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पायल कपाड़ियाः एफ़टीआईआई में विरोध की आवाज़ से दुनिया की नामी निर्देशिका तक
कान फ़िल्म समारोह में शनिवार भारत के लिए ऐतिहासिक रहा. बीते तीन दशकों में भारत की कोई फ़िल्म समारोह की मुख्य प्रतिद्वंदी श्रेणी में प्रदर्शित हुई और अवॉर्ड जीता.
निर्देशिका पायल कपाड़िया की फ़िल्म 'ऑल वी इमेजिन एज़ लाइट' ने ना सिर्फ़ तारीफ़ बटोरी बल्कि इस प्रतिष्ठित फ़िल्म फ़ेस्टिवल का दूसरा सबसे बड़ा अवॉर्ड भी जीता.
कान समारोह के हॉल में जब पायल कपाड़िया की फ़िल्म ख़त्म हुई तो दर्शक खड़े होकर आठ मिनट तक तालियां बजाते रहे.
मुंबई में केरल से आकर रह रही नर्सों के जीवन पर आधारित इस फ़िल्म को द जूरी प्राइज़ या ग्रैंड प्री अवॉर्ड मिला है.
इस पुरस्कार के साथ ही 38 साल की पायल कपाड़िया फ्रांसिस, फ़ोर्ड कोपोला, योर्गोस लैंथिमोस, अली अब्बास, जैक्स ऑडियार्ड और जिया झांगके जैसे निर्देशकों की क़तार में शामिल हो गई हैं.
'मैं बहुत नर्वस हूं और इसलिए कुछ लिखकर लाई हूं'
कान फ़िल्म समारोह में अवॉर्ड मिलने के बाद पायल ने मुस्कुराते हुए कहा, “ये मेरे लिए अविश्वसनीय है और मैं अपने आप को चुटकी काट रही हूं. मैं बहुत आभारी हूं और यहां पहुंचकर बहुत ख़ास महसूस कर रही हूं.”
फ़िल्म समारोह के दौरान बोलते हुए पायल ने कहा, “इस प्रतियोगिता के लिए चयनित होना ही सपने जैसा था और ये अवॉर्ड मेरी कल्पना से परे है.”
पायल ने पोडियम से बोलते हुए कहा, “इस समारोह में पहुंचकर बहुत अच्छा लग रहा है. कृपया अगली भारतीय फ़िल्म के लिए तीस साल का इंतज़ार ना करें. ”
'ऑल वी इमेजिन एज़ लाइट' तीन अलग-अलग महिलाओं की दोस्ती की कहानी है और इस फ़िल्म में कई जगह ये महिला किरदार एक दूसरे के सामने खड़ी नज़र आती हैं.
पायल कपाड़िया ने कहा, “ये फ़िल्म तीन बहुत अलग महिलाओं की दोस्ती की कहानी है और अक्सर महिलाएं एक दूसरे के आमने-सामने खड़ी नज़र आती हैं. हमारे समाज को इसी तरह डिज़ाइन किया गया है, ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन मेरे लिए, दोस्ती एक बहुत अहम रिश्ता है. दोस्ती एक दूसरे के प्रति मज़बूत एकजुटता, समावेशिता और सहानुभूति पैदा कर सकती है.”
अवॉर्ड समारोह के दौरान पायल कपाड़िया ने फ़िल्म की अभिनेत्रियों को मंच पर बुलाते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि इनके बिना ये फ़िल्म बन पाती, इन तीन महिलाओं ने मुझे कितना कुछ दिया है, एक परिवार की तरह इन्होंने फ़िल्म को अपना बनाया.”
कपाड़िया ने कहा, “मैं बहुत नर्वस हूं और इसलिए कुछ लिखकर लाई हूं. ”
पायल का सफर
मुंबई में पैदा हुई पायल कपाड़िया कलाकार नलिनी मलानी की बेटी हैं.
पायल ने आंध्र प्रदेश के ऋषि वैली स्कूल से पढ़ाई की और आगे चलकर मुंबई के सैंट ज़ेवियर कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री ली. उन्होंने सोफ़िया कॉलेज से एक साल की मास्टर्स डिग्री भी ली है.
फ़िल्मों में उनकी दिलचस्पी उन्हें पुणे के एफ़टीटीआई तक ले गई जहां से उन्होंने फ़िल्म निर्माण की शिक्षा ली.
कपाड़िया की पहली डॉक्यूमेंट्री ‘ए नाइट ऑफ़ नोइंग नथिंग’ ने साल 2021 में कान फ़िल्म समारोह में गोल्डन आई अवॉर्ड जीता था. ये फ़िल्म पुणे के फ़िल्म संस्थान में साल 2015 में हुए छात्रों के प्रदर्शन पर आधारित थी.
इसके अलावा पायल कपाड़िया ने ‘ऑफ़्टरनून क्लाउड्स, द लास्ट मैंगो बिफ़ोर द मॉनसून’ और ‘वॉट इज़ द समर सेइंग’ जैसी फ़िल्में बनाई हैं.
2015 प्रदर्शनों का चेहरा थीं पायल कपाड़िया
पायल कपाड़िया पुणे के फ़िल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया की छात्र रही हैं और 2022 में आई उनकी पहली डॉक्यूमेंट्री इस फ़िल्म संस्थान में हुए छात्रों के प्रदर्शन पर आधारित थी.
2015 में हुए इन प्रदर्शनों के दौरान पायल एफ़टीआईआई की छात्रा थीं और इस दौरान उन पर संस्थान ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी.
चार महीने चले इन प्रदर्शनों में पायल कपाड़ियां एक प्रमुख चेहरा थीं. बाद में संस्थान ने उन्हें मिलने वाली स्कॉलरशिप में भी कटौती कर दी थी.
पायल कपाड़िया ने तब इन प्रदर्शनों को लेकर कहा था, “आप हड़ताल के लिए छात्रों को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं. हड़ताल मौज मस्ती के लिए नहीं होती है. इसके लिए बहुत मेहनत और मज़बूत इच्छाशक्ति की ज़रूरत होती है."
"पिछली सरकारों ने भी एफ़टीआईआई को लेकर कई भारी ग़लतियां की हैं. उन्होंने शिक्षाविदों को इंस्टीट्यूट नहीं चलाने दिया बल्कि इसे ऐसे बाबुओं के हाथ में दे दिया जिन्हें सिनेमा की कोई जानकारी नहीं है.”
पायल कपाड़िया ने तब एफ़टीआईआई की छात्रा रहते हुए कहा था कि इस संस्थान के छात्र ऐसी फ़िल्में बनाते हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला में योगदान करती हैं.
बॉलीवुड भी मना रहा है जश्न
कान में पायल की कामयाबी का जश्न बॉलीवुड भी मना रहा है. अभिनेत्री रिचा चड्डा ने उन्हें मुबारकबाद देते हुए कहा, “ऐतिहासिक. इस ख़बर को सुनकर बेहद ख़ुश हूं, मुबारक हो पायल कपाड़िया, रणबीर दास, कानी कुसृति, दिव्या प्रभा, हृीदु हारून, छाया कदम और पूरी टीम.”
रिचा ने कहा, “किसी भी दौर में स्वतंत्र फ़िल्म निर्माण मुश्किल काम है लेकिन अब इसे और दबाया जा रहा है, और फिर ग्रैंड प्री जीत लेना, अभिभूत हूं.”
पायल कपाड़िया ने एक साक्षात्कार में बताया है, “मुझे ये फ़िल्म बनाने में पांच साल लगे हैं. फ़िल्म बनाना एक बेहद मुश्किल काम है.”
पायल ने कहा, “ये बहुत बड़ी फ़िल्म नहीं हैं, हमें उम्मीद नहीं थी कि ये कान फ़िल्म फेस्टिवल तक पहुंच पाएगी. जब हमें पता चला तो मैं बहुत उत्साहित थी और नर्वस भी और मुझे बहुत ख़ास महसूस हो रहा था कि ये फ़िल्म अब चर्चा में आ जाएगी, जो कान पहुंचकर मिलती है.”
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