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'नेता नहीं, बेटा बनने आया हूं': क्या खेसारी लाल यादव बीजेपी के 'गढ़' छपरा में दे पाएंगे चुनौती
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बिहार के छपरा से
छपरा शहर के प्रभुनाथ नगर का क़दम चौक. सुबह के ग्यारह बजे हैं. चौक पर खेसारी लाल यादव को विधायक बनाने के लिए गाने ऊंची आवाज़ में बजाए जा रहे हैं.
कुछ देर बाद बिजली चली जाती है. अब पूरे चौक पर सिर्फ़ लोगों की बातचीत और गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़ सुनाई दे रही है.
खेसारी के समर्थक जल्द ही जनरेटर की व्यवस्था करते हैं ताकि उनके गीत दोबारा बजाकर माहौल बनाए रखा जा सके.
थोड़ी देर बाद खेसारी लाल यादव गेंदे की मालाओं से सजी अपनी थार गाड़ी में दिखाई देते हैं. उन्हें देखने और मोबाइल में कैद करने के लिए नौजवान और बच्चे आगे बढ़ जाते हैं.
कुछ बच्चे पिता के कंधों पर बैठकर अपने पसंदीदा अभिनेता को देख रहे हैं, जबकि कुछ महिलाएं सिर के आंचल को दांतों से दबाए उन्हें एकटक देखती हैं.
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भीड़ में मौजूद स्मिता देवी बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, "खेसारी को देखने आए हैं. अब तक मोबाइल पर ही देखा था. सामने से देखने में अच्छा लगता है. इनको वोट देकर जिताएंगे. इनका व्यवहार भी अच्छा है."
भोजपुरी गायक और अभिनेता शत्रुघ्न यादव उर्फ़ खेसारी लाल यादव छपरा विधानसभा से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उम्मीदवार हैं.
वह पहली बार चुनावी मैदान में हैं. भोजपुरी इलाके के छपरा में खेसारी लाल यादव की लोकप्रियता चरम पर है.
कई जगहों पर उनकी छोटी चुनावी सभाओं में इतनी भीड़ जुट जाती है कि भगदड़ की आशंका से उन्हें कार्यक्रम बीच में ही रोकना पड़ता है.
पिछले तीन चुनावों में बीजेपी का दबदबा
सारण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली छपरा विधानसभा सीट को बीजेपी का मज़बूत गढ़ माना जाता है. पिछले तीन विधानसभा चुनावों 2010, 2015 और 2020 में यहां बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.
बीजेपी के सी. एन. गुप्ता 2015 और 2020 में छपरा से विधायक रहे.
इस बार मुकाबला दो नए चेहरों के बीच है. बीजेपी ने छोटी कुमारी को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले ज़िला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं. उनके पति धर्मेंद्र साह बीजेपी के ज़िला महामंत्री हैं.
वहीं आरजेडी ने इस सीट से भोजपुरी अभिनेता और गायक खेसारी लाल यादव को मैदान में उतारा है. पहले इस सीट से खेसारी की पत्नी चंदा देवी को उम्मीदवार बनाया जाना तय माना जा रहा था, लेकिन आख़िरी पलों में पार्टी ने टिकट खेसारी को दे दिया.
पहली बार चुनाव लड़ रहे खेसारी लाल यादव बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "मैं नेता नहीं, बेटा बनने आया हूं. मैं इमोशनल आदमी हूं और मुझे छपरा के लिए कुछ करना है क्योंकि मैं पलायन का दर्द समझता हूं. आज तक छपरा के लिए किसी ने कुछ नहीं किया, लेकिन मैं कुछ करना चाहता हूं और हमारे तेजस्वी भइया भी बिहार में बदलाव लाना चाहते हैं."
'वो एक्टर हैं और हम लोग समर्पित कार्यकर्ता हैं'
खेसारी लाल यादव जहां बातों का तुरंत जवाब देते हैं, वहीं बीजेपी उम्मीदवार छोटी कुमारी स्वभाव से शांत और कम बोलने वाली हैं. छपरा के रीविलगंज में आयोजित उनकी एक चुनावी सभा में लगभग 200 से 300 लोग मौजूद थे.
इस सभा में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी हेलिकॉप्टर से पहुंचे थे. सभा के दौरान जब सम्राट चौधरी छोटी कुमारी का नाम लेते, तो मंच पर मौजूद लोग बार-बार उन्हें खड़े होने और हाथ जोड़ने का इशारा करते.
वैश्य समुदाय से आने वाली छोटी कुमारी बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, "खेसारी लाल एक्टर हैं, लेकिन हम लोग समर्पित कार्यकर्ता हैं. हमने छपरा के लिए काम किया है और अब उस काम को आगे बढ़ाएंगे. हमारी सरकार ने महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया है और फिर से एनडीए सरकार बनेगी तो महिलाओं के लिए और काम किया जाएगा."
छपरा विधानसभा क्षेत्र शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों को समेटे हुए है.
यहां वैश्य मतदाताओं की संख्या अच्छी है, और यह समुदाय परंपरागत रूप से बीजेपी का मज़बूत वोट बैंक माना जाता है.
निर्दलीय बना रहे लड़ाई को दिलचस्प
छपरा विधानसभा सीट पर मुख्य मुक़ाबला बीजेपी और आरजेडी के बीच है, लेकिन इस बार यह लड़ाई दो निर्दलीय उम्मीदवारों की वजह से और दिलचस्प बन गई है.
दोनों निर्दलीय उम्मीदवार पहले बीजेपी के स्थानीय नेता रह चुके हैं. राखी गुप्ता और राणा यशवंत प्रताप सिंह ने इस सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है.
दैनिक अख़बार प्रभात ख़बर के स्थानीय पत्रकार अमित कुमार प्रसाद बताते हैं, "बीजेपी के उम्मीदवार के लिए यहां मुश्किल बढ़ती दिख रही है. राखी गुप्ता यहां पर बहुत चर्चित नेता हैं और राणा यशवंत प्रताप सिंह ने कुंभ के दौरान हज़ारों लोगों को प्रयागराज में स्नान कराया था. स्थानीय स्तर पर ये बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं. छपरा जहां वैश्य मतदाताओं की बहुलता है, वहां वैश्यों का वोट छोटी कुमारी, राखी और राणा यशवंत के बीच बंटता दिख रहा है. इसका सीधा फ़ायदा खेसारी लाल यादव को हो सकता है."
दिलचस्प यह है कि सारण लोकसभा सीट कभी आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का संसदीय क्षेत्र रही है. लेकिन साल 2014 से इस सीट पर बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूढ़ी लगातार आरजेडी उम्मीदवारों को हराते रहे हैं.
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य भी इसी सीट से हारी थीं.
इसी तरह छपरा विधानसभा सीट पर भी पिछले तीन बार से बीजेपी का क़ब्ज़ा रहा है.
खेसारी लाल यादव को उम्मीदवार बनाकर आरजेडी अपने पुराने जनाधार को फिर से मज़बूत करने की कोशिश कर रही है.
यही वजह है कि सारण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली परसा विधानसभा सीट से आरजेडी ने पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती करिश्मा राय को उम्मीदवार बनाया है.
क्या कहते हैं मतदाता?
छपरा के मतदाताओं की राय इस बार मिली-जुली है.
जे. पी. सिंह नाम के एक स्थानीय व्यक्ति बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "इस बार हमें लगता है, राखी गुप्ता को जीतना चाहिए. कहने को छपरा ज़िला है, लेकिन हमारा शहर बहुत गंदा है. खेसारी बाहरी उम्मीदवार हैं, जीत कर चले जाएंगे और कुछ नहीं करेंगे."
वहीं रोशनी भारद्वाज कहती हैं, "हमें ऐसा नेता चाहिए जो पढ़ा-लिखा हो और हमें रोज़गार दे. उसका कैरेक्टर भी अच्छा होना चाहिए और महिलाओं की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए."
रजनी कुमारी कहती हैं, "जो हमें जलजमाव से मुक्ति दिला दे, हमें ऐसा नेता चाहिए."
कुछ मतदाता ऐसे भी हैं जिन्होंने अभी तक चुनाव या उम्मीदवारों को लेकर कोई राय नहीं बनाई है.
छपरा शहर में मंजू देवी कहती हैं, "हम लोग कमाते हैं, खाते हैं और जाकर सो जाते हैं. चुनाव का दिन आएगा तो देखा जाएगा."
और भी भोजपुरी कलाकार हैं मैदान में
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार खेसारी लाल यादव अकेले भोजपुरी एक्टर-सिंगर नहीं हैं, जो चुनाव मैदान में किस्मत आज़मा रहे हैं. कुछ ऐसे भी हैं जिनकी पत्नियां चुनाव मैदान में हैं.
भोजपुरी स्टार और बीजेपी नेता पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह भी काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं. वहीं करहगर विधानसभा क्षेत्र से जनसुराज ने भोजपुरी गायक रितेश पांडेय को उम्मीदवार बनाया है.
मढ़ौरा विधानसभा से एलजेपी (आर) ने सीमा सिंह को बतौर उम्मीदवार उतारा था. हालांकि, उनका नामांकन खामियों के चलते रद्द हो गया.
बहरहाल, छपरा विधानसभा के लिए पहले चरण में यानी 6 नवंबर को मतदान होगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित