ऋषि सुनक: 'प्राउड हिंदू', भारत कनेक्शन, ब्रिटेन की सत्ता पाने और गँवाने की कहानी

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ब्रिटेन को अपना नया प्रधानमंत्री मिल गया है. नए पीएम किएर स्टार्मर 10 डाउनिंग स्ट्रीट यानी प्रधानमंत्री के दफ़्तर और आवास पहुंच गए हैं.
सत्ता से बाहर हुए ऋषि सुनक ने चुनावों में मिली हार के बाद माफ़ी मांगते हुए प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया.
ऋषि सुनक भारतीय मूल के हैं और जब वो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे तब भारत में भी काफ़ी चर्चा में रहे थे.
ऋषि सुनक का एक भारतीय कनेक्शन ये भी है कि वो इंफोसिस कंपनी के संस्थापक नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति की बेटी अक्षता के पति भी हैं. ऋषि ने अक्षता मूर्ति से 2009 में बेंगलुरु में शादी की थी.
ऋषि सुनक ख़ुद को प्राउड हिंदू बताते रहे हैं.
वो जब भारत आए थे, तब दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर भी गए थे.
आइए आपको बताते हैं कि कैसे ऋषि सुनक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे और अब सत्ता से बाहर हो गए हैं.

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कहानी ऋषि सुनक की
साल 2022 ऋषि सुनक के लिए बेहद ख़ास था. इसी साल ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे. वे पहले ब्रिटिश एशियाई और पहले हिंदू हैं जो ब्रिटेन में लोकतांत्रिक सत्ता के शिखर तक पहुंचे.
भारतीय मूल के ऋषि सुनक की पृष्ठभूमि और अतीत बेहद दिलचस्प है.
ये जानना दिलचस्प है कि ऋषि सुनक किस तरह वर्ग, नस्ल, औपनिवेशिकता और ख़ुद ब्रिटिश साम्राज्य के ढांचे से गुज़रते हुए 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचे.
उषा सुनक और यशवीर सुनक के घर साउथैम्पटन में ऋषि सुनक का जन्म वर्ष 1980 में हुआ. उनके माता-पिता, पूर्वी अफ़्रीका के ब्रिटिश उपनिवेशों से ब्रिटेन पहुंचे थे.
ऋषि की मां का जन्म तंगनयिका में हुआ था जो बाद में आधुनिक तंज़ानिया का हिस्सा बन गया था.
उनके पिता यशवीर का जन्म ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहे प्रोटेक्टरेट ऑफ़ कीनिया में हुआ था.
सुनक के दादाजी का जन्म ब्रिटिश शासन वाले पंजाब में हुआ था. वहां से 1930 के दशक में वो पूर्वी अफ़्रीका चले गए और वहीं बस गए.
लेकिन जैसे-जैसे अफ़्रीकी देश ब्रिटिश शासन से आज़ाद होने लगे, भारतीय समुदाय के लोग ब्रिटेन पहुंचने लगे.

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'ब्रिटेन जाने के लिए शादी के गहने बेचे'
ऋषि सुनक की एक बायोग्राफ़ी में बताया गया है कि साल 1960 में उनकी नानी सरक्षा ने ब्रिटेन आने के लिए अपनी शादी के गहने बेच दिए थे. इसके बाद उनके नाना-नानी दोनों ब्रिटेन आ गए थे.
सुनक के दादाजी तंगनयिका में टैक्स अधिकारी थे और ब्रिटेन आने के बाद उन्हें राजस्व विभाग में नौकरी मिल गई थी.
सुनक के माता-पिता मेडिकल के पेशे में थे. पिता नेशनल हेल्थ सर्विस में फ़ैमिली डॉक्टर थे और मां फ़ार्मेसी चलाने लगी थीं.
जैसे-जैसे ब्रिटेन में भारतीय समुदाय तरक़्क़ी करने लगा, वैसे-वैसे दूसरे एशियाई समुदायों से यह अलग दिखने लगा. भारतीय समुदाय ब्रिटिश समाज से ज़्यादा घुला-मिला था.
ब्रिटेन में 'डायरेक्ट फ़्लाइट माइग्रेंट' भी आए. लेकिन वे सुनक के पूर्वजों की तरह उपनिवेश के रास्ते नहीं आए. ये लोग 1947 में भारत विभाजन के साथ सीधे यहां आए थे.
इनमें से ज़्यादातर ग्रामीण समुदाय के थे और इनमें हिंदुओं की तुलना में मुस्लिमों की संख्या ज़्यादा थी. उनके पास अच्छी नौकरी के लायक और कौशल नहीं था. ना ही वह अंग्रेज़ी जानते थे.
ब्रिटिश अख़बार 'द गार्डियन' के मुताबिक़, ब्रिटेन में हिंदू आप्रवासी होना अच्छी बात है क्योंकि दो तिहाई हिंदू यहां प्रबंधकीय पदों या ऊंचे प्रोफे़शनल पदों पर हैं.

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सत्ता का सफ़र
साल 2020 में ऋषि सुनक को तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने वित्त मंत्री बनाया था.
सुनक की नियुक्ति कोविड महामारी की शुरुआत के साथ हुई. उन्होंने नौकरी से निकाले गए लोगों की सहायता के लिए- ईट आउट टू हेल्प आउट योजना की शुरुआत की. लेकिन कोविड के बढ़ते मामलों की वजह से उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा था.
फिर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का नाम पार्टीगेट स्कैंडल में सामने आया और इससे उनकी छवि को धक्का लगा.
जुलाई 2022 में जब कंज़र्वेटिव पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लग गई थी, तो उस समय प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के बाद सुनक ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
बोरिस जॉनसन की जगह लिज़ ट्रस ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन 45 दिन में ही उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था. फिर कंज़र्वेटिव पार्टी ने सुनक को पीएम बनाया और चुनाव के लिए उन्हें ही अपना उम्मीदवार घोषित किया.
महंगाई कम करने, अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने और छोटी नौकाओं के ज़रिए प्रवासियों को ब्रिटेन आने से रोकना उनके कुछ मुख्य चुनावी वादे थे.
सुनक ने कंज़र्वेटिव पार्टी की कमान ऐसे समय संभाली थी, जब पार्टी बिखराव के दौर से गुज़र रही थी, जिसे संभालने में उन्हें कुछ हद सफलता मिली.

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‘हिंदू होने के नाते आया हूं’
पिछले साल अगस्त में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के तौर पर ऋषि सुनक का एक बयान काफ़ी सुर्ख़ियों में रहा था.
कथावाचक मोरारी बापू ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में कथा सुना रहे थे.
इस कार्यक्रम में ऋषि सुनक भी शरीक हुए थे. ऋषि सुनक ने मोरारी बापू की आरती की और मंच से अपनी बातें भी साझा कीं थीं.
सुनक ने अपनी बात जय सिया राम नारे से शुरू करते हुए कहा था, ''भारत के स्वतंत्रता दिवस पर मोरारी बापू की कथा में आकर अच्छा लग रहा है.''
ऋषि सुनक ने आगे कहा था, ''मैं यहां प्रधानमंत्री की तरह नहीं, हिंदू की तरह आया हूं. मेरे लिए आस्था बेहद निजी है. ज़िंदगी के हर पहलू में ये मुझे दिशा दिखाता है. प्रधानमंत्री होना सम्मान की बात है, लेकिन ये इतना आसान काम नहीं है. कड़े फ़ैसले लेने होते हैं. मुश्किल हालात का सामना करना होता है. ऐसे में हमारी आस्था हमें साहस और ताकत देती है ताकि देश के लिए अच्छे फ़ैसले लिए जा सकें.''

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तब ऋषि सुनक ने कहा था, ''मेरे लिए बेहद ख़ास और कमाल का पल रहता है जब चांसलर रहते हुए 11 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर दिवाली पर दीया जलाया था. जैसे बापू के पीछे हनुमान हैं. मुझे गर्व है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की मेरी मेज़ पर भी गणेश जी हैं.''
हिंदू धर्म को लेकर ऋषि सुनक पहले भी बोलते रहे हैं. वो ब्रिटेन के पहले हिंदू प्रधानमंत्री हैं.
ऋषि सुनक के हिंदू धर्म से होने पर भारत में अकसर सोशल मीडिया पर चर्चा देखी जाती रही है.
2022 में जब कन्जर्वेटिव पार्टी ने सुनक के पीएम बनने पर मुहर लगाई थी, उस दिन दिवाली थी.
साल 2020 में जब ऋषि ने वित्त मंत्री पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी. ऐसे वीडियोज़ भी हैं, जिनमें ऋषि सुनक गाय की पूजा करते देखे जा सकते हैं. 2020 में दिवाली पर अपने घर के बाहर दीया जलाते हुए भी ऋषि सुनक को एक वीडियो में देखा जा सकता है.
वैदिक सोसाइटी टेम्पल साउथैंप्टन में हिन्दू समुदाय का एक विशाल मंदिर है जिसके संस्थापकों में ऋषि सुनक के परिवार के लोग भी शामिल हैं.
ऋषि का बचपन इसी मंदिर के इर्द-गिर्द गुज़रा जहाँ उन्होंने हिन्दू धर्म की शिक्षा हासिल की.
75 वर्षीय नरेश सोनचाटला, ऋषि सुनक को बचपन से जानते हैं. वो कहते हैं, "ऋषि सुनक जब छोटा बच्चा था तब से मंदिर आया करता था, उनके माता-पिता और दादा-दादी के साथ".
तब कंन्जर्वेटिव पार्टी की काफ़ी तारीफ़ हुई थी कि उसने किसी ग़ैर-गोरे और धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक को देश के शीर्ष पद के लिए मौक़ा दिया.
तब गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, ''ऋषि सुनक धर्मपरायण हिन्दू हैं. हालाँकि वह विरले ही सार्वजनिक रूप से अपने मज़हब को लेकर बात करते हैं. ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में ऋषि के नाम की घोषणा दिवाली के दिन हुई. प्रकाश का यह त्योहार दुनिया भर के करोड़ों हिन्दू, सिख और जैन मनाते हैं.''
सुनक ने 2015 में बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए इंटरव्यू में कहा था, ''ब्रिटिश भारतीय जनगणना में एक कैटिगरी पर निशान लगाते हैं. मैं तो पूरी तरह से ब्रिटिश हूँ. यह मेरा घर और देश है. लेकिन मेरी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत भारतीय है. मेरी पत्नी भारतीय है. मैं हिन्दू हूँ और इसमें कोई छुपाने वाली बात नहीं है.''

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हार के बाद क्या बोले सुनक
नतीजों के बाद ऋषि सुनक ने और समर्थकों से माफ़ी मांगी थी और कहा कि इस नतीजे से सीख लेने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, “आज रात की इस मुश्किल घड़ी में मैं रिचमंड और नॉर्थहेलर्टन संसदीय क्षेत्र के लोगों के प्रति शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने हमें नियमित रूप से समर्थन दिया. मैं दस साल पहले जब यहां आकर बसा था, तभी से आप लोगों ने मुझे और मेरे परिवार को बेशुमार प्यार दिया और हमें यहीं का होने का अहसास कराया. मैं आगे भी आपके सांसद के रूप में सेवा करने को लेकर उत्साहित हूं.''
वो बोले, ''ये मेरे लिए सौभाग्य की बात है. मैं अपने एजेंट और टीम को भी शुक्रिया कहता हूं, और मैं अपने विरोधियों को ऊर्जा से भरा और सकारात्मक चुनावी अभियान चलाने पर मुबारकबाद भी देता हूं.''
“मैंने किएर स्टार्मर को फोन कर उन्हें इस जीत की मुबारकबाद भी दी. आज, शांतिपूर्ण तरीक़े से सत्ता का हस्तांतरण होगा. सभी पक्षों में सद्भाव दिखा. इन सभी चीज़ों की वजह से हम सभी को अपने देश की स्थिरता और भविष्य को लेकर आश्वस्त होना चाहिए.”
“ब्रिटिश जनता ने आज रात अपना स्पष्ट फ़ैसला सुना दिया है. काफ़ी कुछ सीखने और देखने के लिए है और मैं इस हार की पूरी ज़िम्मेदारी लेता हूं. जो अच्छे और मेहनती कंज़र्वेटिव उम्मीदवार तमाम कोशिशों और स्थानीय स्तर पर काम करने और अपने समुदायों को लेकर प्रतिबद्धता के बावजूद हार गए हैं, उनसे मैं माफ़ी मांगता हूं.”
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