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मालदीव के लिए भारत क्या चीन के कारण अहम हो गया है?
- Author, जैस्मीन निहालानी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इस महीने की शुरुआत में जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने दिल्ली का दौरा किया था तब भारत ने नक़दी संकट से जूझ रहे इस द्वीपीय देश को 6,305 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद देने का वादा किया था.
इस यात्रा में राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू ने भारतीय पर्यटकों से मालदीव आने की अपील की थी.
यह दौरा 2024 की शुरुआत में घटे घटनाक्रमों से बिल्कुल उलट था. ख़ासकर तब जब मुइज़्ज़ू ने राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान में ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था.
विवाद
जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के साथ एक विवाद शुरू हुआ था और टूरिज़म डेस्टिनेशन के लिए मालदीव की तुलना लक्षद्वीप से की गई थी.
इस मामले ने तब राजनयिक विवाद का रूप ले लिया जब मालदीव के मंत्रियों ने भारत और पीएम मोदी के ख़िलाफ़ विवादित टिप्पणियां कीं.
इसके बाद भारत में सोशल मीडिया यूज़र्स ने मालदीव जाने का बहिष्कार करने की अपील की.
भारतीय पर्यटकों की कमी
इन विवादों के चलते मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में तेज़ी से गिरावट आ गई. मालदीव की अर्थव्यव्स्था पर्यटन पर बहुत अधिक निर्भर है.
साल 2022 में मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की 22.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी.
साल 2020 से 2023 तक मालदीव आने वाले पर्यटकों की संख्या के लिहाज से भारत का पहला स्थान था, लेकिन 2024 में यह छठे स्थान पर पहुँच गया.
2023 में जनवरी से अगस्त के बीच 1.35 लाख भारतीयों ने मालदीव की यात्रा की थी. 2024 में यह संख्या गिरकर 81,500 हो गई यानी 40% की गिरावट दर्ज हुई.
पहले चीन पर्यटकों का प्रमुख स्रोत हुआ करता था लेकिन कोविड के सालों चीनी पर्यटकों की संख्या में कमी आई और 2024 में चीन शीर्ष स्थान पर पहुँच गया.
आर्थिक संकट
मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार ख़ाली हो रहा है.
2024 के सितंबर महीने के अंत में मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार में महज 37.1 करोड़ डॉलर ही बचा था. यह दिसंबर 2013 के बाद अब तक का सबसे कम है.
यह विदेशी मुद्रा भंडार मुश्किल से देश के एक महीने का आयात बिल भरने भर है.
आईएमएफ़ का सुझाव है कि देशों को अपने पास तीन महीने के आयात बिल भरने भर विदेशी मुद्रा भंडार होना चाहिए.
चीन पर कितनी निर्भरता
मई 2024 में आईएमएफ़ ने मालदीव को बढ़ते क़र्ज़ को लेकर चेतावनी दी थी.
मालदीव का कुल कर्ज़ 2024 की पहली तिमाही तक जीडीपी का 110% के आसपास बना हुआ था. मालदीव में सरकारी क़र्ज़ उसे कहते हैं, जब सरकार ख़र्च करने के लिए पैसे लेती है.
लंबे समय से इस द्विपीय राष्ट्र का सबसे बड़ा विदेशी क़र्ज़दाता चीन है.
2024 की पहली तिमाही में मालदीव के विदेशी कर्ज़ में चीन के एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक की हिस्सेदारी 20% थी और 20 प्रतिशत बॉन्डहोल्डर्स की. इसके अलावा 18 प्रतिशत भारत के एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक का क़र्ज़ है.
अगर कुल कर्ज़ में सबसे बड़ा हिस्सा किसी एक देश का होता है तो क़र्ज़ के जाल में फँसने की आशंका ज़्यादा रहती है क्योंकि क़र्ज़दाता अपने हितों को साधने में सफल होता है.
भारत पर निर्भरता
मालदीव की निर्भरता भारत पर भी कम नहीं है.
मालदीव में खाने पीने की चीज़ों की ज़रूरत का बस 10% ही घरेलू उत्पादन होता है.
इसीलिए अनाज और अन्य खाने पीने की चीज़ों के लिए मालदीव 100% आयात पर निर्भर है.
इसी तरह रिश्ते में तनाव के बावजूद चीन पर पर्यटन और विदेशी कर्ज़ की ज़्यादा निर्भरता के चलते भारत मालदीव के लिए एक अहम पड़ोसी देश है.
2023 के आंकड़ों के अनुसार, मालदीव का 16% आयात भारत से था जो कि ओमान, यूएई और चीन के बाद सबसे अधिक है.
पिछले 10 सालों का व्यापार आँकड़ा दिखाता है कि आयात के लिए भारत पर मालदीव की निर्भरता लगातार बढ़ी है.
भारत पर मालदीव की भारी निर्भरता दवा और खाद्य सामग्री पर है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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