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नाबालिग ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ वापस लिए आरोप- प्रेस रिव्यू
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नाबालिग रेसलर ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ अपने आरोप वापस ले लिए हैं.
इस नाबालिग रेसलर ने इससे पहले पुलिस और मैजिस्ट्रेट के समक्ष दिए अपने दो बयानों में बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न और पीछा करने के आरोप लगाए थे.
सात महिला पहलवानों ने बृजभूषण पर आरोप लगाए हैं, जिनमें ये एक अकेली नाबालिग है.
अख़बार ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि नाबालिग रेसलर ने सीआरपीसी 164 के तहत मैजिस्ट्रेट के समक्ष ताज़ा बयान दर्ज कराया है.
अब अदालत ये तय करेगी कि नाबालिग रेसलर के 164 के तहत दर्ज कराये गए कौन से बयान को तरजीह दी जाएगी और आरोप तय किए जाएंगे या नहीं.
अख़बार ने इस रेसलर के पिता से भी बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
लड़की की तरफ़ से उनके पिता ने पुलिस को शिकायत दी थी, जिसके आधार पर एफ़आईआर दर्ज की गई.
इस शिकायत में उन्होंने कहा है कि उनकी बेटी अभियुक्त के यौन शोषण के बाद से परेशान हैं और शांति से नहीं रह पा रही है.
इस नाबालिग रेसलर ने 10 मई को मैजिस्ट्रेट के समक्ष अपना पहला बयान दर्ज कराया था. बृजभूषण पर पोक्सो क़ानून की धारा 10 के तहत भी मुक़दमा दर्ज किया गया था जिसके तहत सात साल तक की सज़ा का प्रावधान है.
‘इंटरलॉकिंग सिस्टम से जानबूझकर की गई छेड़छाड़ से हुआ हादसा’
सीबीआई ने सोमवार को ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे की जांच शुरू कर दी है. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अधिकारियों का कहना है कि इंटरलॉकिंग सिस्टम में जानबूझकर की गई छेड़छाड़ की वजह से हादसा हुआ है.
सोमवार शाम सीबीआई की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई थी और जांच शुरू गई थी. सीबीआई की जांच का मुख्य बिंदू ये रहेगा कि हादसे की वजह लापरवाही है या जानबूझकर की गई छेड़छाड़.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बाहानागा बाज़ार रेलवे स्टेशन पर इंटरलॉकिंग सिस्टम के ‘लॉजिक’ को मानवीय हस्तक्षेप से बदला गया था.
अधिकारियों का कहना है कि सीबीआई जांच में इस ‘छेड़छाड़’ का मक़सद पता चल सकेगा.
अख़बार से बात करने वाले रेलवे अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में ये स्पष्ट हो गया है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ हुई है.
नग्नता हमेशा अश्लीलता नहीं होतीः केरल हाई कोर्ट
केरल की महिला अधिकार कार्यकर्ता रेहाना फ़ातिमा को राहत देते हुए केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि हर संदर्भ में महिला के शरीर के नग्न ऊपरी हिस्से को सेक्स के नज़रिए से देखना अनुचित और भेदभावपूर्ण है.
रेहाना फ़ातिमा ने अपने बच्चों को अपने अर्धनग्न शरीर की पेंटिंग बनाने के लिए कहा था जिसके बाद उन पर पोक्सो एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था.
सोमवार को केरल हाई कोर्ट ने कहा है कि रेहाना फ़ातिमा के कृत्य को सेक्स या सेक्स के लिए प्रेरित करना नहीं माना जाएगा.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा है कि महिलाओं के पास अपने शरीर को लेकर निर्णय लेने का अधिकार बराबरी और निजता के मूल अधिकार का आधार है.
अदालत ने ये भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 ने जो अभिव्यक्ति की जो आज़ादी दी है ये उसके तहत भी आता है.
रेहाना फ़ातिमा ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें उनके नाबालिग बच्चे उनके अर्धनग्न शरीर की पेंटिंग बनाते हुए दिख रहे थे. इस वीडियो के बाद उन पर पोक्सो और आईटी एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था.
अदालत ने इस मामले में 33 वर्षीय फ़ातिमा को बरी करते हुए कहा है कि इस मासूम कलात्मक अभिव्यक्ति को बाल पोर्नोग्राफ़ी नहीं कहा जा सकता है
कूनो नेशनल पार्क में कुपोषण से मरे थे चीता के शावक
द टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता के तीन शावकों की मौत के पीछे भूख और भीषण गर्मी को वजह माना जा रहा है.
अख़बार ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि पार्क में चीता के तीन शावकों की मौत भूख की वजह से हुई है. बढ़ती गर्मी ने उनके लिए हालात और मुश्किल कर दिए.
विशेषज्ञों ने ये तर्क उस जानकारी के आधार पर दिया है जिसे अभी तक भारतीय वन्यजीव प्राधिकरण ने जारी नहीं किया है.
एक शोधकर्ता ने अख़बार को बताया है कि शावकों के शरीर के वज़न और कुपोषित अवस्था से संकेत मिलता है कि 23 मई को मौत से पहले दस दिनों तक उन्होंने पर्याप्त भोजन नहीं लिया था.
नामीबिया से आई एक चीता से पैदा हुए चार शावकों में से इन तीनों शावकों की मौत 23 मई को हुई थी. चौथा शावक फिलहाल डॉक्टरों कि निगरानी में है और उसका वज़न बढ़ रहा है. इस शावक को उसकी मां से जल्द ही मिला दिया जाएगा.
वन्यजीव अधिकारियों का मानना है कि चीता के शावकों की मौत गर्मी, कुपोषण और डीहाइड्रेशन की वजह से हुई है.
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