनों देशों के बीच ख़ास संबंध हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि नरेंद्र मोदी महान प्रधानमंत्री हैं और हमेशा उनके दोस्त रहेंगे.

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इमेज कैप्शन, पिछले महीने 15 अगस्त को अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाक़ात हुई थी

'नाटकीय सुधार की संभावना कम'

मोदी ने ट्रंप की इस टिप्पणी के कुछ घंटों बाद एक्स पर लिखा था कि वह राष्ट्रपति ट्रंप की इस बात की प्रशंसा करते हैं और उनसे पूरी तरह से सहमत हैं.

लेकिन क्या ट्रंप और मोदी की इस सहमति से दोनों देशों के संबंधों में वो भरोसा लौट पाएगा? ब्लूमबर्ग से भारत सरकार के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ''भारत ट्रंप की टिप्पणी को सकारात्मक रूप में ले रहा है कि लेकिन अतीत में चीजे़ं जैसी थीं, वैसी नहीं हो जाएंगी. मोदी ने ट्रंप को जवाब दिया लेकिन सतर्कता के साथ. उन्होंने दोस्त कहकर संबोधित नहीं किया. ट्रंप की टिप्पणी से ऐसा कोई संकेत नहीं मिल रहा है कि संबंध सामान्य होने वाले हैं.''

थिंक टैंक यूरेशिया ग्रुप में इंडिया प्रैक्टिस के प्रमुख परमीत पाल चौधरी ने ब्लूमबर्ग से कहा, ''मैं दोनों देशों के संबंधों में नाटकीय सुधार की उम्मीद नहीं कर रहा हूँ. ट्रंप की किताब 'द आर्ट ऑफ डील' में इन चालों का बख़ूबी ज़िक्र है. अमेरिकी राष्ट्रपति वो हर तरीक़ा अपनाएंगे, जिससे विरोधी उनके सामने कोई समझौते के लिए राज़ी हो जाए.''

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू में शुक्रवार को कहा कि भारत रूस से तेल ख़रीदना जारी रखेगा. भारत की वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के हक़ में जो ऊर्जा सौदा होगा, वही किया जाएगा.

लेकिन यूरोपियन यूनियन पहले ही एक भारतीय कंपनी पर प्रतिबंध लगा चुका है.

जुलाई महीने में यूरोपियन यूनियन ने नायरा एनर्जी लिमिटेड के स्वामित्व वाली गुजरात स्थित वाडीनार रिफ़ाइनरी पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी.

ईयू ने रूस के एनर्जी सेक्टर को टारगेट करने वाले नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी और गुजरात की रिफ़ाइनरी भी इस प्रतिबंध में शामिल हो गई है.

ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''रूसी एनर्जी कंपनी रोज़नेफ़्ट की योजना भारत की नायरा एनर्जी लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बेचने की थी. लेकिन ईयू के प्रतिबंध के बाद यह योजना अधर में लटक सकती है.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित