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जब दिल्ली में कोर्ट की महिला जज को मिली धमकी, "तू बाहर मिल, देखते हैं कैसे ज़िंदा घर जाती है"
- Author, उमंग पोद्दार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली की एक अदालत में महिला जज को फ़ैसला सुनाने के बाद धमकी मिली है. ये धमकी किसी और ने नहीं, बल्कि दोषी ठहराए गए व्यक्ति और उनका केस लड़ने वाले वकील ने दी है.
दिल्ली में द्वारका कोर्ट की न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवांगी मंगला ने ये बातें ख़ुद अपने फ़ैसले में लिखी हैं.
उन्होंने बताया है कि जब उन्होंने चेक बाउंस होने के मामले में राज सिंह नाम के शख़्स को दोषी ठहराया, तो राज सिंह और उनके वकील अतुल कुमार ने उन्हें धमकी दी.
जज शिवांगी मंगला ने अपने फ़ैसले में लिखा, "जब अभियुक्त ने सुना कि फ़ैसला उनके ख़िलाफ़ आया है, तो वे ग़ुस्से से भड़क गए और अदालत में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करके परेशान करने लगे."
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वे आगे लिखती हैं कि उनकी माँ पर टिप्पणी की गई और उन पर कोई चीज़ फेंकने की कोशिश भी हुई.
इस दौरान दोषी ठहराए गए राज सिंह ने अपने वकील से ये भी कहा कि वे कुछ भी करके फ़ैसला अपने पक्ष में ले आएँ.
जज शिवांगी ने बताया कि दोषी ठहराए गए राज सिंह ने उनसे कहा, "तू है क्या चीज़. तू बाहर मिल. देखते हैं कैसे ज़िंदा घर जाती है."
उनका कहना है कि फिर वकील और दोषी ठहराए गए व्यक्ति ने मिल कर उन्हें मानसिक और शारीरिक तरीक़े से परेशान किया कि वो इस्तीफ़ा दे दें.
उन्होंने फैसले में लिखा, "दोनों ने कहा कि अभियुक्त को निर्दोष ठहराएँ, वरना वो उनके ख़िलाफ़ शिकायत कर देंगे और उन्हें ज़बरदस्ती इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर देंगे."
मामला क्या था?
साल 2019 में विंटेज क्रेडिट एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी ने राज सिंह के ख़िलाफ़ एक केस दायर किया था.
केस में ये कहा गया था कि एक व्यक्ति सुभाष चंद ने उनसे पाँच लाख रुपए उधार लिए थे, जिसे चुकाने की गारंटी राज सिंह ने ली थी. जब सुभाष चंद उधार नहीं चुका पाए, तो राज सिंह ने कंपनी को तीन लाख चालीस हज़ार रुपए का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया.
कोर्ट ने राज सिंह को चेक बाउंस होने के लिए दोषी ठहराया और उन्हें 22 महीने की 'सामान्य कारावास' और छह लाख पैंसठ हज़ार रुपये जुर्माना देने की सज़ा सुनाई.
सामान्य कारावास का मतलब है कि दोषी को जेल में रखा जाएगा, लेकिन उनसे कोई श्रम या कड़ी मेहनत नहीं करवाई जाएगी.
राज सिंह ने इसके ख़िलाफ़ सेशंस कोर्ट में अपील दाख़िल की है. इसलिए अभी इस सज़ा को अदालत ने लंबित रखा है.
राज सिंह ने कोर्ट में कहा कि वो एक रिटायर सरकारी शिक्षक हैं, जो 63 साल के हैं और पेंशन पर गुज़ारा कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि उनके तीन बेटे हैं, जो उन पर निर्भर हैं.
उन्होंने इसी आधार पर ख़ुद को माफ़ी दिए जाने की अपील की है.
अब आगे क्या?
राज सिंह पर चेक बाउंस होने की कार्रवाई तो चलेगी, लेकिन साथ ही उनपर और उनके वकील पर जज शिवांगी मंगला के प्रति व्यवहार के लिए भी अदालत में मामला चल सकता है.
जज शिवांगी मंगला ने अपने फ़ैसले में लिखा है कि वे राष्ट्रीय महिला आयोग के सामने धमकी और उत्पीड़न का मामला दर्ज करने के लिए उचित कदम उठाएँगी.
साथ ही उन्होंने वकील अतुल कुमार के ख़िलाफ़ 'शो-कॉज' नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि उनके ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में कोर्ट की अवमानना के लिए क़ानूनी कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?
कोर्ट की अवमानना के लिए छह महीने तक की सज़ा हो सकती है. साथ ही एडवोकेट्स एक्ट के तहत वकील के ख़िलाफ़ 'प्रोफ़ेशनल मिसकंडक्ट' के लिए उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है.
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत जज भी 'पब्लिक सर्वेंट' की श्रेणी में आते हैं.
क़ानून में कई प्रावधान हैं, जो किसी भी पब्लिक सर्वेंट को उनका काम करने से रोकने को दंडनीय अपराध बनाते हैं.
बीएनएस की धारा 224 के तहत किसी भी पब्लिक सर्वेंट को धमकी देने पर दो साल तक की सज़ा हो सकती है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
इसके अलावा आम नागरिकों के लिए जो क़ानूनी प्रावधान हैं, वो भी ऐसे मामले में लागू हो सकते हैं.
किसी को जान से मारने की धमकी देने पर बीएनएस की धारा 351 के तहत जुर्माने के साथ ही सात साल तक की सज़ा हो सकती है.
जबकि बीएनएस की धारा 79 के तहत किसी महिला की गरिमा का अपमान करने पर तीन साल तक की सज़ा हो सकती है और जुर्माना भी लग सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित