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पनामा नहर: ट्रंप का दावा पनामा के राष्ट्रपति ने किया ख़ारिज, दिया जवाब
पनामा के राष्ट्रपति होसे राउल मुलिनो ने डोनाल्ड ट्रंप की उस योजना को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने पनामा नहर का नियंत्रण वापस अमेरिका को दिलाने की बात कही थी.
डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा से कहा था कि वह पनामा नहर की फीस कम करे, वरना नहर का नियंत्रण वापस अमेरिका को दे दे.
ट्रंप ने आरोप लगाया कि मध्य अमेरिकी देश पनामा अमेरिकी मालवाहक जहाज़ों से ज़्यादा क़ीमत वसूल रहा है.
राष्ट्रपति मुलिनो ने कहा कि ये अहम रास्ता जिसके ज़रिए बड़े पैमाने पर व्यापार होता है वो उन्हीं के देश के हाथों में है और रहेगा.
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ट्रंप ने अपने उद्घाटन भाषण में दावा किया कि, "पनामा ने अपने निष्पक्ष रहने के वादे को तोड़ा है और पनामा नहर का संचालन चीन कर रहा है."
पनामा के राष्ट्रपति होसे राउल मुलिनो ने जवाब में कहा, "हमारे प्रशासन में दुनिया के किसी देश का दख़ल नहीं है."
पनामा नहर अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है. अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के बीच अमेरिका के लगभग 40 फ़ीसदी मालवाहक जहाज इसी जलमार्ग से होकर जाते हैं.
ट्रंप ने अपने भाषण में पनामा नहर पर क्या कहा
अपने दूसरे कार्यकाल के पहले संबोधन में ट्रंप ने दावा किया, "अमेरिका के मालवाहक जहाज़ों से ज्यादा फ़ीस वसूली जाती है और उनके साथ किसी भी तरीके से न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाता है इसमें अमेरिका की नौसेना भी शामिल है."
"इन सब के अलावा पनामा नहर को चीन ऑपरेट कर रहा है और हमने इसे चीन को नहीं दिया था, हमने इसे पनामा को दिया था और अब हम इसे वापस ले रहे हैं."
पिछले महीने भी डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा से कहा था कि वो पनामा नहर में अमेरिकी जहाज़ों पर लगाई जाने वाली फ़ीस कम करे या तो उसका नियंत्रण अमेरिका को वापस कर दे.
इससे पहले ट्रंप ने ये भी कहा था कि वह ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्ज़ा चाहते हैं.
ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र हैं.
डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को छोड़ने के किसी भी सुझाव को ख़ारिज किया है.
हालांकि ट्रंप ने अपने उद्घाटन भाषण में ग्रीनलैंड का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने अगले चार वर्षों के लिए अपने विस्तारवादी विज़न को पेश किया.
उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका एक बार फिर से ख़ुद को एक बढ़ता हुआ राष्ट्र मानेगा. ऐसा राष्ट्र जो हमारी संपत्ति बढ़ाएगा, हमारे क्षेत्र का विस्तार करेगा, हमारे शहरों का निर्माण करेगा, हमारी अपेक्षाओं को बढ़ाएगा और हमारे झंडे को नई और सुंदर सीमाओं तक लेकर जाएगा."
पनामा नहर समझौता
20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका ने पनामा नहर का निर्माण किया था. लेकिन सालों के विरोध के बाद, साल 1977 में तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने पनामा के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत इस नहर का नियंत्रण धीमे-धीमे पनामा को सौंपना था.
ट्रंप ने इस समझौते को 'एक बड़ी ग़लती' क़रार दिया.
साल 1999 में, पनामा नहर का पूरा नियंत्रण पनामा ने ले लिया. इसके तहत किए गए समझौते के मुताबिक़ पनामा ने वादा किया कि वो पनामा नहर का संचालन निष्पक्ष तरीक़े से करेगा और ये सभी देशों के जहाज़ों के लिए खुली रहेगी.
हर साल पनामा नहर से क़रीब 14 हज़ार पोतों की आवाजाही होती है. इनमें कार ले जाने वाले कंटेनर शिप के अलावा तेल, गैस और अन्य उत्पाद ले जाने वाले पोत भी शामिल हैं.
ट्रंप के पनामा नहर पर किए गए दावे पर आई प्रतिक्रियाएं
ट्रंप के भाषण के बाद, पनामा के राष्ट्रपति मुलिनो ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया.
उन्होंने कहा, "यह नहर किसी ने हमें ख़ैरात में नहीं दी. हमारे लोगों ने इसके लिए कई पीढ़ियों तक संघर्ष किया. तब जाकर ये हमें 1999 में मिली."
हांगकांग की कंपनी हचिसन व्हामपोआ जलमार्ग के दो बंदरगाहों को ऑपरेट करती है. जिसमें प्रशांत महासागर पर स्थित बाल्बोआ बंदरगाह और अटलांटिक छोर पर क्रिस्टोबल बंदरगाह शामिल है.
दुनिया का लगभग पांच प्रतिशत समुद्री व्यापार 51 मील लंबी पनामा नहर के ज़रिए होता है.
पिछले हफ्ते मार्को रुबियो (ट्रंप प्रशासन में विदेश मंत्री पद के लिए नामांकित) ने कहा था, "सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि ये कंपनियां इस नहर के दोनों छोरों को नियंत्रित करती हैं और यदि तनाव के समय में चीन कह दे कि इसे बंद कर दो और अमेरिका को यहां से गुजरने मत दो तो हमें एक बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा. ये एक बड़ी आर्थिक और राष्ट्रीय समस्या बन जाएगी."
अपने भाषण में ट्रंप ने कहा, कि वो 'शांतिदूत बनना चाहते हैं.'
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओबामा प्रशासन के दौरान रूस में रहे अमेरिकी राजदूत माइकल मैकफॉल ने सोशल मीडिया पर लिखा, "आप शांतिदूत भी बन जाएं और पनामा नहर भी वापस ले लें, ऐसा नहीं हो सकता."
चीन का पनामा नहर पर रुख़
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, दिसंबर 2024 में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माउ निंग ने कहा था कि चीन लगातार पनामा की संप्रभुता का सम्मान करता है और साथ ही इसे एक स्थायी रूप से तटस्थ अंतर्राष्ट्रीय मार्ग के रूप में मान्यता देता है.
साल 2017 में पनामा ने ताइवान से राजनयिक संबंध ख़त्म कर चीन से संबंध कायम किए थे.
चीन की नीति के मुताबिक़ जो देश ताइवान से राजनयिक संबंध रखते हैं, उनसे वो संबंध नहीं रखता है क्योंकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है.
चीन के भारी निवेश के कारण वो पनामा का अहम सहयोगी बन गया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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