मणिपुर: इम्फाल में आख़िरी बचे कुकी परिवारों को रातों-रात हटाया गया - प्रेस रिव्यू

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बीते चार महीनों से नस्लीय हिंसा की आग से जूझ रहे मणिपुर की राजधानी इम्फाल में रह रहे कुछ कुकी परिवारों को शनिवार आधी रात के बाद वहां से निकाल लिया गया है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार राजधानी के न्यू लेम्बुलेन में रह रहे इन 10 परिवारों के कुल 24 सदस्यों को एक विशेष अभियान के ज़रिए वहां से निकाल कर पहाड़ों में ले जाया गया है.
बाहर निकाले गए परिवारों में से एक 78 साल के पादरी प्रिम वाइपे का परिवार है. वो कहते हैं कि सुरक्षाबलों ने आधी रात उनके घर का दरवाज़ा खटखटाकर उन्हें नींद से जगाया और उन्हें घर से बाहर निकलने और साथ चलने को कहा.
प्रिम कहते हैं कि उन्हें पहले से इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्हें सामान बांधने तक का वक़्त नहीं मिल पाया और उन्हें सेना की बुलेट प्रूफ गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया.
द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार प्रिम वाइपे का आरोप है कि उन्हें अचानक दूसरी जगह ले जाने के कारणों के बारे में उन्हें कुछ नहीं बताया गया था. वो कहते हैं कि "ये बचाव अभियान नहीं था बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे हमें अगवा किया जा रहा है."
जहां टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने परिवारों की संख्या 10 बताई है वहीं द हिंदू लिखता है कि यहां कुल पांच परिवार थे जिन्हें यहां से निकाल कर बाहर ले जाया गया है.
प्रिम वाइपे के हवाले से द हिंदू कहता है कि न्यू लेम्बुलेन के इलाक़े में कुकी समुदाय के क़रीब 300 परिवार रहा करते थे. ये जगह मुख्यमंत्री के आवास से महज़ डेढ़ किलोमीटर दूर है और पुलिस मुख्यालय के करीब है. हिंसा शुरू होने के बाद यहां से बड़ी संख्या में लोगों ने पलायन किया लेकिन पांच परिवारों ने यहीं रहने का फ़ैसला किया था.
वो कहते हैं कि तीन मई में हिंसा शुरू होने के बाद से इलाक़े की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी जिसकी वजह ये यहां भीड़ के हमले कम हुए. लेकिन इस दौरान उन्हें ज़रूरत के सामान के लिए मैतेई समुदाय के अपने मित्रों पर निर्भर रहना पड़ा.
क़रीब छह दिन पहले कुछ अज्ञात लोगों ने इलाक़े के एक खाली पड़े घर को आग लगा दी. साथ ही एक दिन भीड़ ने भी हमला किया जिसे पुलिस ने आंसू गैस छोड़कर तितर-बितर किया.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया लिखता है कि कुछ लोगों का मानना है कि दिल्ली में हो रहे जी20 देशों के सम्मेलन के दौरान मणिपुर में कोई अप्रिय घटना न हो इसलिए एहतियातन इन लोगों को उनके घरों से निकाल कर पहाड़ों में पहुंचाया गया है.
इन परिवारों को इम्फाल से 27 किलोमीटर दूर कांगपोकपी के मोटबुंग ले जाया गया है जहां असम राइफ़ल्स के राहत शिविर हैं और जहां कुकी और दूसरे आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं.
मणिपुर में हुई नस्लीय हिंसा ने वहां के समाज में एक गहरी खाई पैदा कर दी है, जहां ग़ैर आदिवासी आसपास से पहाड़ों से पलायन कर मैदानी हिस्सों की तरफ आ रहे हैं वहीं इम्फाल घाटी में रहने वाले आदिवासी पहाड़ों की तरफ पलायन कर रहे हैं.
संसद के विशेष सत्र में नहीं होगा प्रश्नकाल
लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय ने कहा है कि 18 से 22 सितंबर तक होने वाले संसद के विशेष सत्र में न तो प्रश्नकाल होगा और न ही प्राइवेट मेंबर बिज़नेस किया जाएगा.
द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार लोकसभा सचिवालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर कहा है कि संसद के विशेष सत्र के कुल पांच दिन चलेगा और कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में सांसदों को बताया जाएगा.
लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना में कहा, "सत्रहवीं लोकसभा का तेरहवां सत्र सोमवार 18 सितंबर 2023 से शुरू होगा और सरकार के कामकाज को देखते हुए यह 22 सितंबर तक चलेगा."
वहीं राज्यसभा सचिवालय ने जारी अधिसूचना में कहा, "राज्यसभा का 2061वां सत्र सोमवार 18 सितंबर 2023 से शुरू होगा."
आमतौर पर हर साल संसद के तीन सत्र आयोजित किए जाते हैं- बजट सत्र, मॉनसून सत्र और शीत सत्र.
31 अगस्त को संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने पांच दिन के संसद के विशेष सत्र की घोषणा की थी, हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया था कि इसका एजेंडा क्या होगा. इस कारण इसे लेकर कयास लगाए जाने लगे.
अख़बार लिखता है कि सूत्रों का कहना था कि विशेष सत्र के दौरान कामकाज संसद की नई इमारत में किया जाए, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने मई 28 को किया था.
लेकिन विशेष सत्र बुलाने के ठीक एक दिन बार सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन की संभावना तलाशने के लिए समिति बनाई जिसके बाद ये कयास भी लगाए जाने लगे कि हो सकता है कि ये विशेष सत्र पुरानी संसद में लोकसभा का आख़िरी सत्र हो.

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कर्नाटक: मुस्लिम छात्रों को टीचर ने कहा- 'पाकिस्तान जाओ'
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार कर्नाटक में शिक्षा विभाग ने शिवमोगा ज़िले की एक सरकारी स्कूल की टीचर का ट्रांसफर कर उनके ख़िलाफ़ जांच शुरू कर दी है.
टीचर पर आरोप है कि उन्होंने पांचवीं कक्षा के दो मुस्लिम छात्रों से कथित तौर पर "पाकिस्तान जाने" के लिए कहा.
जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) की अल्पसंख्यक शाखा की ज़िला इकाई के अध्यक्ष ए नज़रुल्लाह ने शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है.
उन्होंने कहा, "गुरुवार को मंजुला देवी नाम की टीचर 5वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ा रही थीं. इस दौरान दो छात्र आपस में झगड़ने लगे. ये दोनों मुस्लिम समुदाय के थे. टीचर ने उन्हें डांटा और कथित तौर पर उनसे कहा कि "यह आपका देश नहीं है."
अख़बार के अनुसार घटना की जांच करने वाले ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बी. नागराज ने कहा कि कक्षा के अन्य छात्रों ने घटना की पुष्टि की है.
उन्होंने कहा, "जब बच्चों ने हमें इस घटना के बारे में बताया तो हम स्तब्ध रह गए. हमने इस मामल में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन के पास शिकायत दर्ज की जिसके बाद टीचर के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है."
उन्होंने बताया, "टीचर ने कथित तौर पर छात्रों से कहा कि यह आपका देश नहीं है, यह हिंदुओं का देश है. आपको पाकिस्तान चले जाना चाहिए. आप हमेशा के लिए हमारे गुलाम हैं."

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50 फ़ीसदी आरक्षण कोटे पर इंडिया गठबंधन में हुई चर्चा- शरद पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने दावा किया है कि 28 राजनीतिक दलों के इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण के लिए निर्धारित 50 फीसदी के कोटे को हटाने के मुद्दे पर चर्चा की है.
अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार जालना में प्रदर्शनकरियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद शरद पवार ने घायलों से मुलाक़ात की. इसके बाद हुए संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, "28 राजनीतिक दलों के गठबंधन (जिसमें सात मुख्यमंत्री भी हैं) उसमें इस मुद्दे पर चर्चा हुई है कि हमें राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण के लिए निर्धारित 50 फीसदी के कोटे को हटाने की कोशिश करनी चाहिए. हालांकि, हमने इस पर कोई आख़िरी फ़ैसला अभी नहीं किया है. इस मुद्दे को मिटाने का यही एकमात्र रास्ता है."
पवार ने इशारों में कहा कि आरक्षण की 50 फीसदी सीमा को बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं की गई है. उन्होंने ये भी कहा कि संसद के विशेष सत्र के दौरान एनसीपी इस मुद्दे को उठाने की कोशिश करेगी.
अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा कि "इस मामले में केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को प्रभावित किए बिना यही एकमात्र तरीक़ा है जिसके ज़रिए हम आरक्षण दे सकते हैं. केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इस मुद्दे पर काम करना चाहिए."
जालना में शुक्रवार को आरक्षण के मुद्दे को लेकर मराठा समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसने हिंसक रूप ले लिया. इस दौरान कम से कम 57 पुलिसकर्मी और लगभग 25 प्रदर्शनकारी घायल हो गए.
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की आबादी क़रीब 30 फीसदी है. ये समुदाय राजनीतिक रूप से शक्तिशाली है और आरक्षण की मांग कर रहा है.
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