सूडान: मिसाइल गिरी तो बेटे से कहा, 'एक्शन फ़िल्म की शूटिंग चल रही है'

    • Author, ऐन सॉय
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, नैरोबी

सूडान में अब कई नए इलाक़े गृहयुद्ध की चपेट में आ गए हैं और इस देश में एक नई मानवीय आपदा का ख़तरा पैदा हो गया है. सूडान में क़रीब आठ महीने से गृहयुद्ध चल रहा है.

यहां लाखों लोग जंग के बीच फंसे हुए हैं लेकिन दुनिया का ध्यान उनकी ओर नहीं जा रहा.

सूडान की राजधानी खार्तूम में रहने वालीं राशा अमीन का पांच साल का बेटा अब रात को बिस्तर गीला कर देता है. ऐसा तबसे हुआ, जबसे उनके पड़ोसी के घर पर एक मिसाइल से धमाका हुआ था.

दो बच्चों की मां राशा बताती हैं, “रात को वह डर के मारे या कोई बुरा सपना देखकर जाग जाता है और रोने लगता है.”

अक्टूबर में हुए इस धमाके में उड़ी किसी नुकीली चीज़ से उनके घर की दीवार और एसी यूनिट पर गोल्फ़ बॉल के आकार का छेद हो गया है.

उस समय राशा का दूसरा बेटा, बाल-बाल बचा, जो पालने में सो रहा था. ये बच्चा सिर्फ़ 20 महीने का है.

ये मिसाइल राशा के घर के बगल में ठहरी सैन्य टुकड़ी को निशाना बनाते हुए दाग़ी गई थी. जब हमला हुआ तो उन्होंने बड़े बेटे से कहा, 'कुछ लोग बाहर एक्शन मूवी की शूटिंग कर रहे हैं.'

लेकिन ज़्यादा समय तक वह अपने बेटे को बहला नहीं सकीं.

अब तक 10 हज़ार की मौत

31 साल की स्कूल टीचर राशा कहती हैं कि आठ महीने से जारी गृहयुद्ध में उनका परिवार बार-बाल बचा है.

अब तक इस लड़ाई की चपेट में आकर कम से कम 10 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है और 70 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है.

लेकिन राशा और उनके परिवार के लोग इस जंग में फंस गए हैं और भारी तनाव का सामना कर रहे हैं. राशा के मकान में अभी भी नुक़सान के निशान दिखाई देते हैं.

उन्होंने अपने स्मार्टफ़ोन से वर्चुअली बीबीसी को अपना घर दिखाया. दीवारों में आई दरारें और बिना पल्लों की खिड़कियां और दरवाज़े दिखाए.

वो कहती हैं, “हम अभी भी डरे हुए हैं. हमें खिड़कियों से दूर फ़र्श पर गद्दे बिछाने पड़े हैं ताकि परिवार को सुरक्षित रख सकें. हम अलमारियों और फ्रिज के नज़दीक सोते हैं कि कहीं छत न गिर जाए.”

कैसे छिड़ी यह जंग

सूडान की सेना और इसकी पूर्व सहयोगी, शक्तिशाली पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फ़ोर्सेज़ (आरएसएफ) के बीच अप्रैल में लड़ाई छिड़ गई थी.

इसकी शुरुआत दोनों समूहों का नेतृत्व कर रहे जनरलों के बीच विवाद से हुई थी. इसके बाद से सेना को देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण करने में संघर्ष करना पड़ रहा है. राजधानी का ज़्यादातर हिस्सा और पश्चिमी दार्फ़ुर क्षेत्र उसे गंवाना पड़ा है.

अब सेना मध्य सूडान में पिछड़ रही है और आरएसएफ़ ने हाल ही में वाद मदानी शहर पर कब्ज़ा कर लिया है. अब तक यह इलाक़ा लड़ाई से बचा हुआ था.

जो लोग सुरक्षा के लिए खार्तूम से भागकर यहां आए थे, अब उन्हें कहीं और जाना पड़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पहले ही गेज़िरा से ढाई लाख लोग पलायन कर चुके हैं. इस क्षेत्र को सूडान का ब्रेड बास्केट कहा जाता है क्योंकि देश में 70 फ़ीसदी गेहूं का उत्पादन यहीं होता है.

ऐसे में, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम के प्रवक्ता ने आशंका जताई है कि आने वाले समय में गेहूं की कमी से खाने की कमी हो सकती है और भुखमरी की नौबत आ सकती है.

दुविधा के बीच लिया बड़ा फ़ैसला

राशा और उनके परिवार के लोगों ने भी जंग की शुरुआत में यहां से भागने की कोशिश की थी मगर वे नाकामयाब रहे थे. उनके पति और बच्चे ब्रितानी नागरिक हैं और उन्हें उम्मीद है कि उनके परिवार को यहां से निकाला जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि जिस जगह से ब्रितानी नागरिकों को निकाला जा रहा था, उस सैन्य अड्डे में जाने के लिए परिवार ने बहुत सारा पैसा दिया.

रास्ते में उन्हें युद्ध का डरावना मंज़र देखने को मिला. सड़क पर शव बिखरे हुए थे, फैक्ट्रियां जल रही थीं और लोग दुकानों को लूट रहे थे.

लेकिन सैन्य अड्डे पर पहुंचने पर उनकी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं. अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके लंदन में जन्मे पति और बच्चों को तो निकाला जा सकता है, लेकिन राशा को नहीं.

रोते हुए राशा ने कहा, “हम कहते रहे कि आप दुधमुंहे बच्चे को मां से अलग नहीं कर सके और हम वीज़ा ऑन अराइवल के लिए पैसे दे देंगे.”

मदद की गुहार

उनके पति ने कहा कि परिवार के पास घर लौटने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था, और उस समय ऐसा करने में ही समझदारी लगी.

उसके बाद से ही राशा के पति ब्रितानी सरकार से मदद मांग रहे हैं कि उनके परिवार के लोगों को सुरक्षित ढंग से ब्रिटेन ले जाया जा सके.

राशा और उन जैसे अन्य परिवारों को लेकर अफ्रीका के लिए ब्रितानी मंत्री एंड्रू मिचेल ने बीबीसी को बताया, “हमने कुछ मामलों में नियमों में ढील दी है ताकि इस मुसीबत में फंसे लोगों को कुछ राहत मिल सके. हमने परिवार से कहा है कि ब्रितानी फ़ॉरन ऑफ़िस के संपर्क में रहें.”

राशा और उनके पति ने फॉरेन ऑफिस को ईमेल लिखे हैं. एक सांसद को भी उन्होंने मेल किए, जिनका नाम परिवार ने ज़ाहिर नहीं किया. लेकिन उनका कहना है कि हर ओर से एक ऑटोमैटिक जवाब आया.

राशा के पति मोहम्मद ने कहा, 'ऐसा लग रहा है कि हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया गया है.'

ये परिवार खार्तूम में फंसा हुआ है. चारों ओर हथियारबंद लोग सड़कों पर घूम रहे हैं. आए दिन बिजली कट रही है और बुनियादी सुविधाओं की कमी है.

सुलह की नाकाम कोशिशें

सऊदी अरब और अन्य देशों की ओर से दोनों पक्षों के बीच सुलह करवाने और राजनीतिक समाधान निकालने की कोशिशें की गईं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है.

भिड़ रहे दोनों जनरल- सेना प्रमुख अब्देल फ़तह अल-बुरहान और आरएसएफ के मोहम्मद हमदान दगालो, अभी तक आमने-सामने आने के लिए राज़ी नहीं हुए हैं.

उन्हें वार्ता की मेज़ पर लाना और मुश्किल हो गया क्योंकि जनरल बुरहान ने एलान किया था कि या तो वो 'लड़ते हुए जीत हासिल करेंगे या फिर शहादत.'

अमेरिका और ब्रितानी सरकारों का कहना है कि दोनों पक्षों ने युद्ध अपराधों को अंजाम दिया है. आरएसएफ पर पश्चिम प्रांत दारफ़ुर में तो नस्लीय जनसंहार के आरोप लगे हैं.

हाल के महीनों में सूडान के ग़ैर-अरब समुदाय, ख़ासकर मसलित, निशाने पर हैं. उनके गांव जलाए जा रहे हैं और बड़े पैमाने पर बलात्कार की भी खबरें आई हैं.

ब्रितानी मंत्री मिचेल ने बीबीसी से कहा, “हम अपने सहयोगियों और एक जैसी सोच रखने वालों के साथ मिलकर उन लोगों की जवाबदेही के लिए जो भी संभव होगा करेंगे, जो मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों को तोड़ रहे हैं.”

खाने का संकट

सूडान में खाने की कमी पहले ही गंभीर रूप ले चुकी थी और अब युद्ध के कारण हालात और ख़राब हो गए हैं. खाना और मदद बांटना भी मुश्किल हो गया है.

सूडान के लिए वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की प्रवक्ता लेनी किंज़ली ने कहा, “हम पिछले तीन महीनों में खार्तूम में सिर्फ एक बार खाद्य मदद लेकर पहुंच पाए हैं.”

आने वाले समय में खाने की कमी और गंभीर हो सकती है. किंज़ली ने बीबीसी को बताया, “देश में कहीं भी कोई सुरक्षित नहीं है क्योंकि हालात बहुत तेज़ी से बदल रहे हैं. आने वाले समय में हो सकता है कि खाने को लेकर आपदा पैदा हो जाए.”

खार्तूम में राशा और उनके परिवार के लोग रिश्तेदारों की मदद के सहारे हैं.

वो अपने भाई को भेजती हैं कि जो कुछ हो सके, ले आओ. अगर किस्मत ठीक रहती है तो वो छोटे बच्चे के लिए दो चम्मच पाउडर मिल्क और दो से तीन नैपी खरीद लाता है.

राशा कहती हैं, “मीट या चिकन का तो विकल्प ही नहीं है.” वह कहती हैं कि अब उन्हें बीन और सब्ज़ियां ही खानी पड़ रही हैं.

उन्होंने बताया कि बच्चों का वज़न बहुत गिर चुका है. इतना ज़्यादा कि उनकी पैंट कमर से सरक रही है.

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