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अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और विल्मोर को वापस लाने का प्लान नासा ने बताया
- Author, होली कोल, रेबेका मोरेल और ग्रेग ब्रोसनन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
पिछले दो महीने से अंतरिक्ष में फंसे नासा के दोनों अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विल्मोर को अगले साल फ़रवरी में स्पेसएक्स से धरती पर वापस लाया जाएगा.
नासा ने कहा कि दोनों यात्री जिस बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष विमान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर गए थे वो अब "बिना क्रू" के लौटेगा.
इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने बीते पांच जून को अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी और योजना के अनुसार यह आठ दिन का मिशन होने वाला था लेकिन अब उन्हें अंतरिक्ष की कक्षा में आठ महीने बिताने पड़ेंगे.
लेकिन स्टारलाइनर अंतरिक्षयान जब आईएसएस के क़रीब पहुंचा तो उसमें समस्याएं पैदा हो गईं और इसके पांच थ्रस्टर्स बंद हो गए, जो यान को दिशा देते हैं.
इसमें हीलियम गैस भी ख़त्म हो गई, जिससे जलने वाले ईंधन पर यान को निर्भर होना पड़ा.
नासा ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए बोइंग और स्पेस एक्स को कमर्शियल फ़्लाइट्स के लिए अरबों डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया है.
बोइंग को 4.2 अरब डॉलर, जबकि एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को 2.6 अरब डॉलर का कांट्रैक्ट मिला है.
स्पेसएक्स में दो सीटें खाली रहेंगी
अभी तक स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष में मानव युक्त नौ उड़ानों को अंजाम दिया है लेकिन बोइंग का यह पहला मानव युक्त मिशन है.
बोइंग और नासा के इंजीनियर स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में तकनीकी समस्याओं को समझने के लिए काफ़ी समय बिता चुके हैं.
उन्होंने कई टेस्ट किए और डेटा इकट्ठा किया, दोनों जगह अंतरिक्ष में भी और धरती पर भी. उन्हें उम्मीद थी कि वे समस्या की जड़ तक पहुंच जाएंगे और स्टारलाइनर से ही वे अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने का रास्ता तलाश लेंगे.
शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में नासा एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा कि इस विमान में सुधार के लिए क्या ज़रूरी है इसे समझने के लिए नासा, बोइंग के साथ मिलकर काम कर रहा है.
उन्होंने कहा, "अंतरिक्ष उड़ान एक जोख़िम है, भले ही यह सबसे सुरक्षित या सबसे रूटीन उड़ान हो, लेकिन जब एक टेस्ट फ़्लाइट की बात आती है तो न तो यह सुरक्षित होता है न रूटीन. हमारा केंद्रीय मूल्य सुरक्षा है और यही हमारा मार्गदर्शक है."
अब दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूदगी के समय को फ़रवरी 2025 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है ताकि वे स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन स्पेसक्राफ़्ट से वापस लौट सकें.
इस अतिरिक्त समय में स्पेसएक्स को अपने अगले यान को लॉन्च करने का समय मिल जाएगा, जिसकी उड़ान सितम्बर के अंत में निर्धारित है.
पहले इसमें चार अंतरिक्ष यात्री जाने वाले थे लेकिन अब अंतरिक्ष स्टेशन तक इससे केवल दो यात्री ही जाएंगे.
इससे सुनीता विलियम्स और विल्मोर के लिए जगह बनेगी और जब अगली फ़रवरी में ये यान पृथ्वी पर लौटेगा तो उसमें वे दोनों भी बैठेंगे.
स्टारलाइनर बिना क्रू लौटेगा
नासा कह चुका है कि दोनों अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में पहले भी दो बार लंबे समय के लिए रह चुके हैं और वो टेस्ट फ़्लाइट से जुड़े जोख़िमों को समझते हैं, जिसमें तय सीमा से अधिक समय तक अंतरिक्ष में रुकना भी शामिल है.
नासा ने कहा कि 58 साल की सुनीता विलियम्स और 61 साल के विल्मोर ने वापसी की योजना का पूरा समर्थन किया है और अगले कुछ महीने वो अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक काम, अंतरिक्ष में मरम्मत के काम और शायद "स्पेसवॉक" भी करेंगे.
अंतरिक्ष यान के विकास में असफलताओं के कारण बोइंग के स्टारलाइनर में पहले ही कई सालों की देरी हो चुकी है.
पिछली मानव रहित उड़ानों को भी तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा था.
एक बयान में, बोइंग ने कहा कि उसने "क्रू और अंतरिक्ष यान की सुरक्षा पर" ध्यान केंद्रित करना जारी रखा है.
इसमें कहा गया है, "हम नासा के निर्धारित मिशन को अमल में ला रहे हैं, और हम एक सुरक्षित और सफल मानव रहित वापसी की तैयारी कर रहे हैं."
स्टारलाइनर में क्या हुई थी गड़बड़ी?
स्टारलाइनर जब भेजा गया तो उसमें एक छोटा हीलियम लीक होने लगा था और जब वो आईएसएस पर पहुंचा तो दो और लीक होने लगे.
लॉन्च के समय लीक छोटा सा था. लेकिन दूसरा इससे पांच गुना बड़ा था.
जब यान आईएसएस की ओर बढ़ रहा था, 28 मैनुअरिंग थ्रस्टर बंद हो गए थे, जिनमें चार दोबारा शुरू हुए. इसके बाद प्रोपल्शन सिस्टम में दो और हीलियम लीक का पता चला.
ज़मीन पर हुई जांच में पता चला कि थ्रस्टर की समस्या गर्मी के कारण टेफ़्लान सील के फूल जाने से पैदा हुई, जिससे ईंधन कंबशन चैंबर में नहीं जा पाया.
बोइंग के मार्क नापी ने कहा कि ये समस्याएं सिर्फ मानव युक्त फ़्लाइट टेस्ट में ही पता लग सकती थीं.
लेकिन कुछ इंजीनियरों का मानना है कि ये समस्या मानव रहित टेस्ट मिशन या यान की डिज़ाइन के शुरुआती चरण में ही पता लगाई जा सकती थी.
बोइंग के यान की यह पहली दिक्कत नहीं है.
इसकी पहली मानव रहित उड़ान 2019 में हुई थी, लेकिन सॉफ़्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से इंजन स्टार्ट नहीं हो पाया और यह अंतरिक्ष स्टेशन तक नहीं पहुंच पाया.
दूसरी कोशिश 2022 में की गई, लेकिन यान में फिर से कुछ थ्रस्टरों और यान के कूलिंग सिस्टम में दिक्कतें आईं.
इस बीच बोइंग के प्रतिद्वंद्वी एलन मस्क के स्पेसएक्स ने चार साल पहले ड्रैगन स्पेसक्राफ़्ट को आईएसएस तक पहुंचा दिया और उसके बाद से वो अंतरिक्ष यात्रियों और सामान को ला और ले जा रहा है.
और ये सब तब हो रहा है जब बोइंग के धरती पर उड़ने वाले विमानों में भी गड़बड़ियों को लेकर जांच का दायरा बढ़ रहा है.
अब ये तय लग रहा है कि लॉन्चपैड बनने के लिए बोइंग स्टारलाइनर को एक लंबा रास्ता तय करना होगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित